शोध: रोशनी से दौड़ेगा इंटरनेट, वाई-फाई के साथ मिलकर लाई-फाई ने दी 36 फीसद अधिक स्पीड
आईआईआईटी दिल्ली के शोधकर्ताओं ने हाईब्रिड लाई-फाई और वाई-फाई नेटवर्क का प्रोटोटाइप तैयार किया है, जिसने वाई-फाई की तुलना में 36.13 फीसद अधिक डेटा गति प्राप्त की है। यह तकनीक कार्यालयों, स्कूलों और अस्पतालों में लागू की जा सकती है। ली-फाई की कवरेज सीमित होती है, जबकि वाई-फाई व्यापक क्षेत्र को कवर करता है।

हाईब्रिड नेटवर्क ने अकेले वाई-फाई की तुलना में 36.13 फीसद अधिक किया काम आईआईआईटी दिल्ली ने तैयार किया प्रोटोटाइप
नई दिल्ली। अभिनव उपाध्याय
घर, दफ्तर, स्कूल या अस्पताल में इंटरनेट के लिए आने वाले समय में सिर्फ वाई-फाई पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। रोशनी के जरिये इंटरनेट पहुंचाने वाली लाइट फिडेलिटी यानी लाई-फाई तकनीक वाई-फाई के साथ मिलकर तेज और अधिक क्षमता वाला वायरलेस नेटवर्क तैयार कर सकती है। इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी दिल्ली (आईआईआईटी-दिल्ली) में इस दिशा में शोध चल रहा है। शोधकर्ताओं ने लाई-फाई और वाई-फाई को जोड़कर वास्तविक वातावरण में संचार और वीडियो प्रसारण का परीक्षण किया है。
संशोधन की टीम
प्रो.विवेक बोहरा के नेतृत्व में शोधार्थी राहुल और सास्वती परमिता ने इस शोध पर काम किया है। इस दिशा में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस-लाई-फाई और वायरोकॉम अनुसंधान समूह इस तकनीक को प्रयोगशाला से आगे व्यावहारिक संचार व्यवस्था की ओर ले जाने पर काम कर रहा है। समूह ने हाइब्रिड लाई-फाई-वाई-फाई नेटवर्क का प्रोटोटाइप तैयार किया है। इसमें वास्तविक संचार और वीडियो प्रसारण का प्रदर्शन भी किया गया है।
लाई-फाई तकनीक
इसके शोधकर्ता राहुल ने बताया कि लाई-फाई में प्रकाश के जरिये डेटा का संचार किया जाता है। इसके लिए एलईडी रोशनी और विशेष संचार उपकरणों की जरूरत होती है। जहां प्रकाश का सीधा संपर्क अच्छा होता है, वहां लाई-फाई अधिक क्षमता वाली कनेक्टिविटी दे सकता है। हालांकि इसकी कवरेज आम तौर पर वाई-फाई से छोटी होती है। दीवार, कोई वस्तु या व्यक्ति प्रकाश के रास्ते में आने पर कनेक्शन प्रभावित हो सकता है।
यही वजह है कि शोधकर्ता लाई-फाई और वाई-फाई एक-दूसरे का पूरक बनाकर बेहतर परिणाम दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि वाई-फाई व्यापक क्षेत्र में कनेक्टिविटी बनाए रख सकता है, जबकि लाई-फाई अधिक डेटा की जरूरत वाले छोटे क्षेत्रों में अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध करा सकता है。
प्रोटोटाइप परीक्षण
हाईब्रिड नेटवर्क ने अकेले वाई-फाई की तुलना में 36.13 फीसद अधिक किया काम
इसके शोधकर्ता राहुल ने बताया कि अभी तैयार प्रोटोटाइप में हमने एक वास्तविक कार्यालय वातावरण में 3 लाई-फाई एक्सेस पॉइंट और 1 वाई-फाई एक्सेस पॉइंट स्थापित करके परीक्षण किया। लाई-फाई एक्सेस पॉइंट उपयोगकर्ता से लगभग 2.15 मीटर की ऊंचाई पर लगाए गए थे और प्रत्येक लाई-फाई एक्सेस पॉइंट में 24 दृश्यमान प्रकाश एलईडी का उपयोग किया गया था। हमने 2 और 3 उपयोगकर्ताओं के साथ वास्तविक परीक्षण किए। 3 उपयोगकर्ताओं की स्थिति में एक उपयोगकर्ता लाई-फाई क्षेत्र में चलते हुए अलग-अलग लाई-फाई एक्सेस पॉइंट के बीच तथा आवश्यकता पड़ने पर वाई-फाई पर स्थानांतरित होता रहा। इस दौरान हाइब्रिड नेटवर्क ने केवल वाई-फाई नेटवर्क की तुलना में 36.13 फीसद अधिक वास्तविक डाटा की गति यानी थ्रूपुट प्राप्त किया। 2 उपयोगकर्ताओं के मामले में यह सुधार 23.44 फीसद रहा।
कवरेज संबंधी जानकारी
प्रोटोटाइप में लाई-फाई की कवरेज एक सीमित क्षेत्र के रूप में काम करती है। जैसे-जैसे उपयोगकर्ता एक्सेस पॉइंट से दूर जाता है, प्राप्त सिग्नल कमजोर होता है और एक निर्धारित सिग्नल सीमा से नीचे जाने पर कनेक्शन स्वतः वाई-फाई पर स्थानांतरित हो जाता है।
इसलिए इस प्रयोग के आधार पर एक लाई-फाई एक्सेस पॉइंट की अधिकतम रेंज का कोई निश्चित मीटर में आंकड़ा या एक एक्सेस पॉइंट की अधिकतम उपयोगकर्ता क्षमता निर्धारित नहीं की गई थी। हालांकि, हमने वास्तविक प्रोटोटाइप पर 3 उपयोगकर्ताओं तक के नेटवर्क परिदृश्य को सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया। परीक्षण में 4के वीडियो स्ट्रीमिंग के दौरान लाई-फाई से वाई-फाई और वापस लाई-फाई पर कनेक्शन परिवर्तन भी किया गया, जिसमें वीडियो स्ट्रीमिंग बाधित नहीं हुई।
नेटवर्क में बदलाव
चलते-चलते खुद बदलेगा नेटवर्क
हाइब्रिड व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक चलते हुए उपयोगकर्ता का नेटवर्क बदलना है। यदि कोई व्यक्ति लाई-फाई की सीमा से बाहर जाता है या प्रकाश का रास्ता रुक जाता है तो कनेक्शन वाई-फाई पर जा सकता है। शोध समूह ने नेटवर्क बदलने यानी हैंडओवर और अलग-अलग परिस्थितियों में डेटा दर के प्रयोगात्मक मूल्यांकन पर काम किया है।
कार्यक्षमता में सुधार
प्रयोग में हाइब्रिड मॉडल ने किया है बेहतर काम
इसके शोधकर्ता राहुल ने बताया कि हमारे प्रोटोटाइप में वास्तविक वातावरण में कई उपयोगकर्ताओं, मोबाइल उपयोगकर्ता, 4के वीडियो स्ट्रीमिंग और लाई-फाई से वाई-फाई हैंडओवर का प्रदर्शन किया जा चुका है। इसके अलावा, हाइब्रिड नेटवर्क ने केवल वाई-फाई की तुलना में बेहतर परिणाम आया है।
उन्होंने बताया कि आम लोगों के लिए उपलब्धता की निश्चित तिथि नहीं बताई जा सकती है। क्योंकि यह केवल शोध की प्रगति पर निर्भर नहीं करता। इसके लिए चिप, स्मार्टफोन, एलईडी लाइटिंग, नेटवर्क उपकरण, मानकीकरण और उद्योग के बड़े पैमाने पर अपनाने की भी आवश्यकता होगी। हालांकि, पहले चरण में दफ्तर, स्कूल, अस्पताल, औद्योगिक क्षेत्र और उच्च-घनत्व वाले इनडोर स्थानों में इसका व्यावहारिक उपयोग अधिक तेजी से संभव हो सकता है। इसके बाद सामान्य घरों और स्मार्टफोन में इसका बड़े पैमाने पर एकीकरण होने पर आम उपभोक्ताओं के लिए भी यह तकनीक अधिक सहज रूप से उपलब्ध हो सकती है।


