रश्मि की हत्या के बाद ताहापुर गांव में मातम
पति ने छीन ली रश्मि की जिंदगी लखनऊ में मुख्य आरक्षी ने ली थी

पति ने छीन ली रश्मि की जिंदगी लखनऊ में मुख्य आरक्षी ने ली थी पत्नी की जान
लखनऊ में हुआ अंतिम संस्कार
ताहापुर गांव में मातम
अम्बेडकरनगर, संवाददाता। लखनऊ में पति के हाथों गांव की बेटी रश्मि की हत्या की खबर जैसे ही ताहापुर गांव पहुंची, पूरे गांव में मातम पसर गया। जिस बेटी को परिजनों ने बड़े अरमानों से वर्ष 2015 में विदा किया था, उसकी रविवार को दर्दनाक मौत की खबर ने परिवार को झकझोर कर रख दिया। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद मायके वालों ने लखनऊ में ही बैकुंठ धाम पर रश्मि का अंतिम संस्कार कर दिया। पीछे रह गया उसका महज नौ माह का मासूम बेटा, जिसे अभी यह भी नहीं मालूम कि उसकी मां अब कभी लौटकर नहीं आएगी।
पति द्वारा प्रताड़ना
मालीपुर थाना क्षेत्र के ताहापुर गांव निवासी सेवानिवृत्त लेखपाल शेषमणि श्रीवास्तव की 40 वर्षीय पुत्री रश्मि श्रीवास्तव का विवाह वर्ष 2015 में अयोध्या के निरालानगर निवासी हिमांशु श्रीवास्तव से हुआ था। हिमांशु पुलिस विभाग में मुख्य आरक्षी के पद पर तैनात है और वर्तमान में लखनऊ में तैनात था। परिजनों के मुताबिक शादी के कुछ समय बाद से ही रश्मि को पति की ओर से प्रताड़ना झेलनी पड़ रही थी। परिवार ने कई बार दोनों के बीच समझौता कराया, लेकिन हालात नहीं सुधरे। तमाम तकलीफों के बावजूद रश्मि अपना परिवार बचाने की उम्मीद में पति के साथ रहती रही।
हत्या का घटनाक्रम
रविवार को दंपती के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ। आरोप है कि इसी दौरान हिमांशु ने रश्मि पर लोहे के मूसल से वार कर दिया। सिर में गंभीर चोट लगने से रश्मि की मौत हो गई। घटना की सूचना पर पहुंचे मायके वालों ने पुलिस को जानकारी दी। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद लखनऊ में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
परिवार की दुखद स्थिति
रश्मि के भाई गौरव उर्फ आदर्श श्रीवास्तव ने बताया कि उनकी बहन को इससे पहले भी उसके पति ने जान से मारने का प्रयास किया था। परिवार के मुताबिक, रश्मि लंबे समय से प्रताड़ना सहती रही, लेकिन अपने छोटे से परिवार को बचाने के लिए वह सब कुछ सहती रही। आखिरकार वही आशंका सच साबित हुई, जिसका डर परिवार को लंबे समय से सताता था।
नौ माह का तन्मय
रश्मि की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल उसके नौ माह के मासूम बेटे तन्मय को लेकर है। जिस मां की गोद में वह पल रहा था, वह अब हमेशा के लिए उससे दूर हो गई। परिवार के लोग जब रश्मि के अंतिम संस्कार की तैयारी में जुटे थे, तब मासूम तन्मय इस सबसे अनजान था। उसे क्या पता कि उसकी मां अब कभी उसे अपनी गोद में नहीं उठाएगी। परिजनों की आंखों में बेटी को खोने का दर्द और मासूम के भविष्य की चिंता साफ दिखाई दे रही थी।
पिता का दोष
जिस पिता की गोद में होना था महफूज, वही बना मां का हत्यारा। रश्मि की हत्या की घटना का सबसे पीड़ादायक पहलू यह भी है कि वारदात के बाद आरोपी पति करीब तीन घंटे तक अपने नौ माह के बेटे को गोद में लेकर बाहर घूमता रहा। मासूम उस समय अपनी मां की मौत से पूरी तरह अनजान था। जिस पिता की गोद बच्चे के लिए सुरक्षा और अपनत्व का सहारा होती है, उसी पर अब मां की हत्या का गंभीर आरोप है। रश्मि के भाई सौरभ और गौरव के सामने बहन की मौत के साथ ही मासूम तन्मय के भविष्य का सवाल भी खड़ा हो गया है। रश्मि की मौत से पिता माता दो भाइयों समेत बहन अंकिता का रोते रोते बुरा हाल है।


