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कमाई न हो तो भी पत्नी का भरण-पोषण जिम्मेदारी है पति की, हाई कोर्ट की सख्त ताकीद

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पति-पत्नी को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। इसमें कहा गया है कि अगर पति की बिल्कुल भी कमाई न हो तो उसे पत्नी को भरण-पोषण देना होगा। अकुशल मजदूर के रूप में वह कमाई कर सकता है।

कमाई न हो तो भी पत्नी का भरण-पोषण जिम्मेदारी है पति की, हाई कोर्ट की सख्त ताकीद
Deepakलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSun, 28 Jan 2024 10:39 PM
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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पति-पत्नी को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। इसमें कहा गया है कि अगर पति की बिल्कुल भी कमाई न हो तो उसे पत्नी को भरण-पोषण देना होगा। कोर्ट ने कहा कि अकुशल मजदूर के रूप में एक व्यक्ति 300 से 400 रुपए प्रतिदिन कमा सकता है। ऐसे में वह पत्नी को पैसे देने से मुकर नहीं सकता है। इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ बेंच में जस्टिस रेनू अग्रवाल ने यह फैसला सुनाया। उन्होंने एक व्यक्ति द्वारा दायर रिवीजन पेटिशन पर यह फैसला सुनाया। फैमिली कोर्ट ने इस व्यक्ति को आदेश दिया था कि वह हर महीने अपनी पत्नी को 2000 रुपए गुजारा-भत्ता दे। जस्टिस रेनू अग्रवाल ने ट्रायल कोर्ट के प्रिंसिपल जज को निर्देश दिए कि वह पत्नी के लिए तय की गई रकम को उसे दिलवाने का इंतजाम करे। 

पति ने दिया था यह तर्क
जानकारी के मुताबिक कपल की शादी 2015 में हुई थी। साल 2016 में पत्नी ने पति और ससुरालवालों के खिलाफ दहेज को लेकर केस दर्ज कराया। इसके बाद पत्नी अपने पति को छोड़कर वापस अपने माता-पिता के पास रहने चली गई। मामले में सुनवाई के दौरान फैमिली कोर्ट ने आदेश दिया था कि पति अपने पति को हर महीने 2000 रुपए गुजारा-भत्ता दे। पति ने इसके खिलाफ 21 फरवरी, 2023 को हाई कोर्ट में रिवीजन पेटीशन दाखिल की थी। हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान पति ने तर्क दिया कि प्रिंसिपल जज ने इस बात पर गौर नहीं किया उसकी पत्नी ग्रेजुएट है। वह टीचिंग से हर महीने 10 हजार रुपए की कमाई भी करती है। 

कोर्ट ने कही यह बात
पति ने आगे कहा कि वह एक गंभीर बीमारी से पीड़ित है और इलाज करा रहा है। इतना ही नहीं, उसके ऊपर माता-पिता और बहनों की जिम्मेदारी भी है। उसने आगे बताया कि वह मजदूर के रूप में काम करता और किराए के घर में रहता है। हालात का हवाला देते हुए उसने पत्नी को गुजारा-भत्ता देने में अक्षमता जताई थी। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पति अपने पत्नी की कमाई के दावे को लेकर कोई ठोस कागज नहीं पेश कर सका। वहीं, आर्थिक हालात और पैरेंट्स और बहनों के उस पर आश्रित होने की बात पर भी गौर नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि पति का स्वास्थ्य ठीक है और वह शारीरिक मेहनत करके कमाई कर सकता है। 

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