'मानवतावादी अर्थव्यवस्था’ विषय पर होगा विचार मंथन-शशांक
देवरिया में 14 जुलाई को 'मानवतावादी अर्थव्यवस्था' पर गोष्ठी होगी। मुख्य अतिथि रत्नाकर होंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य हर व्यक्ति की छिपी क्षमता को पहचानना और विकास के नए रास्ते दिखाना है। सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने इस विषय पर चर्चा करने और विचार साझा करने का अवसर बताया।
देवरिया, निज संवाददाता। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानवतावाद के विचारों पर आधारित "मानवतावादी अर्थव्यवस्था" विषय पर 14 जुलाई को देवरिया क्लब में एक गोष्ठी होगी। इसमें बतौर मुख्य अतिथि गुजरात के प्रदेश संगठन मंत्री रत्नाकर मौजूद रहेंगे। यह जानकारी देवरिया सदर के सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने रविवार को पत्रकारवार्ता में दी। सांसद ने कहा कि एकात्म मानवतावाद के विचार हमें विकसित भारत के निर्माण का एक नया रास्ता दिखाते हैं। पं दीनदयाल उपाध्याय का मानना था कि देश की अर्थव्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें विकास का लाभ समाज के हर व्यक्ति तक पहुँचे। यह व्यवस्था समाजवाद और पूंजीवाद दोनों से अलग है, क्योंकि इसमें सबसे महत्वपूर्ण स्थान मानव और उससे जुड़े पर्यावरण को दिया गया है।
गोष्ठी का उद्देश्य
सांसद ने कहा कि यह गोष्ठी केवल अपने विचार रखने का मंच नहीं है, बल्कि एक-दूसरे से सीखने और नए विचारों को समझने का अवसर भी है। इसमें कई प्रबुद्ध वक्ता अपने अनुभव और सुझाव साझा करेंगे। साथ ही, एक पैनल चर्चा भी आयोजित की जाएगी, जिसमें सभी प्रतिभागियों को अपने विचार रखने का अवसर मिलेगा, साथ ही 2027 में भारतीय जनता पार्टी के विचारों को जन जन तक पहुंचाने में वेग मिलेगा। कार्यक्रम संयोजक शशांक मणि, अध्यक्षता काली प्रसाद एवं कार्यक्रम सहसंयोजक अंतर्यामी सिंह, हेमंत मिश्र होंगे। गोष्ठी 11 बजे से शुरू होगी।
मानवतावादी अर्थव्यवस्था का महत्व
हर व्यक्ति को आगे बढ़ने का अवसर देगी मानवतावादी अर्थव्यवस्था
सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा कि मानवतावादी अर्थव्यवस्था का उद्देश्य हर व्यक्ति की छिपी हुई क्षमता को पहचानना और उसे आगे बढ़ने का अवसर देना है। हमारे समाज में ऐसे अनेक लोग हैं, जिनमें सफल उद्यमी, मेहनती किसान, कुशल नेतृत्वकर्ता और समाज को नई दिशा देने की क्षमता मौजूद है। यदि इन सभी की प्रतिभा और ऊर्जा को सही दिशा मिले, तो हम अपने क्षेत्र और देश को तेजी से विकसित बना सकते हैं। इसी सोच के साथ देवरिया लोकसभा क्षेत्र में 'अमृत प्रयास' के माध्यम से मानवतावादी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इस गोष्ठी में हम इसी विषय पर विचार करेंगे कि किस प्रकार हर व्यक्ति की भागीदारी से समावेशी और आत्मनिर्भर विकास का मार्ग तैयार किया जा सकता है।


