बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर फर्जी मुठभेड़ के आरोप लगे
मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान में लापता लोगों के मामलों में सरकारी जवाबदेही की मांग की है। हाल ही में शादि कौर निवासी सरदिल शेरखान की हिरासत और हत्या के मामले ने इस मुद्दे पर चर्चा बढ़ाई है। लापता लोगों के परिजनों ने भी क्वेटा में प्रदर्शन कर जानकारी मांगी है।

- मानवाधिकार संगठनों ने लापता लोगों के मामलों में सरकार से जवाब मांगा बलूचिस्तान, एजेंसी। पाकिस्तान के बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी और कथित गैर-न्यायिक हत्या के मामलों को लेकर पाकिस्तान के सुरक्षा बलों पर सवाल उठ रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों ने लापता लोगों के मामलों में सरकार से जवाब मांगा है।
लापता लोगों के मामले
'द बलूचिस्तान पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार हाल की घटनाओं ने इस मुद्दे पर आलोचना और तेज कर दी है। पसनी के शादि कौर निवासी सरदिल शेरखान को 22 नवंबर, 2025 को सैन्य खुफिया अधिकारियों ने कथित तौर पर हिरासत में लिया था। परिवार को करीब छह महीने तक उसके ठिकाने की कोई जानकारी नहीं मिली। 30 मई, 2026 को परिवार को बताया गया कि उसका शव एक दूरदराज इलाके से बरामद हुआ है। हालांकि, उसके गायब होने और मौत की परिस्थितियां अब भी स्पष्ट नहीं हैं। बलोच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने इसे गैर-न्यायिक हत्या बताते हुए आरोप लगाया कि बलूचिस्तान के अलग-अलग इलाकों में जबरन गुमशुदगी, लक्षित हत्याएं और फर्जी मुठभेड़ जारी हैं।
प्रदर्शन और मांगें
इस बीच, वॉयस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स (वीबीएमपी) का विरोध प्रदर्शन क्वेटा प्रेस क्लब के बाहर जारी है। लापता लोगों के परिजन अपने प्रियजनों के बारे में जानकारी और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान खान मोहम्मद ने अपने बेटे मोहम्मद रियाज सतकजई का मामला वीबीएमपी के समक्ष रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि रियाज को 5 मई को मस्तुंग जिले में डाघरी एफसी चौकी पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के जवानों ने हिरासत में लिया था। वह क्वेटा से डाघरी जा रही एक वैन में यात्रा कर रहा था।


