गंभीर गर्भवती की जान बचा रहा एचआरपी रेफरल ग्रुप
देवरिया में एचआरपी रेफरल ग्रुप गंभीर गर्भवती महिलाओं की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह ग्रुप एनिमिया से पीड़ित उच्च रिस्क प्रिग्नेंसी को अस्पताल पहुंचाने और सुरक्षित प्रसव कराने में मदद करता है। इसमें 150 से अधिक स्वास्थ्य अधिकारी शामिल हैं और नियमित जांच के माध्यम से जोखिम की पहचान की जाती है।

देवरिया, निज संवाददाता। जिले में बना एचआरपी रेफरल ग्रुप गंभीर गर्भवती की जान बचाने में मददगार साबित हो रहा है। यह एनिमिया पीड़ित हाई रिस्क प्रिग्नेंसी को तत्काल अस्पताल पहुंचाते हैं। मातृ, शिशु दर मृत्यु कम करने को एचआरपी रेफरल ग्रुप बनाया गया है। इसमें सीएमओ, सीएमएस, डिप्टी, एसीएमओ, एमवाईसी समेत डेढ़ सौ स्वास्थ्य अधिकारी, कर्मचारी शामिल हैं। उनके द्वारा गर्भवती की 9 ग्राम से कम रक्त पर प्रसव कराने को हायर सेंटर रेफर किया जाता है। क्योंकि एनिमिया पीड़ित एचआरपी हाई रिस्क प्रिग्नेंसी की जान जोखिम में रहती है। हाई रिस्क प्रेगनेंसी में मां और होने वाले बच्चे को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं का खतरा रहता है।
इसमें डॉक्टर की विशेष देखरेख और नियमित जांच की जरूरत होती है। 18 वर्ष से कम व 35 वर्ष से अधिक उम्र की गर्भवती महिलाओं को इस समस्या का अधिक सामना करना पड़ता है। गर्भावस्था से जुड़ी समस्याओं में जुड़वां या उससे अधिक बच्चे होना,प्लेसेंटा का नीचे होना, गर्भ में बच्चे का विकास ठीक से नहीं होने, समय से पहले प्रसव या बार-बार गर्भपात होने की समस्या जूझना पड़ता है। हाई रिस्क प्रिंग्नेंसी को चिन्हित करने को महीने में 1, 9, 16 व 24 को जिला मुख्यालय से लेकर सभी सीएचसी, पीएचसी व आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर गर्भवती की जांच की जाती है। जरूरत पड़ने पर उनका अल्ट्रासाउंड भी किया जाता है। इसमें चिन्हित हाई रिस्क प्रिग्नेंसी की एचआरपी रेफरल ग्रुप द्वारा निगरानी की जाती है। प्रसव का समय होने पर सुरक्षित प्रसव को उन्हे हायर सेंटर भेजा जाता है। मातृ परामर्शदाता विश्वनाथ मल्ल ने बताया कि डेढ़ महीने में प्रसव के दौरान गंभीर स्थिति में चिन्हित आधा दर्जन एचआरपी को हायर सेंटर व बीआरडी मेडिकल कालेज में भेजकर सुरक्षित प्रसव कराया गया।


