ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News देशकोरोना वैक्सीन ट्रायल में शामिल अफ़ज़ल का कैसा रहा अब तक का अनुभव, जानें उन्हीं से

कोरोना वैक्सीन ट्रायल में शामिल अफ़ज़ल का कैसा रहा अब तक का अनुभव, जानें उन्हीं से

मैं एक स्वतंत्र पत्रकार हूं। मैंने ICMR और भारत बायोटेक की कोरोना वायरस COVAXIN के तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल में भाग लिया है। पिछले साल 30 दिसंबर 2020 को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई...

कोरोना वैक्सीन ट्रायल में शामिल अफ़ज़ल का कैसा रहा अब तक का अनुभव, जानें उन्हीं से
अफ़ज़ल आलम ,नई दिल्लीMon, 04 Jan 2021 08:16 PM
ऐप पर पढ़ें

मैं एक स्वतंत्र पत्रकार हूं। मैंने ICMR और भारत बायोटेक की कोरोना वायरस COVAXIN के तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल में भाग लिया है। पिछले साल 30 दिसंबर 2020 को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली (AIIMS)में टीके का फर्स्ट डोज लगा है। दूसरा डोज 27 जनवरी 2021 को लगेगा। इन पांच दिनों में मुझे किसी भी तरह की परेशानी नहीं हुई है, लेकिन कई रिश्तेदारों और दोस्तों ने परेशान कर रखा है। हालांकि, कुछ ने हौसला भी बढ़ाया है। मैं इस बात से बेहद खुश और संतुष्ट हूं कि अपनी स्वदेशी वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल की प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिला।

मैं पिछले 6 वर्षों से एम्स में नियमित तौर पर ब्लड डेनेट करता हूं। मैं सोशल मीडिया पर कुछ ज़्यादा एक्टिव रहता हूं और यहीं से मुझे बायोटेक की वैक्सीन ट्रायल की जानकारी मिली। एक मित्र ने फेसबुक पर लिखा था कि भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल के लिए वॉलंटियर्स की जरूरत है। इसके बाद मैंने दिए गए नंबर पर कॉल करके आगे की सारी जानकारी ली और फिर ट्रायल में शामिल हुआ। 30 दिसंबर को जब मैं AIIMS पहुंचा तो वहां मौजूद डॉक्टरों ने हंसी-मज़ाक के जरिए माहौल को हल्का किया। मैं झूठ नहीं कहूंगा कि मेरे मन में कोई सवाल नहीं थे। हकीकत यह है कि मन में कई सारे सवाल घूम रहे थे, लेकिन सबका जवाब डॉक्टर ने काफी अच्छे से दिया। इसके बाद जाकर मन शांत हुआ। 

मेरे सवाल कुछ ऐसे थे- इस ट्रायल में भाग लेने के वजह से मेरी जान चली जाती है या शरीर में किसी भी तरह का बदलाव आता है, तो क्या मुझे किसी भी तरह का आर्थिक सहयोग भारत बायोटेक की तरफ से या ICMR के तरफ से मिलेगा। इसके साथ ही यह भी सवाल था कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं। मेरे सारे सवालों का जवाब एक-एक करके ट्रायल सेंटर पर मौजूद डॉक्टर ने दिया। उन्होंने मुझसे कहा कि अगर आपकी जान जाती है तो आपके उम्र और सलाना आय को देखते हुए आपके परिवार वालों को मदद दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ट्रायल में भाग लेने के 6 महीने तक परिवार की प्लानिंग नहीं कर सकते हैं, हाँ नॉर्मल सेक्स जीवन जी सकते हैं।

इसके साथ ही यह भी बताया गया कि टीका लेने के बाद भी कोरोना रोकथाम के सभी प्रोटोकॉल्स मसलन मास्क पहनना और समाजिक दूरी का पालन करना होगा। बहुत सारे लोगों के मन में सवाल उठता होगा कि ट्रायल की प्रक्रिया को पूरा करने में कितना वक़्त लगा होगा, तो मैं आप सबको बता दूं टीका लगने में बमुश्किल एक घंटे की वक़्त लगा था। 

जब मैं एम्स के ट्रायल सेंटर पर पहुंचा तो सबसे पहले मेरी हाइट, वेट, ब्लड प्रेशर और ख़न की जांच हुई। फिर कोरोना की जाँच की प्रक्रिया पूरी की गई। उसके बाद वहाँ मौजूद डॉक्टर ने कोवैक्सीन की टीका लगाया। इसके बाद मैं उनके ही देख-रेख में 30 मिनट तक वहां रहा। 30 दिसंबर 2020 से लेकर आज पाँच दिन बित चुके हैं, लेकिन मेरे शरीर में किसी भी तरह की कोई बदलाव नहीं है। सब पहले की तरह सामान्य है। एम्स नई दिल्ली की तरफ से भी हर दो दिनों की अंतराल पर हालचाल लेने के लिए डॉक्टर कॉल करते रहते हैं। अभी तक का जो मेरा अनुभव है वह बहुत ही शानदार है। कोई दिक्कत नहीं है मुझे। मैं समझता हूं कि कोरोना के टीका आ जाने से सभी वर्गों के लोगों को मदद मिलेगा। खासकर मजदूर और गरीब वर्ग के लोगों को रोजगार के अवसर मिलने लगेंगे, जो कोरोना के वजह से खत्म हो गए हैं।

Advertisement