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In-Depth: युद्ध के वक्त कैसे होता है नाइट विजन डिवाइस का इस्तेमाल?

युद्ध के वक्त कैसे होता है नाइट विजन डिवाइस का इस्तेमाल?
युद्ध के वक्त कैसे होता है नाइट विजन डिवाइस का इस्तेमाल?

जैसा कि नाम से साफ है नाइट विजन डिवाइस ये वो यंत्र है जो रात के वक्त में बिना किसी रोशनी के देखने में मददगार होता है। ऐसा कहा गया था कि गुरदासपुर हमले में भी आतंकियों ने नाइट विजन डिवाइस का इस्तेमाल किया था। ये वही डिवाइस था जो अमेरिकी सैनिकों का 2010 में अफनागिस्तान में लड़ाई के वक्त खो गया था और वह आतंकियों के हाथ लग गया था।  

दूसरे वर्ल्ड वॉर और वियतनाम वॉर के वक्त नाइट विजन डिवाइस का इस्तेमाल गया था और इसकी उपयोगिता को देखते हुए समय के साथ इसकी टेक्नॉलोजी में काफी बदलाव भी आया है। आज इसका इस्तेमाल ना सिर्फ युद्ध के वक्त खास परिस्थिति में होता है बल्कि एन्फोर्समेंट एजेंसियों की तरफ से भी इस डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है।

क्या है नाइट विजन डिवाइस
नाइट विजन डिवाइस (एनवीडी) को नाइट ऑप्टिकल या ऑब्जर्वेशन डिवाइस (एनओडी) और नाइट विजन गूगल्स (एनवीजी) के नाम से भी जाना जाता है। यह एक ऑप्टो-इलैक्ट्रोनिक डिवाइस है जो बिल्कुल अंधेरे में सामने वाले की तस्वीर को उभारता है।  

एनवीडी का ज्यादातर इस्तेमाल मिलिट्री और एन्फोर्समेंट एजेंसियों की तरफ से किया जाता है। हालांकि, यह अब आम नागरिकों के लिए भी मौजूद है। कई एनवीडी में सेक्रिफिशियल लेंस या टेलिस्कोपिक लेंस या मिरर्स लगे होते हैं।  

दूसरे विश्वयुद्ध के वक्त पहली बार हुआ इस्तेमाल
नाइट विजन डिवाइस का पहली बार दूसरे विश्व युद्ध के वक्त इस्तेमाल किया गया था। उसके बाद वियतनाम वॉर के वक्त भी रात में इसका सहारा लिया गया। नाइट विजन डिवाइस इस्तेमाल में आने के बाद इसमें पीढ़ीगत कई तरह का बदलाव आया है। जिसमें परफॉर्मेंस पहले से ज्यादा बढ़ी है जबकि कीमत कम हुई है और आज ये कई रूपों में बंदूकधारी से लेकर ड्राईवर और विमान चालकों के लिए मौजूद है।

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कैसे करता है काम
नाईट विजन यंत्र दो सिद्धांत पर काम करता है।
1. थर्मल ईमेजिंग (ऊष्मीय चित्र): जो भी सजीव जीव जंतु है उनके शरीर का तापमान निर्जीव वस्तु के तापमान से अधिक होता है। इस तकनीक में सजीव के शरीर से उत्सर्जित होने वाली गर्मी को एक उपकरण से कैप्चर (पकड़ते) करते है जिसे थर्मल ईमेजिंग यंत्र कहते है।
2.  इमेज इन्हासमेंट (चित्र वृद्धि) : इस विधी में वस्तु से आने वाले थोड़ी बहुत प्रकाश किरणों को, जिसे हमारी आँखे देख नही सकती है, एकत्र करके सम्वर्धित करते है। जिससे हमे वस्तु दिखाई देने लगती है।

अगली स्लाइड में जानें नाइट विजन कैमरे के अलग-अलग रूप

कब किसने किया इजाद और इस्तेमाल
कब किसने किया इजाद और इस्तेमाल

कब किसने किया इजाद और इस्तेमाल
जेनरेशन-0
-सबसे पहले इस डिवाइस को अमेरिकी उत्पादनकर्ता लेकर आए। उसे कई भागों में वर्गीकृत किया गया। साल 1929 में हंगरी के भौतिकशास्त्री कल्मान थिन्हायी ने ब्रिटेन में एंटी-एयरक्रॉफ्ट डिफेंस के लिए इन्फ्रारेड सेंसिटिव (नाइट विजन) इलैक्ट्रोनिक टेलीविज़न कैमरा इजाद किया था।
-सबसे पहले नाइट विजन डिवाइस को जर्मन आर्मी में 1939 से भी पहले किया था और इसका इस्तेमाल दूसरे विश्व युद्द के वक्त किया गया था। एईजी ने 1935 में ही इस डिवाइस को डेवलप करना शुरू कर दिया था।       

जेनरेशन-1
फर्स्ट जेनरेशन डिवाइस का इस्तेमाल वियतनाम वॉर के वक्त हुआ था जो जेनरेशन 0 का डेवलप रूप था। यह इन्फ्रारेड लाइट सोर्स की जगह एंबियन लाइट पर काम करता था। यह एस-20 फोटोकैथोड का इस्तेमाल कर तस्वीर उभारता था लेकिन उसके लिए इसे चांद की रोशनी की जरूरत होती थी।

जेनरेशन-2
सेकेंड जेनरेशन का यह डिवाइस एस-25 फोटोकैथोड को माइक्रो चैनल प्लेट (एमसीपी) का इस्तेमाल करते हुए बेहतर क्लाविलटी की तस्वीर पेश किया। इसका सबसे ज्यादा फायदा ये हुआ कि रात में चांद की रोशनी नहीं होने पर भी इसने बेहतर काम किया। हालांकि, उसके बाद जेनरेशन 2 प्लस डिवाइस भी आया जिसमें बेहतर ऑप्टिक्स, सुपरजेन ट्यूब्स के चलते बेहतर रिजॉल्यूशन मिला।   

जेनरेशन-3
थर्ड जेनरेशन नाइट विजन डिवाइस में सेकेंड जेनरेशन की तरह की माइक्रो चैनल प्लेट (एमसीपी) को शामिल तो किया गया लेकिन इसमें गैलियम अर्सेनाइड के साथ बने फोटोकैथोड का इस्तेमाल किया गया। जिसका परिणाम ये रहा कि पहले का मुकाबले क्वालिटी बेहतर हुई।,    

जेनरेशन-4
यूएस आर्मी नाइट विजन एंड इलैक्ट्रोनिक सेंसर्स डायरेक्ट्रेट (एनवीईएसडी) वहां की सरकारी बॉडी का एक हिस्सा है जो नाइट विजन टेक्नोलॉजिस का नाम तय करता है। हालांकि, जेनरेशन-3, ओमएनआई- 6-7 का हाल में विकसित रूप काफी प्रभावशाली है। लेकिन, अमेरिकी सेना ने इस डिवाइस के लिए अभी जेनरेशन-4 नाम देने की मंजूरी नहीं दी है।

रूस ने बनाए कई नाइट विजन डिवाइस
रूस ने बनाए कई नाइट विजन डिवाइस

रूस ने बनाए कई नाइट विजन डिवाइस
पहले सोवियत संघ और उसके बाद रशियन फेडरेशन ने कई नाइट विजन डिवाइस इजाद किए। 1960 के बाद से रूस/सोवियत आर्मी ने 1पीएनएक्सएक्स मॉडल का इस्तेमाल किया। इसी दरम्यान कई मॉडल लाए गए और हथियारों में इसे लगाने के लिए एक ही तरह की बैट्री और तकनीक का इस्तेमाल हुआ। जिन हथियारों में इसे लगाया गया वो थे एके, स्नीपर राइफल्स, लाइट मशीन गन्स और ग्रेनेड लाउंचर्स।


अमेरिका और रूस के पास कैसा है नाइट विजन कैमरा?
युद्ध में रात के वक्त अपने दुश्मन को देखने नाइट विजन कैमरे का इस्तेमाल किया गया। जिसका पहली बार दूसरे विश्व युद्द के समय इस्तेमाल किया गया था। आज इसका इस्तेमाल दुनिया की कई देशों की तीनों अंगों की सेनाओं कर रही है। समये के साथ इसका डेवलप रूप सामने आया है जो अंधेरे में भी बेहतर देखने में मददगार है। आइये आपको बताते हैं दुनिया की 

अमेरिका
अमेरिकी सेना के लिए एएन/पीवीएस-14ए मोनोकुलर नाइट विजन डिवासेज युद्ध के मैदान में काफी मददगार साबित हो रहा है। जेन-III परफॉर्मेंस इमेज ट्यूब से लैस एएन/पीवीएस-14 को रात के अंधेरे में इस्तामल करने के लिए बेहतर एप्लीकेशन के साथ डिजाइन किया गया है। 

वायरलेस होने जा रहा है अमेरिका का नाइट विजन कैमरा
अमेरिकी आर्मी तीसरे जेनरेशन का विकसित नाइट विजन कैमरा इस वक्त इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि, अब ये गूगल से लैस वाइ-फाई लगे नाइट विजन कैमरे को शामिल करने जा रही है जिससे ना सिर्फ मौसम का पता चलेगा बल्कि दुश्मनों पर सटीक निशाना बनाने में भी मददगार होगा। इस कैमरे का नाम है एफडब्ल्यूएस-आई यानि फैमिली ऑफ वीपन साइट्स इंडिविजुअल। इसे अमेरिकी सेना की राइफल्स एम4ए1 कार्बाइन की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। थर्मल इमेजर की जगह यह एम 68 रेड डॉट साइट की तस्वीर देता है। डिजिटल कैमरे की तरह इसके जरिए दूर बैठे दुश्मन की आसानी से पहचान कर उस पर निशाना साधा जा सकता है।

रूस
रूस की सेना ने रात में लडाई के वक्त इस्तेमाल के लिए अत्याधुनिक नाइट विजन कैमरे का इस्तेमाल करती है।  इसके लिए उसने काउंटर स्निपर नाइट साइट्स की कई सीरिज उतारी है। रूस की तरफ से अलग अलग रायफल के लिए अलग-अलग कैमरों का इस्तेमाल किया जाता है। जैसे- 1पीएन123 काउंटर स्निपर नाइट साइट एसवी 98 स्नीपर राइफल्स के लिए। 1पीएन121 काउंटर स्नीपर नाइट साइट एएसवीके लार्ज कैलिबर स्नाईपर राइफल्स के लिए।

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  • Web Title:How night vision camera useful for army in the battlefield during night hours