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Hindi News देशसाथी दल लगे भागने तो कांग्रेस को आए होश ठिकाने, G-23 के नेता बने संकटमोचक; ताबड़तोड़ करवा रहे सीटों पर डील

साथी दल लगे भागने तो कांग्रेस को आए होश ठिकाने, G-23 के नेता बने संकटमोचक; ताबड़तोड़ करवा रहे सीटों पर डील

Lok Sabha Election 2024: मुकुल वासनिक गांधी परिवार और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के भरोसेमंद हैं। वे पहले वहां से सीट समझौते का मंत्र लेकर आते हैं और यहां उसे मसौदे के रूप में ढाल देते हैं।

साथी दल लगे भागने तो कांग्रेस को आए होश ठिकाने, G-23 के नेता बने संकटमोचक; ताबड़तोड़ करवा रहे सीटों पर डील
Pramod Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीFri, 23 Feb 2024 07:38 PM
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Lok Sabha Elections 2024: पिछले महीने बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने जब इंडिया अलायंस से नाता तोड़कर बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए में वापसी की, तो उसके बाद एक-एक कर विपक्षी महागठबंधन के कई साथी दलों ने किनारा करना शुरू कर दिया। इस महीने की शुरुआत में यूपी में अहम सहयोगी दल रहे रालोद ने भी किनारा कर लिया।  इसकी आंच जम्मू-कश्मीर तक जा पहुंची और वहां भी फारूक अब्दुल्ला के एनडीए में वापसी की फुसफुसाहट होने लगी। 

सूत्र बताते हैं कि इन परिस्थितियों को देखते हुए इंडिया अलायंस खासकर कांग्रेस  के शीर्ष नेतृत्व के बीच बेचैनी बढ़नी शुरू हो गई। बहरहाल, कांग्रेस अब लोकसभा चुनावों के मद्देनजर ताबड़तोड़ सीट शेयरिंग समझौता कर रही है। यूपी में जहां प्रियंका गांधी के एक फोन कॉल से बिगड़ती हुई बात आखिरकार बन गई, वहीं महाराष्ट्र में खुद राहुल गांधी ने मोर्चा संभाल रखा है लेकिन अधिकांश दलों के साथियों से सीट बंटवारे पर बातचीत को अमली जामा दिल्ली में एक ऐसे नेता के आवास पर पहनाया जा रहा है, जो कभी कांग्रेस के जी-23 का सदस्य था लेकिन अब गांधी परिवार का एक मजबूत और भरोसेमंद चेहरा है।

कांग्रेस के सूत्र बता रहे हैं कि सीट शेयरिंग पर अधिकांश समझौते मुकुल वासनिक के आवास पर हो रहे हैं। वासनिक गांधी परिवार और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के भरोसेमंद हैं। वे पहले वहां से सीट समझौते का मंत्र लेकर आते हैं और यहां उसे मसौदे के रूप में ढाल देते हैं। कहा जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व ने मुकुल वासनिक को साथी दलों के साथ झुककर और अत्यधिक लचीला रुख रखते हुए समझौते को अंजाम देने का स्पष्ट निर्देश दिया है। इसके साथ निर्देश यह भी हैं कि साथी दलों से बातचीत की शुरुआत कड़े लहजे में हो।

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जब वासनिक के स्तर से बात बिगड़ने लगती है, तब शीर्ष नेता उसमें दखल देते हैं। पिछले ही दिनों, जब आप से बात बेपटरी होने लगी, तब अरविंद केजरीवाल और राघव चड्ढा मल्लिकार्जुन खरगे के घर पर पहुंचे, जहां राहुल गांधी भी मौजूद थे। फिर दिल्ली, गुजरात, हरियाणा और गोवा में कांग्रेस और आप के बीच सीट शेयरिंग पर बात बनी। इसी तरह यूपी में बात बिगड़ने पर प्रियंका गांधी ने बीच में दखल देकर 17 सीटों पर डील पक्की कर यूपी के दो लड़कों की सात साल पुरानी दोस्ती पटरी पर लाने में अहम भूमिका निभाई।

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फिलहाल महाराष्ट्र की 48 में से 39 सीटों पर सीट शेयरिंग समझौता हो चुका है लेकिन मुंबई की दो सीटों पर कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की सेना के बीच पंच फंसा हुआ है। उधर, पश्चिम बंगाल में भी 42 लोकसभा सीटों के लिए ममता बनर्जी से सीट बंटवारे पर बातचीत अंतिम चरण में है। बनर्जी ने कांग्रेस को दो सीटों का ऑफर दिया है। माना जा रहा है कि इन दोनों प्रदेशों में सीट बंटवारे पर समझौता राहुल गांधी के स्तर से हो रहा है।

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