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अब चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई भी बन जाएंगे केंद्रशासित प्रदेश, ओवैसी बोले-भाजपा को कोई रोक नहीं सकता

जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद अलग-अलग नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है। इसी कड़ी में एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने इस फैसले को लेकर असंतोष जताया है। उन्होंने सवाल भी उठाया है।

अब चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई भी बन जाएंगे केंद्रशासित प्रदेश, ओवैसी बोले-भाजपा को कोई रोक नहीं सकता
Deepakलाइव हिन्दुस्तान,हैदराबादMon, 11 Dec 2023 05:53 PM
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जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद अलग-अलग नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है। इसी कड़ी में एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने इस फैसले को लेकर असंतोष जताया है। फैसला आने के बाद ओवैसी ने कहा है कि अब बीजेपी को कोई रोक नहीं सकता। अब वो दिन दूर नहीं जब चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई और कोलकाता को केंद्रशासित प्रदेश बना दिया जाएगा। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने के केंद्र सरकार के फैसले को सही ठहराया है।

लद्दाख का दिया उदाहरण
ओवैसी ने लद्दाख के उदाहरण का जिक्र करते हुए कहा कि इसे उप राज्यपाल द्वारा शासित किया जा रहा है और कोई लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने 2019 की एक संगोष्ठी में प्रधान न्यायाधीश द्वारा की गई एक टिप्पणी को उद्धृत करते हुए कहाकि सार्वजनिक चर्चा हमेशा ही उन लोगों के लिए एक खतरा है जो इसकी अनुपस्थिति में सत्ता हासिल करते हैं।  उन्होंने कहाकि संघवाद का यह मतलब है कि प्रांत की अपनी आवाज है और अपनी क्षमता के तहत, इसे संचालित होने की पूरी स्वतंत्रता है। संसद, विधानसभा की जगह कैसे ले सकती है?' ओवैसी ने कहा कि जिस तरह से अनुच्छेद 370 को निरस्त किया गया, उनके लिए वह संवैधानिक नैतिकता का उल्लंघन है।

राज्य का दर्जा बहाल करने की समय सीमा क्यों नहीं?
असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को कहा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का सबसे ज्यादा नुकसान जम्मू के डोगरा और लद्दाख के बौद्ध समुदाय को होगा, जिन्हें जनसांख्यिकी बदलावों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने सवाल किया कि राज्य का दर्जा बहाल करने पर कोई समय सीमा क्यों नहीं है? ओवैसी ने कहाकि जम्मू कश्मीर में दिल्ली (केंद्र) के शासन के पांच साल हो गए हैं। विधानसभा चुनाव राज्य में यथाशीघ्र होना चाहिए। 2024 के विधानसभा चुनाव के साथ। उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि राज्य भारत का अभिन्न हिस्सा है, लेकिन ऐसा होने का यह मतलब नहीं है कि इसका केंद्र के साथ कोई विशेष संवैधानिक संबंध नहीं है। उन्होंने कहाकि इस संवैधानिक संबंध को कश्मीर के संविधान सभा को भंग कर स्थायी बनाया गया था।

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