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अपने मोबाइल में सेव कर लीजिए यह नंबर, ऑनलाइन ठगी के शिकार होने पर आएगा काम

लाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्ली।Published By: Himanshu Jha
Thu, 17 Jun 2021 09:30 PM
अपने मोबाइल में सेव कर लीजिए यह नंबर, ऑनलाइन ठगी के शिकार होने पर आएगा काम

एक दशक पहले से ही भारत ने भी डिजिटल दुनिया में अपने कदम को मजबूती से जमाना शुरू कर दिया। अब तो सरकार पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल पेमेंट सिस्टम को बढ़ावा दे रही है। बैंकों की लाइनें कम हो गई है। मोबाइल ही बैंक बन चाकुा है। चंद सेकेंट में लाखों करोड़ों रुपए की लेन-देन आसानी से हो जाती है। हालांकि जिन्हें इसकी समझ कम है, वे ठगी के शिकार भी हो रहे हैं। देश और दुनिया के कोने-कोने में ऐसे गिरोह एक्टिव हैं।

साइबर फ्रॉड में आर्थिक ठगी के साथ-साथ ब्लैकमेलिंक जैसे अपराध भी शामिल हैं। पुलिस के पास आए दिन ऑनलाइन ठगी की कई शिकायतें आती रहती हैं। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इससे जुड़े मामलों की शिकायत की प्रक्रिया को और आसान बना रही है। आज एक राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर को एक्टिव कर दिया गया है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति साइबर फ्रॉड का शिकार होता है तो वह 155260 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। मंत्रालय ने लोगों के आर्थिक नुकसान को रोकने के लिए यह कदम उठाया है। शिकायत रजिस्टर होने के बाद जल्द ही कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

हेल्पलाइन को एक अप्रैल, 2021 को सॉफ्ट लॉन्च किया गया था। हेल्पलाइन नंबर 155260 और इसके रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म को गृह मंत्रालय के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र द्वारा चालू किया गया है। वर्तमान में इसका उपयोग सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (छत्तीसगढ़, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश) द्वारा 155260 के साथ किया जा रहा है, जो देश की 35 प्रतिशत से अधिक आबादी को कवर करता है।

अपने सॉफ्ट लॉन्च के बाद से दो महीने के कम समय में ही इस हेल्पलाइन नंबर पर दर्ज किए गए शिकायतों के आधार पर 1.85 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने वाले सक्रिय साइबर ठगों के बड़े गिरोहों का पर्दाफाश हुआ है।

वहीं दिल्ली और राजस्थान में जांच के दौरान कई खाते सीज किए गएं और 58 लाख रुपये और 53 लाख रुपये रिकवर किए गए।

ऐसे काम करता है सिस्टम
हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करते ही इसकी जानकारी संबंधित वित्तीय संस्थानों तक पहुंचा दी जाती हैं। यह फ्रॉड ट्रांजेक्शन टिकट जिस वित्तीय संस्थान से पैसा कटा (डेबिट हुआ) है और जिन वित्तीय संस्थान में गया (क्रेडिट हुआ) है। दोनों के डैशबोर्ड पर नजर आएगा। जिस बैंक/वॉलेट में टिकट दिया गया होता है, उसे फ्रॉड ट्रांजेक्शन की जानकारी के लिए जांच करनी होती है। इसके बाद ट्रांजेक्शन को अस्थायी तौर पर ब्लॉक कर दिया जाता है।

साथ ही पीड़ित को एक एसएमएस भी भेजा जाता है, जिसमें शिज संख्या का उपयोग करके 24 घंटे के भीतर धोखाधड़ी का पूरा विवरण राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल साइबर क्राइम डॉट जीओवी डॉट इन (https://cybercrime.gov.in/) पर जमा करने का निर्देश दिया जाता है।

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