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भारत सरकार ने कैंसल किया इस बड़े थिंक टैंक का FCRA लाइसेंस, नहीं मिलेगी विदेशी फंडिंग

सीपीआर का एफसीआरए लाइसेंस पिछले साल फरवरी में 180 दिनों के लिए सस्पेंड किया किया गया था। लेकिन बाद में इसका सस्पेंशन 180 दिनों के लिए फिर बढ़ा दिया गया था। लेकिन अब इसका लाइसेंस कैंसल कर दिया गया।

भारत सरकार ने कैंसल किया इस बड़े थिंक टैंक का FCRA लाइसेंस, नहीं मिलेगी विदेशी फंडिंग
Amit Kumarएचटी संवाददाता,नई दिल्लीWed, 17 Jan 2024 08:38 AM
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भारत सरकार ने नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में एक बड़े थिंक टैंक सेंट्रल फॉर पॉलिसी रिसर्च (सीपीआर) का विदेशी फंडिंग लेने का लाइसेंस कैंसल कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने बताया कि कथित तौर पर विदेशी फंडिंग के प्रावधानों का उल्लंघन करने के लिए सेंट्रल फॉर पॉलिसी रिसर्च (सीपीआर) का विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) लाइसेंस कैंसल किया गया है। मामले से परिचित लोगों ने इसकी जानकारी दी। 

बता दें कि एक साल पहले ही सीपीआर का लाइसेंस सस्पेंड किया गया था। सीपीआर का एफसीआरए लाइसेंस पिछले साल फरवरी में 180 दिनों के लिए सस्पेंड किया किया गया था। लेकिन बाद में इसका सस्पेंशन 180 दिनों के लिए फिर बढ़ा दिया गया था। लेकिन अब इसे कैंसल कर दिया गया है। सूत्रों ने बताया कि सीपीआर का एफसीआरए लाइसेंस रद्द करने का फैसला पिछले सप्ताह लिया गया था और इस संदर्भ में संगठन को भी बता दिया गया है। दिल्ली स्थित सीपीआर एक जाना पहचाना पॉलिसी थिंक टैंक है। इसे 1973 में स्थापित किया गया था। यह भारत की 21वीं सदी की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पॉलिसी से जुड़े मुद्दों पर गहन रिसर्च के लिए जाना जाता है।

बता दें कि इससे पहले, सीपीआर इनकम टैक्स की रडार पर भी आ चुका है। इनकम टैक्स विभाग ने सितंबर 2022 में विदेशी फंडिंग को लेकर सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (सीपीआर) सहित दो जगहों पर 'सर्वेक्षण' अभियान चलाया था। अपने लाइसेंस के निलंबन के खिलाफ सीपीआर ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। इसके जवाब में सरकार ने कोर्ट को बताया था कि 'सीपीआर की विदेशी फंडिंग को रोकने की जरूरत है क्योंकि इसे "गलत उद्देश्यों" के लिए विदेशी सहयोग प्राप्त हो रहा है। इससे देश के आर्थिक हित प्रभावित होने की संभावना थी।' इसमें आरोप लगाया गया कि सीपीआर ने अपने विदेशी चंदे को अन्य संस्थाओं में भी भेजा और एफसीआरए का उल्लंघन करते हुए विदेश से मिले पैसों को 'अनजान' खातों में जमा कर दिया।

सीपीआर के अलावा, ऑक्सफैम इंडिया और बेंगलुरु स्थित मीडिया फाउंडेशन - इंडिपेंडेंट एंड पब्लिक-स्पिरिटेड मीडिया फाउंडेशन (आईपीएसएमएफ) भी अपनी विदेशी फंडिंग को लेकर जांच के दायरे में आ चुका है। ऑक्सफैम इंडिया की भी विदेशी फंडिंग भारत में ब्लॉक है। विदेश मंत्रालय ने दिसंबर 2021 में इसके FCRA लाइसेंस को रिन्यू करने से इनकार कर दिया था। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) भी ऑक्सफैम इंडिया की जांच कर रही है। 

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