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कश्मीर में बढ़ती हत्याओं पर अमित शाह ने पड़ोसी मुल्क को चेताया, कहा- जैसा सामने से सवाल आएगा वैसा ही जवाब दिया जाएगा

लाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीPublished By: Nishant Nandan
Fri, 15 Oct 2021 12:13 AM
कश्मीर में बढ़ती हत्याओं पर अमित शाह ने पड़ोसी मुल्क को चेताया, कहा- जैसा सामने से सवाल आएगा वैसा ही जवाब दिया जाएगा

सीमा पर अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे पाकिस्तान को अब केंद्रीय गृहमंत्री ने खुली चेतावनी दे दी है। गुरुवार को गोवा में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि एक वो युग था जब बातों से बात होती थी और फिर एक युग आया कि जैसा सामने से सवाल आएगा, वैसा ही जवाब दिया जाएगा। शाह ने कहा कि पहली बार सर्जिकल स्ट्राइक करके भारत ने दुनिया को बता दिया कि भारत की सीमाओं से छेड़खानी करना इतना सरल नहीं है।

यहां आपको बता दें कि पाकिस्तान पोषित आतंकवाद जम्मू-कश्मीर में फिर से जड़े जमाने की कोशिश कर रहा है। हाल के दिनों में कायर आतंकवादियों ने कई घाटी में कई निर्दोष लोगों की जान ले ली। इसके अलावा आतंकियों ने सेना पर भी हमला किया था। पड़ोसी मुल्क की शह पर आतंकियों के इस खूनी खेल के बाद इस वक्त पूरा देश उबल रहा है।

अमित शाह ने गुरूवार को गोवा के धारबांदोडा में राष्ट्रीय फ़ॉरेन्सिक साइंस यूनिवर्सिटी के तीसरे परिसर की आधारशिला रखने के मौके पर अपने संबोधन में गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व रक्षा मंत्री पर्रिकर को याद करते हुए कहा कि उन्होंने गोवा के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश को बदलने की शुरूआत की। उन्होंने कहा 'श्री पर्रिकर ने श्री मोदी के नेतृत्व में रक्षा मंत्री के तौर पर दो बड़े काम किए जिनके लिए देश उन्हें हमेशा याद रखेगा। पहला सेनाओं को वन रैंक, वन पेंशन देना तथा दूसरा आतंकवादी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक करना।' 

अमित शाह ने आगे कहा, 'वर्षों से देश की सीमाओं को लांघकर आक्रांता आते थे और उग्रवाद फैलाते थे और नई दिल्ली से निवेदन के अलावा कुछ नहीं होता था। लेकिन जब कश्मीर के पुंछ में हमला हुआ और हमारे जवान शहीद हुए, तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रश्रा मंत्री मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व में पहली बार सर्जिकल स्ट्राइक करके भारत ने दुनिया को बता दिया कि भारत की सीमाओं से छेड़खानी करना इतना सरल नहीं है।

उन्होंने आगे कहा 'मोदी जी और पर्रिकर जी के नेतृत्व में पहली बार भारत ने अपनी सीमाओं की सुरक्षा, सम्मान अपने सार्वभौमत्व का गौरव प्रस्थापित करने का काम करके एक युगांतकारी शुरूआत की। एक वो युग था जब बातों से बात होती थी और फिर एक युग आया कि जैसा सामने से सवाल आएगा, वैसा ही जवाब दिया जाएगा।'

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