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अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में क्या-क्या बदला? गृहमंत्री अमित शाह ने आंकड़ों के साथ दिया हिसाब

एजेंसी , नई दिल्ली Published By: Tej Singh Last Modified: Sat, 13 Feb 2021 6:03 PM
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को लोकसभा में कहा कि मोदी सरकार ने अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 समाप्त करने के बाद पिछले डेढ़ साल में जम्मू कश्मीर के विकास के लिए इतना काम किया जितना पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने आंकड़ों के साथ ब्यौरा देते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर का विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। 

लोकसभा में जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2021 पर चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि अनुच्छेद 370 समाप्त होने के बाद जम्मू कश्मीर में किसी के साथ भी अन्याय हो, ऐसी आशंका को ही समाप्त कर दिया गया है। उन्होंने कुछ विपक्षी दलों के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया कि प्रस्तावित कानून राज्य को फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की उम्मीदों को समाप्त करता है। 

शाह ने कहा, ''मैं फिर से कहता हूं कि इस विधेयक का जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे से कोई संबंध नहीं है। मैं जम्मू कश्मीर के लोगों से वादा करता हूं कि पूर्ण राज्य का दर्जा आपको निश्चित मिलेगा।" केंद्र शासित प्रदेश में विकास कार्यो का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के समय में जम्मू कश्मीर में कई लोग मारे जाते थे, सालों तक कर्फ्यू होता था।" उन्होंने कहा कि कश्मीर में शांति बहुत बड़ी चीज है। मैं अशांति की बात करना भी नहीं चाहता। अब कश्मीर में अशांति नहीं होगी।

शाह ने कहा कि हमारी सरकार आने के बाद जम्मू कश्मीर में पंचायती राज की शुरुआत हुई है। पहले जम्मू कश्मीर में तीन परिवार के लोग ही शासन कर रहे थे, इसलिए वो अनुच्छेद 370 के पक्ष में रहते थे। जम्मू कश्मीर में पंचायत चुनाव कराने का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि दिसंबर 2018 में जम्मू कश्मीर में निचली पंचायत के चुनाव हुए, जिसमें 74 प्रतिशत लोगों ने मतदान किया। कश्मीर के इतिहास में इतना मतदान कभी नहीं हुआ था।

उन्होंने कहा कि वहां करीब 3,650 सरपंच निर्वाचित हुए, 33,000 पंच निर्वाचित हुए। गृहमंत्री ने तंज कसते हुए कहा, ''जम्मू कश्मीर में अब राजा का जन्म रानी के पेट से नहीं होगा, वोट से होगा। वोट से नेता चुने जाएंगे।" उन्होंने आगे कहा कि हमने जम्मू कश्मीर की पंचायतों को अधिकार दिया है, बजट दिया है, पंचायतों को सुदृढ़ किया है और अब वहां अफसर भेजे जा रहे हैं।

विकेंद्रीकरण के सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि प्रशासन के 21 विषयों को पंचायतों को दे दिया गया है। करीब 1,500 करोड़ रुपये सीधे बैंक खातों में डालकर जम्मू कश्मीर के गांवों के विकास का रास्ता प्रशस्त किया है। उन्होंने कहा, ''सिर्फ चुनाव के बाद हम नहीं रुके, हमने उनको अधिकार दिया है, बजट दिया है।"

शाह ने जम्मू कश्मीर में लोगों को स्वास्थ्य बीमा के तहत कवर देने, काम के नये अवसर मुहैया कराने और खेलों को प्रोत्साहित करने जैसे कदमों का भी जिक्र किया।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री विकास पैकेज के तहत 58,627 करोड़ रुपये परिव्यय की 54 योजनाएं थीं और उसे लगभग 26% और बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि 54 में से 20 परियोजनाएं, जिनमें से 7 केंद्रीय और 13 संघ राज्यों की थी, ये काफी हद तक पूरी हो चुकी हैं और बाकी 8 परियोजनाएं मार्च के अंत तक पूरी हो जाएंगी। यानी 54 में से 28 परियोजनाओं में काम पूरा कर दिया गया है।

गृह मंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति शासन के बाद से लगभग हर घर को बिजली देने का काम पूरा हो गया है। गांव की ओर लौटें कार्यक्रम के तहत जम्मू कश्मीर बैंक को 15,000 छोटे-छोटे ऋण के मामले दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के उद्योगों में सबसे बड़ी बाधा थी कि वहां कोई भी उद्योग लगाना चाहे तो उन्हें जमीन नहीं मिलती थी। अनुचछेद 370 हटने के बाद, जमीन के कानून में हमने परिवर्तन किया और अब ऐसी स्थिति हुई है कि कश्मीर के अंदर उद्योग लग पाएंगे। जम्मू कश्मीर में लोगों की जमीन छिन जाने के आरोपों को गलत बताते हुए शाह ने कहा कि हमने जम्मू कश्मीर में भूमि बैंक बनाया है। इससे प्रदेश के किसी व्यक्ति की जमीन नहीं जाएगी।

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