देवीपाटन में शुरू हुआ ऐतिहासिक ‘गुड़-धनिया’ मेला
प्रसिद्ध देवीपाटन मंदिर में आषाढ़ माह के आगमन के साथ 'गुड़-धनिया' मेला शुरू हुआ है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मां पाटेश्वरी के दर्शन के लिए पहुंच रही है, जिसमें नेपाल और थारू जनजाति से भी लोग शामिल हैं। मेला पारंपरिक प्रसाद तैयार करने की परंपरा के लिए जाना जाता है, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।

तुलसीपुर, संवाददाता। प्रसिद्ध शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में आषाढ़ माह के आगमन के साथ ही सदियों पुरानी परंपरा से जुड़ा ऐतिहासिक ‘गुड़-धनिया’ मेला शुरू हो गया है। इस बार आषाढ़ शुक्ल पक्ष चतुर्दशी और सोमवार के विशेष संयोग के चलते श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों के अलावा नेपाल और थारू जनजाति क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु परिवार सहित मां पाटेश्वरी के दर्शन और पूजन के लिए पहुंच रहे हैं। मेले की सबसे बड़ी विशेषता पारंपरिक ढंग से प्रसाद तैयार करने की परंपरा है। श्रद्धालु मिट्टी के बर्तन (भार) में चना और गेहूं भूनकर उसमें गुड़ मिलाते हैं और ‘गुड़-धनिया’ का विशेष प्रसाद तैयार कर मां पाटेश्वरी को अर्पित करते हैं।
मान्यता है कि नई फसल का पहला भोग माता को चढ़ाने से खेतों में भरपूर पैदावार होती है तथा परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। यही कारण है कि किसान पूरे श्रद्धाभाव के साथ इस परंपरा का निर्वहन करते हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार आषाढ़ माह में लगने वाले इस मेले का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है। सोमवार और शुक्रवार को विशेष भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, यातायात और दर्शन-पूजन की समुचित व्यवस्थाएं की गई हैं। स्थानीय श्रद्धालुओं रामनिवास यादव, रेनू सिंह, बृजेश कुमार पांडे, पीएन शुक्ल और राजन तिवारी ने बताया कि यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द, लोक संस्कृति और ग्रामीण परंपराओं का जीवंत उत्सव है, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को आज भी सहेजे हुए है।


