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जम्मू के हिंदू गांव ने मुस्लिम को बनाया पंच, गांव में है एक मात्र मुस्लिम परिवार

प्रतीकात्मक तस्वीर(Photo: Subrata Biswas/Hindustan Times)

जम्मू कश्मीर के भद्रवाह शहर स्थित हिंदुओं की बहुलता वाले एक गांव ने सामाजिक सौहार्द पेश करते हुए एक नई मिसाल कायम की है। गांववालों ने यहां जारी नौ चरणीय पंचायत चुनावों में गांव के एकमात्र मुस्लिम परिवार के मुखिया को निर्विरोध अपना पंच चुना है।

गांव के युवा भी इस फैसले से बेहद खुश हैं और उन्हें भेलन गांव का निवासी होने पर फख्र है। ग्रामीणों के सर्वसम्मत फैसले से हुसैन ना सिर्फ भावविभोर हैं बल्कि वह ग्रामीणों के कल्याण के लिए दिन-रात काम करना चाहते हैं।

450 हिंदू परिवारों के बीच हुसैन का एकमात्र परिवार

54 वर्षीय चौधरी मोहम्मद हुसैन मवेशी पालने वाले परिवार से आने वाले एक गुज्जर हैं जो हंगा पंचायत के भेलन-खरोठी गांव के पंच चुने गए हैं। दिलचस्प है कि गांव में रहने वाले 450 परिवारों में हुसैन का परिवार एकमात्र मुस्लिम परिवार है। वह अपनी बीवी, पांच बेटों और बहू के साथ रहते हैं जबकि उन्होंने अपनी चारों बेटियों की शादी कर दी है।

ग्रामीणों को भाईचारे पर नाज

गांव के एक ग्रामीण धुनी चंद ने बताया, ध्रुवीकृत और सांप्रदायिक आधार पर चीजों को देखने वाले समाज में यह अजीब लग सकता है, लेकिन हमें अपने साझा भाईचारे पर नाज है। उन्होंने कहा कि हुसैन उनके समुदाय की सर्वसम्मत पसंद हैं। उनका समुदाय सौहर्दपूर्ण सहअस्तित्व और भाईचारे के लिए एक मिसाल पेश करना चाहता था, जो हमारे देश की ताकत है। चंद ने कहा, ध्रुवीकरण और धर्म के नाम पर मतभेद की बातें हमारे उस विश्वास को डगमगा नहीं सकीं कि हम एक ही परिवार का हिस्सा हैं। अगर इतने साल में यह हमारी एकजुटता को खत्म नहीं कर पाया है तो यह अब कभी नहीं होगा।

हमलोग शुरू से सौहार्दपूर्ण माहौल में रहें : हुसैन

निर्विरोध चुने गए पंच मोहम्मद हुसैन ने कहा, हमलोग सौहार्द से भरपूर माहौल में रहते आए हैं। उन्होंने मुझे कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि मैं गांव में रहने वाला एकमात्र मुस्लिम हूं। मुझे अपना पंच चुनकर और वह भी निर्विरोध चुनकर उन्होंने मेरे प्रति अपना प्यार जताया है। वे इसे एक अलग स्तर पर लेकर गए जिसके लिए मैं उम्र भर उनका कर्जदार रहूंगा। उन्होंने कहा कि गांव के लिए सड़कों को जोड़ना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मैं इस गांव में पैदा होने को खुद को भाग्यशाली महसूस कर रहा हूं, जहां मेरे बुजुर्गों ने मौजूदा स्थिति में एक साहसिक निर्णय लिया है। मुझे आशा है कि पूरा समाज हमारे बुजुर्गों के इस फैसले से सबक लेगा। -हर्ष सिंह, छात्र 

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