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हिंदी न्यूज़ देश'हिंदी थोपने' का विरोध कर रहे किसान ने DMK दफ्तर के बाहर लगाई आग, मौके पर हो गई मौत

'हिंदी थोपने' का विरोध कर रहे किसान ने DMK दफ्तर के बाहर लगाई आग, मौके पर हो गई मौत

रिपोर्ट के मुताबिक, आत्मदाह करने से पहले थंगावेल ने एक बैनर में लिखा था, "मोदी सरकार, केंद्र सरकार, हमें हिंदी नहीं चाहिए। हमारी मातृभाषा तमिल है और हिंदी विदूषकों (जोकरों) की भाषा है।

'हिंदी थोपने' का विरोध कर रहे किसान ने DMK दफ्तर के बाहर लगाई आग, मौके पर हो गई मौत
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,चेन्नईSat, 26 Nov 2022 03:39 PM

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तमिलनाडु से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है जहां एक किसान ने 'हिंदी थोपने' का विरोध करते हुए खुद को आग लगा ली। मामला राज्य के सलेम जिले का है। यहां एक 85 वर्षीय किसान ने 'हिंदी थोपने' का विरोध करते हुए DMK हाउस के बाहर खुद को आग लगा ली। मृतक का नाम थंगावेल बताया जा रहा है। थंगावेल डीएमके पार्टी के पूर्व कृषि संघ आयोजक थे। वे शनिवार सुबह मेट्टूर के बगल में थलाइयुर में डीएमके पार्टी कार्यालय के सामने हिंदी थोपने का विरोध कर रहे थे।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कथित तौर पर अपने शरीर पर पेट्रोल डाला और खुद को आग लगा ली और सुबह करीब 11 बजे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। थंगावेल DMK के एक सक्रिय सदस्य थे। कहा जा रहा है कि वे हिंदी को शिक्षा का माध्यम बनाने के केंद्र सरकार के कथित कदम से परेशान थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, आत्मदाह करने से पहले थंगावेल ने एक बैनर में लिखा था, "मोदी सरकार, केंद्र सरकार, हमें हिंदी नहीं चाहिए। हमारी मातृभाषा तमिल है और हिंदी विदूषकों (जोकरों) की भाषा है। हिंदी भाषा थोपने से छात्रों का जीवन प्रभावित होगा। हिंदी से छुटकारा, हिंदी से छुटकारा, हिंदी से छुटकारा।" तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके यूथ विंग के सचिव और सीएम एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने चेतावनी दी थी कि अगर राज्य में हिंदी थोपने पर जोर दिया गया तो पार्टी राष्ट्रीय राजधानी में भाजपा के नेतृत्व वाले केंद्र के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेगी।

पार्टी ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भी किया था और कहा था कि अगर केंद्र सरकार लोगों की भावनाओं की अवहेलना करती है तो वह मूक दर्शक नहीं बनेगी। बता दें कि एक संसदीय पैनल की सिफारिश के बाद यह विरोध भड़का था। संसदीय समिति ने सिफारिश की थी कि हिंदी भाषी राज्यों में तकनीकी और गैर-तकनीकी उच्च शिक्षा संस्थानों जैसे आईआईटी में हिंदी माध्यम में शिक्षा दी जानी चाहिए। इसको लेकर केरल और तमिलनाडु के सीएम ने आपत्ति जताई थी। गौरतलब है कि दक्षिण भारतीय राज्यों के इन दो नेताओं ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा था कि केंद्र सरकार गैर-हिंदी भाषी राज्यों पर हिंदी थोप रहा है। संसदीय समिति की सिफारिशों का बचाव करते हुए इस तरह की मानसिकता को अंग्रेजी के प्रयोग से जोड़ते हुए उन्होंने लोगों से औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर आने की अपील की।