संस्कृति की वाहिका है हिंदी: झा
रांची वीमेंस कॉलेज में 'बदलते समय में हिंदी संभावनाएं और चुनौतियां' पर संगोष्ठी आयोजित की गई। साहित्यकार प्रमोद झा ने हिंदी की शक्ति और भविष्य के अवसरों पर चर्चा की। कवियत्री सत्या शर्मा ने हिंदी की अस्मिता और सोशल मीडिया में इसके उपयोग पर बात की। छात्रों ने कार्यक्रम में सक्रिय भाग लिया।

रांची, विशेष संवाददाता। रांची वीमेंस कॉलेज के हिंदी विभाग की ओर से ‘बदलते समय में हिंदी संभावनाएं और चुनौतियां’ विषय पर शनिवार को संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित साहित्यकार प्रमोद झा ने हिंदी की संभावना और चुनौतियों पर बातचीत करते हुए कहा कि हिंदी भाषा में अपार शक्ति है। भाषा के तौर पर हिंदी का भविष्य उज्जवल है। हिंदी के साथ-साथ हम किसी अन्य भाषा की जानकारी रखें तो अनुवाद के क्षेत्र में छात्रों के लिए बेहतर भविष्य है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय ज्ञान को भी हिंदी भाषा के माध्यम से सामने लाना जरूरी है।
हिंदी मात्र एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति की वाहिका है। विशिष्ट वक्ता कवियत्री सत्या शर्मा ने हिंदी की संवैधानिक स्थिति पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज हिंदी भाषा की अस्मिता को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया में हिंदी रोमन में भी लिखी जा रही है, जिसे रोकना जरूरी है। हिंदी के साथ-साथ देवनागरी लिपि की अस्मिता को भी सुरक्षित और संवर्धित करना जरूरी है। प्रोफेसर इंचार्ज डॉ किरण ने कहा कि बदलते समय में हिंदी की चुनौतियों को समझना आवश्यक है, अपनी मातृभाषा का सम्मान करना चाहिए। वहीं, हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ प्रज्ञा गुप्ता ने कहा कि हिंदी भाषा का इतिहास देखें तो यह निरंतर प्रगति एवं सफलता के पथ पर आगे बढ़ रही है और अपने समय की चुनौतियां का इसने डटकर सामना किया है।स्नातकोत्तर की छात्रा अलीशा ने हिंदी भाषा की महत्ता को बताते हुए कविता सुनाई। वहीं, छात्रा सविता वर्मा ने हिंदी भाषा का तकनीकी व मेडिकल के क्षेत्र पर कैसे विकास हो इस पर चर्चा की। बड़ी संख्या में छात्राओं ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।


