Hindi Diwas: Dictionary failed to tell the meaning of Hindi - हिन्दी दिवस: सरकारी हिन्‍दी का अर्थ बताने में शब्दकोष भी फेल DA Image
11 दिसंबर, 2019|2:07|IST

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हिन्दी दिवस: सरकारी हिन्‍दी का अर्थ बताने में शब्दकोष भी फेल

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आम बोलचाल की हिन्दी अभी तक सरकारी कामकाज में अपनी जगह नहीं बना पाई है। स्थिति यह है कि सरकारी दफ्तरों की हिन्दी समझने के लिए शब्दकोष खोजना पड़ेगा। सरकारी कामकाज में हिन्दी का प्रयोग बढ़ाने के लिए हिन्दी पखवाड़ा शुरू हो गया है। पर हिन्दी को सहज बनाने की कवायद कहीं नजर नहीं आ रही है। ‘हिन्दुस्तान’ ने शनिवार को शहर के कई विभागों में पड़ताल की तो पाया कि बड़े-बड़े सरकारी विभाग हिन्दी के छोटे-छोटे शब्दों का सही इस्तेमाल नहीं करते। 

यहां तक कि उच्चाधिकारियों के पदनाम और विभाग भी ऐसी हिन्दी में लिखे हैं जो कठिन ही नहीं, अशुद्ध भी हैं। बेशक हिन्दी ने अपना दायरा बढ़ाया है। विश्व स्तर पर इसका आकर्षण दिनोंदिन बढ़ रहा है। लेकिन हिन्दी सरकारी कामकाज की भाषा बनने के लिए संघर्ष कर रही है। हिन्दी माह, हिन्दी पखवाड़ा या हिन्दी दिवस एक वार्षिक रस्म निभाने की प्रक्रिया जैसा है। हिन्दी दिवस पर प्रस्तुत है सरकारी कामकाज में हिन्दी की स्थिति पर रिपोर्ट। 

बैंकों की हिन्दी शब्दकोष से बाहर : एसबीआई बैंक नैनी में प्रवेश करने पर बायीं तरफ एक पदनाम लिखा है ‘तनाव ग्रस्त आस्तियां जोखिम एवं अनुपालन’ साथ ही सभी काउंटर पर कर्मचारियों के कार्य करने के समय का ‘कार्यकाल का समय 9 बजे ..’ लिखा गया है दोनों को समझना कठिन है। वहीं बैंक में एसबीआई ग्रीन रेमिट कार्ड के लिए ग्राहक एक फार्म भरते हैं जिसमें लिखे शब्द हिताधिकारी, विनिमय, अग्रेषण, प्राधिकृत, धन प्रेषक और पैसा निकालने वाले फार्म में लिखा अपराक्राम्य शब्द कामकाज की हिन्दी से बिल्कुल अलग है। यही स्थिति पीएनबी शाखा रामबाग व नैनी में दिखाई दी। वहां भी पैसे निकालने की स्लिप में चेक शब्द को अशुद्ध रूप में चैक लिखा गया है। वहीं पारितकर्ता, स्थानीय चैंकों के लिए, सभी चैक अनिवार्यत रेखित, आवधिक ऋण, समाशोधन बैंक आदि जैसे हिन्दी के कठिन शब्द प्रयोग में लाए जा रहे हैं। 

दिव्यांग संस्थान का नाम अशुद्ध
आनंद भवन के पास स्थित ज्योति दिव्यांग पुर्नवास केंद्र में पुर्नवास शब्द अशुद्ध लिखा है। साथ ही भरद्वाज पार्क की जगह भारद्वाज पार्क शब्द भी अशुद्ध है। आनंद भवन के सामने पर्यटन विभाग की ओर लगाए गए बोर्ड में भारद्वाज शब्द अशुद्ध लिखा है। 

एजी ऑफिस में प्रयोग हो रहे कठिन शब्द
प्राविधानित, समयान्तर्गत, दुर्विनियोजन, परिमाणित, व्यवहार्यता, निविष्टियों, अनुवर्ती प्रस्तरों, महापंजीयक, अभिकल्पन, प्राक्कलन, निष्पादनीय, परिहार्य व्यय, पुनरीक्षित, प्रस्तर संख्या, विनियोजित, प्राधिकारियों, विशिष्टियों, आगणन, परीक्षणोपरांत, अनुमोदनार्थ आदि। 

रेलवे भी कर रहा उपेक्षा
इलाहाबाद जंक्शन में सिटी साइड की तरफ काउंटर पर लिखा है ‘पुछताछ’ जबकि इसे पूछताछ होना चाहिए। प्लेटफार्म नंबर एक पर ‘स्टाल पर जनता का खाना उपलब्ध है’ जीरआरपी कार्यालय में लगे बोर्ड में ‘ब्यवस्था’ और ‘अनुराध’ शब्द अशुद्ध लिखे हैं।

बाहर हिंदी अंदर अंग्रेजी
डाक विभाग में भी हिंदी पखवाड़ा मनाया जा रहा है। रेलवे डाकघर में   बैनर भी लगाया गया है, लेकिन विभाग के अंदर किसी विभाग का नाम हिंदी में नहीं लिखा है। इसमें  नेशनल सार्टिंग हब, लेटर ब्रांच, सीआरसी, मेल एजेंसी, पार्सल हब लिखे हैं। 

शहर के 102 अनुभाग में राजभाषा विभाग
हिन्दी के अनुप्रयोग को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय सरकार के कार्यालयों में राजभाषा विभाग है। विभागों में हिन्दी अधिकारी भी नियुक्त हैं। केंद्रीय सचिवालय हिन्दी परिषद के नगर प्रधान पं. राम नरेश तिवारी पिंडीवासा ने बताया कि शहर में भारत सरकार के विभाग, उपक्रम व निगम में मिलाकर 102 अनुभाग हैं। इसमें 20 बैंक भी शामिल है। सरकारी हिन्दी के लिए यह काफी नहीं है कि लिखने वाला अपनी बात खुद समझ सके कि उसने क्या लिखा है बल्कि जरूरी यह है कि पढ़ने वाले को समझ आ जाए कि लिखने वाला क्या कहना चाहता है। 

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