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हिमाचल में जल प्रलय से त्राहिमाम: 51 मौतें; कई लापता और 750 से ज्यादा सड़कें बंद

हिमाचल प्रदेश पिछले तीन दिनों से जारी बारिश की वजह से भारी तबाही हुई है। 51 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और 30 से अधिक लोग अभी भी मलबे में दबे हैं। सड़कें बंद हैं और फ्लैट्स भी कैंसल।

हिमाचल में जल प्रलय से त्राहिमाम: 51 मौतें; कई लापता और 750 से ज्यादा सड़कें बंद
Prabhash Jhaलाइव हिंदुस्तान,नई दिल्लीMon, 14 Aug 2023 08:14 PM
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हिमाचल प्रदेश में ऑरेंज अलर्ट के बीच भारी बारिश से जबर्दस्त तबाही हुई है। शिमला, मंडी और सोलन समेत समूचे प्रदेश के कई हिस्सों में जल प्रलय, बादल फटने और भूस्खलन से अब तक 51 लोगों की मौत हो चुकी है और कई के घायल होने की रिपोर्ट है। इसके अलावा भूस्खलन की वजह से पांच नेशनल हाईवे समेत करीब 750 सड़कें बद हो गई हैं। विश्व धरोहर कालका-शिमला रेल मार्ग भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। प्राकृतिक आपदा के बाद जानमाल के नुकसान को देखते हुए राज्य सरकार ने कल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर किसी भी तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन न करने का फैसला किया है।मौसम विभाग ने मंगलवार को भारी बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया है और 18 अगस्त तक राज्य में बारिश का अनुमान जताया है।

मंडी जिले में 18, राजधानी शिमला में 14, सोलन में 11, कांगड़ा-हमीरपुर 3-3, चंबा और सिरमौर में 1-1 लोगों की जानें गई हैं। दूर-दराज के इलाकों में जानमाल के नुकसान की अभी कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। करीब 30 लोग मलबे में दबने और बहने से लापता हैं। राहत और बचाव कार्यों में सेना के साथ-साथ एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी और स्थानीय प्रशासन के सा-साथ आम लोग भी जुटे हुए हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू शिमला में सचिवालय में आपात बैठक कर रहे हैं, जिसमें प्रदेशभर में भारी बारिश से हुई तबाही को देखते हुए बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

शिमला में भूस्खलन की दो घटनाएं, 14 की मौत
राजधानी शिमला में भूस्खलन की दो घटनाओं में 14 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए बचाव अभियान चलाया जा रहा है।  शिमला के समरहिल इलाके में भारी बारिश के चलते हुए भूस्खलन की चपेट में एक शिव मंदिर आ गया। सावन का सोमवार होने के कारण हादसे के वक्त मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। मलबे से नौ शवों को बाहर निकाला गया है। 30 से अधिक लोगों के अभी भी मलबे में दबे होने की बात कही जा रही है। इसके अलावा शिमला के  ही फागली में भूस्खलन और पेड़ गिरने के कारण पांच लोगों की मौत हुई है। आठ लोग घायल हुए हैं। आपदा प्रभावित लोगों को संस्कृत कॉलेज फागली में ठहराया गया है। मुख्यमंत्री ने समरहिल इलाके में घटनास्थल का दौरा किया और कहा कि मलबे में दबे लोगों को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
     
सोलन में एक ही परिवार के 7 लोगों की मौत
सोलन जिले के जादोन गांव में बादल फटने से रविवार रात एक ही परिवार के सात लोगों की मौत हो गई। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि जिले में बादल फटने के बाद दो मकान बह गए। हादसे में छह लोगों को बचा लिया गया, जबकि सात अन्य की मौत हो गई। मृतकों की शिनाख्त हरनाम (38), कमल किशोर (35), हेमलता (34), राहुल (14), नेहा (12), गोलू (8) और रक्षा (12) के रूप में की गई है। जिले की बलेरा पंचायत में एक झोंपड़ी के भूस्खलन की चपेट में आने से दो बच्चों की मौत हो गई। उनमें से एक का शव बरामद कर लिया गया है। रामशहर तहसील के बनाल गांव में भूस्खलन में एक अन्य महिला की मौत हो गई। 
    
मंडी जिले में सबसे ज्यादा मौतें
मंडी जिले की सेघली पंचायत में रविवार देर रात भूस्खलन से दो साल के बच्चे समेत एक ही परिवार के सात सदस्यों की मौत हो गई। इस हादसे में तीन लोगों को बचा लिया गया। सांबल पंडोह में बादल फटने से छह लोगों की मौत हुई है। सभी छह मृतकों की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है। सरकाघाट के मसेरन में बादल फटने से एक महिला की मौत हो गई है। धर्मपुर में भूस्खलन के चलते दो मौतें हुई हैं। हमीरपुर में उपायुक्त हेमराज बैरवा ने बताया कि जिले में मूसलाधार बारिश के कारण तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य लापता हैं। उन्होंने जिले के सभी निवासियों से खराब मौसम के मद्देनजर खास एहतियात बरतने और अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचने की अपील की है। कांगड़ा जिले में फतेहपुर में तेज बहाव में बहने से एक बच्चे की मौत हो गई है, जबकि मैक्लोडगंज में ट्रांसफार्मर का फ्यूज बदलते समय एक विद्युत कर्मी की भी मौत हो गई है। रानीताल के निकट बाथू के पास जीप पर मलबा गिरने से ऊना अखबार लेकर जा रहे व्यक्ति की मौत हो गई है।

किन्नर कैलाश यात्रा पर रोक, विमान सेवाएं रद्द
कालका-शिमला, शिमला-किन्नौर,शिमला-धर्मशाला, मंडी-पठानकोट, चंडीगढ़-मनाली, जालंधर-मंडी, कुल्लू-आनी, मंडी-पठानकोट इन आठ एनएच समेत कुल 752 सड़कें बंद हैं। राज्य के आपात अभियान केंद्र के अनुसार, भारी बारिश से एचआरटीसी के 1800 बस रूट बंद हैं। एनएच ठप होने से इंटर स्टेट रूट भी प्रभावित हुए हैं। ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए हजारों शिव भक्तों की आस्था के केंद्र किन्नर कैलाश यात्रा पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही, खराब मौसम के चलते कांगड़ा के गगल एयरपोर्ट पर आने वाली इंडिगो और स्पाइसजेट की दो विमान सेवाएं रद्द हो गई हैं। कालका-शिमला और पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेल लाइन पहले ही ठप चल रही हैं।  रविवार शाम से कांगड़ा में 273 मिलीमीटर, धर्मशाला में 250 मिमी, सुंदरनगर में 168 मिमी, मंडी में 140 मिमी, जब्बारहट्टी में 132 मिमी, शिमला में 126 मिमी, बरठी में 120 मिमी, धौलाकुआं में 111 मिमी और नाहन में 107 मिमी बारिश हुई।