ट्रेन में कंबल, चादर, तौलिये की चोरी रोकेगी चिप

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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रेलवे बोर्ड अपने बेडरोल (लिनन) प्रबंधन को हाईटेक करने जा रहा है। कंबल और चादरों में आरएफआईडी चिप लगाई जाएगी ताकि चोरी रुके। सेंसर भी लगाए जाएंगे, जिससे चोरी की कोशिश पर अलार्म बजेगा। हर साल लाखों बेडरोल की चोरी पर लगाम लगेगी और यात्रियों को गंदे कंबलों से छुटकारा मिलेगा।

ट्रेन में कंबल, चादर, तौलिये की चोरी रोकेगी चिप

ट्रेन के एसी कोच में मिलने वाले तौलिये, कंबल, चादर और तकिया कवर की चोरी पर जल्द ही लगाम लगने वाली है। रेलवे बोर्ड अपने बेडरोल (लिनन) मैनेजमेंट को पूरी तरह हाईटेक करने जा रहा है। इसके तहत कंबल और चादरों के भीतर बेहद बारीक आरएफआईडी (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) चिप लगाई जाएंगी, जिससे चोरी के मामले रुक सकेंगे। रेलवे की यह नई तकनीक दो मोर्चों पर एक साथ काम करेगी। इससे जहां हर वर्ष होने वाले लाखों बेडरोल की चोरी पर पूरी तरह से लगाम लगेगी, वहीं सख्त डिजिटल निगरानी के कारण यात्रियों को गंदे और बदबूदार कंबलों से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाएगा।

निकास द्वार पर लगाए जाएंगे सेंसर :

कंबल, चादर में आरएफआईडी चिप लगाने के साथ ट्रेन के निकास द्वारों पर अदृश्य सेंसर लगाए जाएंगे। यदि कोई यात्री इन सरकारी कंबलों या चादरों को अपने बैग में छिपाकर ले जाने की कोशिश करेगा, तो ट्रेन या स्टेशन से उतरते समय दरवाजे का सेंसर तुरंत अलार्म (हूटर) बजा देगा।

रेलवे बोर्ड की तकनीक :

रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुंबई के सेंट्रल और वेस्टर्न डिवीजन ने प्रीमियम ट्रेनों (जैसे राजधानी और अगस्त क्रांति एक्सप्रेस) के लिनन और कंबलों के बेहतर प्रबंधन के लिए इस तकनीक का शुरुआती खाका तैयार कर लिया है। रेलवे बोर्ड ने इस योजना का दायरा और बड़ा कर दिया है।

अंतिम पड़ाव पर चोरियां ज्यादा :

अधिकारी ने बताया कि भारतीय रेलवे में हर साल करीब 14 से 15 करोड़ बेडरोल की आपूर्ति की जाती है। इनमें से सालाना लगभग 10 से 12 लाख बेडरोल के आइटम चोरी (जिसमें सबसे ज्यादा तौलिये और चादरें शामिल हैं) हो जाते हैं। आंतरिक समीक्षा में सामने आया है कि लंबी दूरी की प्रीमियम ट्रेनों में यात्रा के अंतिम पड़ाव या टर्मिनल स्टेशन पर ये चीजें सबसे ज्यादा गायब होती हैं।

कर्म खर्च में बड़ा फायदा :

रेलवे बोर्ड के अधिकारी के मुताबिक, तकनीक को लागू करने का खर्च बहुत सीमित है। एक बेडरोल (कंबल या चादर) पर चिप लगाने की लागत मात्र 20 से 50 रुपये आएगी। वहीं, प्रति कोच या स्टेशन पर लगभग 20 से 30 हजार का रीडर (स्कैनर) सिस्टम लगेगा। यह लागत हर वर्ष चोरी से होने वाले नुकसान से कहीं कम होगी। अधिकारी ने बताया कि बाजार भाव के अनुसार, चोरी के कारण रेलवे को हर वर्ष 50 से 60 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान उठाना पड़ता है। हालांकि, निजी वेंडर वाली ट्रेनों में चोरी गए सामान का पैसा कोच सहायकों (अटेंडेंट्स) के वेतन से काटा जाता है। रेलवे में तैनात लगभग 50 से 60 हजार अटेंडेंट्स और हाउसकीपिंग स्टाफ को भी इस नई व्यवस्था से बड़ी राहत मिलेगी।

सामान्य प्रश्न

रेलवे की नई तकनीक क्या है?
रेलवे बोर्ड अपने बेडरोल प्रबंधन को हाईटेक करने के लिए कंबल और चादरों में आरएफआईडी चिप लगाने जा रहा है।

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अरविंद सिंह

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