इंडस्ट्रियल लैंड की जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण मामले में एसीएस तलब
लखनऊ हाईकोर्ट ने 117 एकड़ की सरकारी लीज भूमि में से 59 एकड़ अवैध हस्तांतरण मामले पर राज्य सरकार की कार्रवाई पर सख्ती दिखाई है। न्यायालय ने अपर मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। लीज शर्तों के अनुसार यह जमीन हस्तांतरित नहीं हो सकती थी, लेकिन दो कंपनियों को स्थानांतरित कर दी गई।

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लगभग 117 एकड़ सरकारी लीज पर दी गई भूमि में से 59 एकड़ जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण के मामले में राज्य सरकार के रवैये पर सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने कहा है कि मामले में जिस विभाग के अपर मुख्य सचिव पर कार्रवाई की जिम्मेदारी हो, वह बुधवार को दोपहर 12 बजे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने लोकेश कुमार खुराना की ओर से वर्ष 2022 में दाखिल जनहित याचिका पर पारित किया। याची के अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने बताया कि 21 सितम्बर 1972 को 117 एकड़ जमीन मोदी रबर लिमिटेड को इंडस्ट्री लगाने के लिए लीज पर दी गई थी लेकिन बाद में 59.11 एकड़ भूमि का हस्तांतरण मेसर्स मोदी टायर कम्पनी प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स कॉन्टीनेंटल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड फरीदाबाद को कर दिया गया है जबकि लीज की शर्तों में ही यह स्पष्ट था कि उक्त जमीन हस्तांतरित नहीं जा सकती।
वहीं मामले की पूर्व सुनवाई के दौरान मेसर्स मोदी रबर लिमिटेड की ओर से दावा किया गया था कि भूमि बेची नहीं गई, बल्कि बोर्ड ऑफ इंडस्ट्रियल एंड फायनेंसियल रीकंस्ट्रक्शन के समक्ष हुए समझौते और कंपनी के पुनरुद्धार एवं पुनर्वास योजना के तहत भूमि उपरोक्त दोनों कंपनियों के पास गई। यह भी कहा गया कि शेष भूमि मूल उद्देश्य यानी औद्योगिक गतिविधियों के लिए ही उपयोग में लाई जा रही है।हालांकि, 8 अक्टूबर 2025 को राज्य सरकार की ओर से दाखिल जवाब में बताया गया था कि 4 सितम्बर 2024 को जिलाधिकारी मेरठ के आदेश पर गठित एक जांच समिति ने प्रकरण में जांच की। उक्त जाचं समिति ने भूमि का हस्तांतरण बिना राज्य सरकार की अनुमति के और अवैध पाया। कहा गया था कि उक्त जांच रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय राज्य सरकार को लेना था। मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने निर्णय की जानकारी देने के लिए पुनः तीन सप्ताह का समय मांगा। इस पर न्यायालय ने नाराजगी जतायी।


