पहाड़ में दिन, मैदान में रात को सर्वाधिक सड़क दुर्घटनाएं
कुमाऊं मंडल में पिछले साल 2.82 लाख से अधिक सड़क हादसे हुए। आंकड़ों के अनुसार, दिन में 138410 और रात में 144317 हादसे हुए। पहाड़ी जिलों में रात में कम हादसे होते हैं, लेकिन मैदानी क्षेत्रों में रात को दुर्घटनाएं बढ़ जाती हैं। पुलिस सड़क हादसों को रोकने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।

संतोष जोशी हल्द्वानी। कुमाऊं मंडल में सड़क हादसों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। पिछले एक साल में कुमाऊं की सड़कों पर 2.82 लाख से अधिक हादसे हुए। आंकड़ों के मुताबिक पहाड़ में दिन और मैदानी जिलों में रात के समय अधिक दुर्घटनाएं हुईं।
दुर्घटनाओं का समय
डायल 112 की वार्षिक रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार कुमाऊं मंडल में दिन के मुकाबले रात के समय कुल हादसों की संख्या अधिक रही है। एक साल में जहां दिन के समय कुल 138410 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, वहीं रात के सन्नाटे में यह आंकड़ा बढ़कर 144317 तक पहुंच गया। रिपोर्ट के मुताबिक पहाड़ के जिलों में दिन के मुकाबले रात को काफी कम हादसे होते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि पहाड़ी मार्गों पर रात के समय यातायात का दबाव बेहद कम हो जाता है। जबकि मैदानी जिलों में रात के समय भारी वाहनों की आवाजाही, तेज रफ्तार और कम दृश्यता के कारण सर्वाधिक सड़क हादसे होते हैं।
खराब सड़कों का प्रभाव
कुमाऊं की सड़कों पर 100 से अधिक ब्लैक स्पॉट
हादसों के बढ़ते आंकड़ों के पीछे सड़कों की खराब स्थिति और खामियां भी बड़ी वजह हैं। कुमाऊं रेंज की सड़कों पर 100 से अधिक ब्लैक स्पॉट (अत्यधिक दुर्घटना संभावित क्षेत्र) पूर्व में परिवहन और पुलिस विभाग ने चिह्नित किए थे। इन ब्लैक स्पॉट्स और कई अन्य खतरनाक मोड़ों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं।
जिलावार हादसों का आंकड़ा
दिन और रात में हुए हादसों का जिलावार आंकड़ा:
जिला दिन में रात में
यूएस नगर 74935 74934
नैनीताल 34223 45750
अल्मोड़ा 10179 7231
बागेश्वर 5136 4025
चम्पावत 5592 4587
पिथौरागढ़ 9456 6679
कुल 138410 144317
कोट:
सड़क हादसों को रोकने के लिए पुलिस हरसंभव प्रयास कर रही है। डायल 112 को त्वरित एक्शन के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने समय से पहुंचकर हजारों घायलों को नया जीवनदान दिया है।
निवेदिता कुकरेती, आईजी कुमाऊं


