गौला में समाई चिड़ियाघर की 25 बीघा जमीन, एनएचएआई को नोटिस
हल्द्वानी में बारिश के चलते गौला नदी ने अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर की जमीन को काट लिया है। वन विभाग ने एनएचएआई को तटबंध की कमी के लिए जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, 50 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद कटाव नहीं थम रहा है। एनएचएआई को नोटिस जारी कर ठोस कदम उठाने का निर्देश दिया गया है।
हल्द्वानी, मुख्य संवाददाता। पर्वतीय क्षेत्रों में तीन-चार दिन से जारी बारिश के बीच गौला के तेज बहाव और कटाव ने अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर की करीब 25 बीघा जमीन नदी में समा दी। लगातार बढ़ते कटाव को लेकर अब वन विभाग और एनएचएआई आमने-सामने हैं। वन विभाग ने एनएचएआई को नोटिस भेजकर नदी के बीच गलत तरीके से तटबंध बनाए जाने को कटाव बढ़ने की वजह बताया है। गौला का जलस्तर बढ़ने के साथ नदी ने चिड़ियाघर की ओर तेजी से कटाव किया। वन विभाग के अनुसार तटबंध की दिशा और निर्माण में खामी के कारण पानी का दबाव वन भूमि की तरफ बढ़ा। उधर, एनएचएआई की ओर से पुल सुरक्षा के लिए बनाए गए ढांचे का बड़ा हिस्सा भी बारिश में क्षतिग्रस्त हुआ है। पूर्व में पुल सुरक्षा, चैनलाइजेशन, ड्रेजिंग और तटबंध पर करीब 50 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। हालात यह हैं कि बारिश थमने का इंतजार करने के बजाय अब विभाग कटाव थामने की जुगत में जुटे हैं। सवाल यह भी है कि करोड़ों रुपये के सुरक्षा कार्य के बावजूद अगर नदी का रुख नहीं बदला तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी。
तटबंध निर्माण पर खड़े हो रहे सवाल
गौला पुल को सहारा देने वाले पिलरों को नदी के तेज बहाव और कटाव से बचाने के लिए ही उनके नीचे तटबंध बनाए गए थे। हालांकि, इनके निर्माण के दौरान इस बात का आकलन ही नहीं किया गया कि तटबंधों से टकराकर पानी का रुख दूसरी दिशा में भी मुड़ सकता है। यदि समय रहते इस बात को ध्यान में रखा जाता, तो तटबंधों का डिजाइन उसी अनुसार तैयार किया जाता। एनएचएआई की इस अनदेखी और वन विभाग के सही अंदाजा न लगा पाने के चलते ही गौला नदी के उफान ने चिड़ियाघर के एक बड़े हिस्से का कटाव कर डाला。
50 करोड़ का इंतजाम, फिर भी नहीं थमा गौला का कटाव
एनएचएआई ने गौला पुल की सुरक्षा के लिए पहले करीब 50 करोड़ रुपये खर्च किए थे। इसमें पुल की नींव की सुरक्षा, नदी को चैनलाइज करने, ड्रेजिंग और तटबंध निर्माण जैसे काम शामिल थे, लेकिन बारिश में गौला के उफान के साथ तटबंध का हिस्सा बह गया और सुरक्षा ढांचा भी क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद नदी ने वन भूमि की ओर कटाव तेज कर दिया।
गलत तरीके से तटबंद बनाए गए हैं। इस वजह से करीब 2 हेक्टेयर वन भूमि में कटाव हो गया है। एनएचएआई को नोटिस जारी कर कटाव को रोकने के लिए ठोस इंतजाम करने को कहा गया है।
- दीपक सिंह, डीएफओ, तराई पूर्वी वन प्रभाग


