बेटी के दिल की सर्जरी के लिए 14 साल से एम्स के चक्कर लगा रहा पिता
दिल्ली के एम्स में वर्ष 2012 से एक बच्ची की दिल की सर्जरी टल रही है। पिता मुकेश ने कहा कि डॉक्टरों ने ऑपरेशन के लिए सितंबर 2015 की तारीख दी थी, लेकिन अब तक नहीं किया गया। 1.55 लाख रुपये जमा करने के बाद भी बच्ची को इलाज नहीं मिल रहा है। डॉक्टरों की नाराजगी भी इस स्थिति में है।

- 2012 में पौने दो साल की बच्ची के दिल की सर्जरी करने के लिए सितंबर 2015 की तारीख दी थी - फिर भी नहीं किया ऑपरेशन, पिता का आरोप, सांसद की सिफारिश कराने से नाराज डॉक्टर अब ऑपरेशन करने में कर रहे आनाकानी
सर्जरी की लंबी तारीख
नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। सर्जरी की लंबी तारीख मिलने की बात तो दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में अक्सर सामने आती है, लेकिन कोटा के रहने वाले मुकेश कुमार 14 साल से अपनी बेटी के दिल का ऑपरेशन कराने के लिए दिल्ली एम्स के चक्कर काट रहे हैं।
तनवी की समस्या
वर्ष 2012 में अपनी पौने दो साल की बेटी के दिल के छेद का ऑपरेशन कराने के लिए दिल्ली एम्स पहुंचे मुकेश को डॉक्टरों ने सर्जरी के लिए सितंबर 2015 की तारीख दी थी, लेकिन अभी तक ऑपरेशन नहीं किया गया। बच्ची अब 16 साल की हो चुकी है और अपनी बीमारी के साथ ही जीवन जी रही है।
कपड़े की दुकान पर सेल्समैन की नौकरी करने वाले गुमानपुर कोटा निवासी मुकेश कुमार का कहना है कि उनकी बेटी तनवी के जन्म से ही वेंट्रिकलर सेप्टल डिफेक्ट (दिल में छेद) है। पहली बार वे 10 अक्तूबर 2012 को दिल्ली एम्स में उसे दिखाने आए थे। डॉक्टर ने ऑपरेशन के लिए कहा और 2 सितंबर 2015 को बुलाया। बाद में इस तय तारीख को बदलकर 16 नवंबर 2015 कर दिया गया। इसके बावजूद दिसंबर में बुलाया गया और तनवी को भर्ती कर लिया गया। आरोप है कि दांतों में कीड़े लगे होने की बात कहकर सर्जरी टाल दी गई और इसके बाद 4 जनवरी, 2016 को बुलाया गया। इसके बाद बार-बार तारीख बदली गई, लेकिन तनवी का ऑपरेशन नहीं किया गया। तभी से वे एम्स दिल्ली के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन सर्जरी नहीं हो पा रही है।
सर्जरी के लिए भुगतान और रक्त
1.55 लाख रुपये और चार यूनिट रक्त भी ले लिया
मुकेश का आरोप है कि 4 अप्रैल 2014 को एम्स के डॉक्टर ने उनसे ऑपरेशन के लिए 1,25,000 लाख रुपये जमा करा लिए और चार यूनिट रक्त भी जमा लिया। इसके बाद सर्जरी के लिए दो सितंबर 2015 की तारीख दे दी गई, लेकिन अस्पताल आने पर बेड खाली नहीं होने की बात कह कर भर्ती नहीं किया। इस तरह मामला टालते रहे। बाद में बताया कि एक इंप्लांट डालना पड़ेगा। इसके लिए डॉक्टर ने दवा कंपनी के एक प्रतिनिधि संजीव का नंबर लिखकर दिया। उसने 30 हजार रुपये लिए और कहा कि इंप्लांट सीधे अस्पताल में पहुंच जाएगा। अब तक 1.55 लाख रुपये और चार यूनिट रक्त लेने के बाद भी ऑपरेशन नहीं किया गया।
डॉक्टरों की नाराजगी
सांसद के पीए का फोन तो वजह नहीं
तनवी के पिता मुकेश का आरोप है कि बार-बार तारीख बदले जाने से परेशान होकर उन्होंने अपने क्षेत्र के सांसद से अनुरोध किया। उनके पीए ने एम्स के संबंधित डॉक्टर को फोन किया। इस पर दोनों में बहस हो गई। आरोप है कि अब एम्स के संबंधित डॉक्टर नाराजगी के कारण ऑपरेशन नहीं कर रहे हैं। अब कभी जीबी पंत तो कभी हैदराबाद के अस्पताल में जाकर इलाज कराने का दबाव बना रहे हैं। उनका कहना है कि हैदराबाद में सर्जरी का खर्च 6 लाख रुपये हैं और वे इतनी रकम जुटाने में असमर्थ हैं।
निष्कर्ष
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कोट
यह चिंता का विषय है। मामले की जांच की जाएगी और इसका समाधान कराया जाएगा।
-डॉ. रीमा दादा, मीडिया प्रभारी, एम्स दिल्ली


