बच्चा हेराफेरी : 3.5 साल बाद भी बच्ची के असली माता-पिता का पता नहीं
बिहारशरीफ में एक निजी क्लिनिक में नवजात बच्ची के मामले में तीन साल बाद भी उसके असली माता-पिता का पता नहीं चला है। बच्ची सरकारी संरक्षण में रह रही है। शिकायतकर्ता दंपती ने बच्ची को गोद लेने से इनकार कर दिया है। अस्पताल की लापरवाही से परिवार बिखर गया है।

बच्चा हेराफेरी : 3.5 साल बाद भी बच्ची के असली माता-पिता का पता नहीं
गोपनीयता के बावजूद पहचान का संकट
निजी क्लिनिक में बदल दिया गया था नवजात बच्चा शिकायत करने वाले दंपती ने बच्ची को अपनाने से कर दिया था इनकार जिला बाल संरक्षण विभाग की देख-रेख में पल रही है बच्ची अस्पताल की चूक से तीन साल से टूटा परिवार बेटा गंवाया और बेटी को अब तक नहीं मिली पहचान बिहारशरीफ, निज संवाददाता। शहर के एक निजी क्लिनिक में नवजात बच्चा बदले जाने के मामले को साढ़े तीन साल बीत चुके हैं। लेकिन, आज तक यह तय नहीं हो पाया कि बच्ची साधना (काल्पनिक नाम) के असली मां-बाप कौन हैं। डीएनए जांच तक हो चुकी है, फिर भी जैविक माता-पिता तक पहुंचने में प्रशासन और पुलिस, दोनों नाकाम साबित हुई है। नतीजा यह कि एक मासूम बच्ची अपने ही परिवार से महरूम होकर सरकारी संरक्षण में बड़ी हो रही है। घटना के बाद शिकायत करने वाले दंपती ने बच्ची को अपनाने से इनकार कर दिया था। जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी सुदर्शन के मुताबिक बच्ची फिलहाल विभाग की देखरेख में है। नगर निगम से उसका जन्म प्रमाणपत्र बन चुका है। हालांकि, आधार कार्ड अब भी लंबित है। कुछ दिन पहले एक दंपती बच्ची को गोद लेने पहुंचा भी था। लेकिन, तकनीकी अड़चनों की वजह से दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया अधूरी रह गई। अधिकारी का कहना है कि अनुमति मिलते ही प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाएगी। लेकिन, असली सवाल जस का तस बना हुआ है कि बच्ची के जैविक माता-पिता कौन हैं। सदर एसडीओ किसलय श्रीवास्तव ने बताया कि निजी अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
कैसे बदला गया था बच्चा
: राजगीर थाना क्षेत्र के डुमरी गांव निवासी अविनाश और सिंकी की शादी वर्ष 2014 में हुई थी। पहले से दो बेटे हैं। 25 मार्च 2023 को गिरियक अस्पताल में सिंकी ने बेटे को जन्म दिया था। तबीयत बिगड़ने पर उसी दिन नवजात को बिहारशरीफ के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां 17 दिन तक वह आईसीयू में भर्ती रहा। 12 अप्रैल को अस्पताल ने दंपती को बेटे की जगह एक बच्ची थमा दी। पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। भर्ती रजिस्टर में बच्चे के लिंग के आगे शुरू में ‘मेल’ दर्ज था, जिसे बाद में बदलकर ‘एफई’ जोड़ते हुए फीमेल कर दिया गया। आईसीयू में सीसीटीवी कैमरा तक नहीं लगा था। मरीजों की एंट्री-एग्जिट की रजिस्टर भी ठीक से मेंटेन नहीं मिली। (बिहारशरीफ से रमेश कुमार)


