जिले में घर-घर कैंसर से लेकर मधुमेह की होगी जांच
जिले में घर-घर कैंसर से लेकर मधुमेह की होगी जांच जिले में घर-घर कैंसर से लेकर मधुमेह की होगी जांच जिले में घर-घर कैंसर से लेकर मधुमेह की होगी जांच जिल

कटिहार, वरीय संवाददाता। गैर संचारी रोगों (एनसीडी) की समय रहते पहचान कर लोगों को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए जिले में बुधवार से जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार अभियान की शुरुआत हो गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्यव्यापी अभियान का शुभारंभ किया। कटिहार एनआईसी सभागार से जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी, पूर्व उपमुख्यमंत्री व कटिहार विधायक तारकिशोर प्रसाद, प्राणपुर विधायक निशा सिंह, कोढ़ा विधायक कविता देवी, सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र कुमार समेत कई अधिकारी शामिल हुए। समाहरणालय परिसर में इस अवसर पर विशेष जांच शिविर भी लगाया गया। अभियान 30 नवंबर 2026 तक चलेगा। इसके तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर पहुंचकर लोगों की स्क्रीनिंग करेंगी। बिहार में करीब छह करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा गया है, जबकि प्रत्येक स्वास्थ्य संस्थान को प्रतिदिन 50 लोगों की जांच का लक्ष्य दिया गया है। अभियान की जिला स्तर पर निगरानी स्वयं जिलाधिकारी करेंगे。
घर की चौखट पर पहुंचेगी स्वास्थ्य सेवा
अभियान के दौरान आशा कार्यकर्ता और एएनएम प्रत्येक घर का भ्रमण कर फैमिली फोल्डर तैयार करेंगी तथा कम्युनिटी बेस्ड असेसमेंट चेकलिस्ट (सीबीएसी) के माध्यम से जोखिम वाले लोगों की पहचान करेंगी। स्क्रीनिंग से जुड़ी पूरी जानकारी मोबाइल आधारित एनसीडी एप पर दर्ज होगी। संदिग्ध मरीजों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर अथवा नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी आशा कार्यकर्ताओं की होगी।
मधुमेह, ब्लड प्रेशर से लेकर कैंसर तक की होगी जांच
जिलाधिकारी ने बताया कि अभियान का उद्देश्य गैर संचारी रोगों की शुरुआती अवस्था में पहचान करना है। इसके तहत उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग, मुंह, स्तन एवं गर्भाशय मुख का कैंसर, नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) की स्क्रीनिंग की जाएगी। समय रहते बीमारी की पहचान होने से उपचार आसान होगा और जटिलताओं को रोका जा सकेगा।
30 वर्ष से अधिक उम्र वालों की होगी अनिवार्य स्क्रीनिंग
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में आने वाले 30 वर्ष या उससे अधिक आयु के प्रत्येक व्यक्ति की लंबाई, वजन और बीएमआई की जांच होगी। इसके बाद विभिन्न गैर संचारी रोगों की स्क्रीनिंग की जाएगी। पहले से पंजीकृत मरीजों की दोबारा जांच होगी तथा गंभीर मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर टेली-कंसल्टेशन के जरिए चिकित्सकीय सलाह और 30 दिनों तक की दवा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
अस्पतालों में मिलेंगी आधुनिक जांच सुविधाएं
अभियान के दौरान स्वास्थ्य संस्थानों में सीबीसी, ब्लड शुगर, एचबीए1सी, लिपिड प्रोफाइल, लिवर व किडनी फंक्शन टेस्ट, 24 घंटे का यूरिन फॉर प्रोटीन, ईसीजी, पैप स्मीयर, बायोप्सी, विटामिन-डी3, विटामिन-बी12, टी-3, टी-4 और टीएसएच सहित कई महत्वपूर्ण जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। जांच के बाद मरीजों को दवा, उपचार अथवा आवश्यकता अनुसार उच्च संस्थान में रेफर किया जाएगा।
हर महीने होगा मरीजों का फॉलोअप
स्वास्थ्य विभाग केवल स्क्रीनिंग तक सीमित नहीं रहेगा। उपचाररत मरीजों की लाइन लिस्ट और फॉलोअप रजिस्टर तैयार किया जाएगा। आशा कार्यकर्ता मरीजों को नियमित दवा लेने, समय-समय पर जांच कराने और हर माह स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने के लिए प्रेरित करेंगी। स्क्रीनिंग से लेकर उपचार और फॉलोअप तक का पूरा रिकॉर्ड एनसीडी पोर्टल पर रियल टाइम अपडेट होगा।
स्वास्थ्यकर्मियों की तय हुई जिम्मेदारी
अभियान को सफल बनाने के लिए आशा, आशा फैसिलिटेटर, एएनएम, सीएचओ, चिकित्सा पदाधिकारी, बीसीएम, बीएमएंडई, बीएचएम, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी तथा जिला स्तरीय अधिकारियों की अलग-अलग जिम्मेदारियां तय की गई हैं। आशा कार्यकर्ता घर-घर सर्वे और संदिग्ध मरीजों को स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने का काम करेंगी, जबकि सीएचओ और एएनएम स्क्रीनिंग, दवा वितरण, टेली-कंसल्टेशन और रेफरल की व्यवस्था संभालेंगे। चिकित्सक बीमारी की पुष्टि कर उपचार उपलब्ध कराएंगे तथा काउंसलर मरीजों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे।
रोज होगी समीक्षा, जिला स्तर से होगी मॉनिटरिंग
अभियान की प्रगति की प्रतिदिन प्रखंड और जिला स्तर पर समीक्षा होगी। स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों और कर्मियों का दैनिक रोस्टर तैयार किया जाएगा। जिला स्तर पर डिस्ट्रिक्ट एनसीडी ऑफिसर को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है। डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम मैनेजर, डिस्ट्रिक्ट मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन ऑफिसर तथा डिस्ट्रिक्ट कम्युनिटी मोबिलाइजर अभियान की निगरानी करेंगे। सिविल सर्जन स्तर से भी पूरे अभियान की सतत मॉनिटरिंग होगी तथा दवा, उपकरण और जांच सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
समय पर जांच, समय पर पहचान और समय पर उपचार पर जोर
सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र कुमार ने कहा कि यह अभियान केवल बीमार लोगों की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ लोगों में बीमारी के जोखिम का समय रहते पता लगाकर उन्हें जीवनशैली में बदलाव और आवश्यक परामर्श देने का भी प्रयास है। घर-घर स्क्रीनिंग से ऐसे लोग भी स्वास्थ्य जांच के दायरे में आएंगे जो अब तक स्वास्थ्य केंद्र नहीं पहुंच पाए हैं। अभियान का उद्देश्य गैर संचारी रोगों से होने वाली असामयिक मौतों को कम करना और लोगों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना है।


