जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान, घर-घर पहुंचेगी स्वास्थ्य सेवा
जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान, घर-घर पहुंचेगी स्वास्थ्य सेवा जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान, घर-घर पहुंचेगी स्वास्थ्य सेवा

किशनगंज। बीमारी के गंभीर होने का इंतजार करने के बजाय अब स्वास्थ्य विभाग खुद लोगों के घरों तक पहुंचेगा। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग, कैंसर, गैर-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज और सीओपीडी जैसे गैर-संचारी रोगों की शुरुआती अवस्था में पहचान, जांच और उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिले में ‘जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान की शुरुआत बुधवार, 2 सितंबर 2026 से होगी। यह विशेष अभियान 30 नवंबर तक चलेगा। अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर पहुंचकर लोगों की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी लेगी, जोखिम वाले व्यक्तियों की पहचान करेगी और आवश्यकता के अनुसार उन्हें जांच, उपचार एवं नियमित फॉलोअप से जोड़ेगी।
बीमारी की पहचान के लिए अब अस्पताल आने का इंतजार नहीं
बदलती जीवनशैली, खान-पान की आदतों, शारीरिक गतिविधियों की कमी और बढ़ते तनाव के कारण गैर-संचारी रोग लगातार बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन रहे हैं। इन बीमारियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि शुरुआती चरण में कई बार इनके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। व्यक्ति खुद को स्वस्थ समझता रहता है, जबकि बीमारी धीरे-धीरे शरीर में अपना प्रभाव बढ़ाती रहती है। इसी स्थिति को बदलने के उद्देश्य से सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को समुदाय के और करीब ले जाने पर जोर दिया है। ‘जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग करेगी। खासतौर पर 30 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के लोगों की गैर-संचारी रोगों के लिए जांच पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।आशा कार्यकर्ता घर-घर भ्रमण कर लोगों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी जुटाएंगी और उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों की पहचान करेंगी। इसके बाद एएनएम, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के सहयोग से आवश्यक जांच और चिकित्सकीय परामर्श की व्यवस्था की जाएगी।
अभियान शुरू होने से पहले तैयारियों को दिया गया अंतिम रूप
अभियान शुरू होने से पहले जिले के सभी पीएचसी एवं सीएचसी में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने तैयारियों को अंतिम रूप दिया है। घर-घर स्क्रीनिंग, उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों की पहचान, मरीजों की लाइन लिस्ट तैयार करने, जांच के लिए स्वास्थ्य संस्थानों से जोड़ने तथा उपचार एवं फॉलोअप की पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित किया गया है।स्वास्थ्य संस्थानों पर आवश्यकता के अनुसार ब्लड शुगर, एचबीए1सी, लिपिड प्रोफाइल, लिवर फंक्शन टेस्ट, किडनी फंक्शन टेस्ट, ईसीजी, पैप स्मीयर सहित अन्य आवश्यक जांच की सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी की गई है। चिन्हित मरीजों को उनकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार उपचार उपलब्ध कराया जाएगा तथा जरूरत पड़ने पर उच्चतर स्वास्थ्य संस्थानों से जोड़ा जाएगा।
सरकार की मंशा-समय पर पहचान, समय पर उपचार
जिला गैर-संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. उर्मिला कुमारी ने बताया कि अभियान का उद्देश्य केवल अस्पताल आने वाले मरीजों की जांच करना नहीं है, बल्कि उन लोगों तक भी स्वास्थ्य सेवा पहुंचाना है, जो किसी स्पष्ट लक्षण के अभाव में अपनी जांच नहीं कराते हैं। घर-घर जाकर उच्च जोखिम वाले लोगों की पहचान होने से बीमारी को शुरुआती अवस्था में पकड़ने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मुंह, स्तन एवं गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर सहित हृदय रोग, एनएएफएलडी और सीओपीडी की समय पर पहचान कर आवश्यक प्रबंधन उपलब्ध कराने पर विशेष जोर रहेगा। सभी स्वास्थ्यकर्मियों को अभियान के दौरान निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार कार्य करने और चिन्हित मरीजों को उपचार से जोड़ने का निर्देश दिया गया है।
जिलापदाधिकारी ने लोगों से जांच में सहयोग की अपील की
जिलापदाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि गैर-संचारी रोगों के खिलाफ लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण है कि बीमारी की पहचान समय रहते हो। कई गंभीर बीमारियां लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षण के रह सकती हैं। ऐसे में नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है।उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं कर्मियों को अभियान को पूरी गंभीरता से संचालित करने का निर्देश देते हुए कहा कि घर-घर स्क्रीनिंग से लेकर उपचार और फॉलोअप तक किसी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जिलेवासियों से अपील की कि जब स्वास्थ्यकर्मी उनके घर पहुंचें तो उन्हें आवश्यक जानकारी दें और स्वास्थ्य जांच में सहयोग करें। उम्र एवं स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार आवश्यक जांच अवश्य कराएं, क्योंकि समय पर हुई जांच भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
पहचान के बाद उपचार और फॉलोअप भी होगा सुनिश्चित
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि अभियान का उद्देश्य सिर्फ मरीजों की पहचान कर सूची तैयार करना नहीं है। चिन्हित प्रत्येक मरीज को उसकी जरूरत के अनुसार जांच, चिकित्सकीय परामर्श, दवा और आगे की स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना अभियान की प्राथमिकता है।उन्होंने कहा कि गंभीर अथवा जटिल मामलों को आवश्यकता के अनुसार उच्चतर स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया जाएगा। टेली-कंसल्टेशन के माध्यम से भी विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास रहेगा। उपचार शुरू होने के बाद मरीजों का नियमित फॉलोअप भी सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि मरीज बीच में उपचार छोड़ न दें।
घर की चौखट तक पहुंचेगी स्वास्थ्य सेवा
एनसीडी पदाधिकारी डॉ. उर्मिला कुमारी ने बताया कि 2 सितंबर से शुरू होने वाला यह अभियान इस मायने में महत्वपूर्ण है कि स्वास्थ्य सेवा के लिए लोगों को केवल अस्पताल तक आने पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। स्वास्थ्य विभाग स्वयं समुदाय और घरों तक पहुंचेगा। खासकर ऐसे लोगों के लिए यह पहल उपयोगी होगी, जो बीमारी के लक्षण नहीं होने या जागरूकता की कमी के कारण अपनी जांच नहीं कराते हैं।सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है-बीमारी की पहचान में देरी न हो, उपचार शुरू करने में देरी न हो और छोटी स्वास्थ्य समस्या गंभीर बीमारी में तब्दील न हो। तीन महीने तक चलने वाले इस विशेष अभियान के माध्यम से जिले में गैर-संचारी रोगों की समय पर पहचान, उपचार और फॉलोअप को मजबूत करने की दिशा में व्यापक प्रयास किया जाएगा।


