मौसम में बदलाव से वायरल की चपेट में आ रहे बच्चे, पीआईसीयू फुल
मौसम में बदलाव का बच्चों की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। खानपान में गड़बड़ी और दूषित पानी के सेवन से बच्चे तेजी से बीमार हो रहे हैं। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में मरीजों की संख्या बढ़ गई है, जिससे अस्पताल में भीड़ और संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।

देवरिया, निज संवाददाता। मौसम में बदलाव का असर बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। खानपान में गड़बड़ी और दूषित पानी के सेवन से बच्चे बीमार हो रहे हैं। वायरल, बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण तेज बुखार, उल्टी, दस्त, पेट दर्द, सांस से पीड़ित हो रहे हैं। इस समय महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। ओपीडी में भी भीड़ हो रही है, वहीं पीआईसीयू व चिल्ड्रेन वार्ड में बेड भर जा रहे हैं। मरीजों के बढ़ने पर एक बेड पर दो-दो बच्चों का उपचार करना पड़ रहा है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा भी बना रहता है। गंभीर मरीजों को स्वस्थ होने में करीब पांच से सात दिन का समय लग जा रहा है। डॉक्टर दवा देने के साथ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
मौसम का प्रभाव
मौसम बदला है। बारिश के बाद तेज धूप हो रही है। साथ ही उमस भी बढ़ गई है। इस समय वायरस व बैक्टीरिया का संक्रमण का प्रकोप भी बढ़ता है। इसका स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। खानपान में गड़बड़ी, दूषित पेयजल के सेवन व सफाई पर ध्यान नहीं देने के कारण इम्युनिटी कम होने से बच्चे बीमार हो रहे हैं। वह तेज बुखार, उल्टी, दस्त, पेट दर्द से पीड़ित हो रहे हैं तो कुछ को सांस की दिक्कत हो रही है, वहीं पीलिया से भी पीड़ित हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ी है। इस तरह के लक्षण के 24 घंटे में गंभीर करीब 10 से 15 मरीज भर्ती हो रहे हैं, जिससे पीआईसीयू में दबाव बढ़ गया है। बेड कम पड़ जा रहे हैं। मरीजों की संख्या बढ़ाने पर एक बेड पर दो-दो मरीजों का इलाज करना पड़ रहा है। रविवार को दोपहर तक पीआईसीयू व चिल्ड्रेन वार्ड के कुल 41 बेड पर 53 मरीजों का इलाज चल रहा था। इसमें बुखार के 30, उल्टी के 8, दस्त के 3, पेट दर्द के 6, सांस से पीड़ित 3, पीलिया से पीड़ित एक मरीज भर्ती था। इसके अलावा खून की कमी के दो मरीज भी थे। जिंक सीरप ने होने से टैबलेट से काम चलाया जा रहा है। मरीजों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
डॉक्टर की सलाह
बाल एवं शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. इकबाल ने बताया कि मौसम में बदलाव हो रहा है। इस समय वायरस व बैक्टीरिया ग्रोथ करते हैं और संक्रमण होता है। बारिश के मौसम में इम्युनिटी कमजोर होने के कारण बच्चे संक्रमण की चपेट में आते हैं। इस समय फ्लू, रोटा, हेपेटाइटिस ए वायरस के इंफेक्शन से बच्चे बीमार हो रहे हैं। मरीजों की संख्या बढ़ी है। गैस्ट्रोइंटाइटिस से बच्चे संक्रमित हो रहे हैं। इन दिनों वायरल व बैक्टीरिया का इंफेक्शन बढ़ने से इम्युनिटी कम होने की वजह से बच्चे बीमारी की चपेट में आते हैं। भोजन में गड़बड़ी व दूषित पानी के सेवन से बीमार होते हैं। तेज बुखार, सर्दी, खांसी, जुकाम से पीड़ित होते हैं। साथ ही पीलिया से भी ग्रसित होते हैं। इस मौसम में वायरल फीबर के केस बढ़े हैं। डेंगू, चिकिगुनिया का भी खतरा रहता है। बच्चों को ताजा सुपाच्य व पौष्टिक भोजन का सेवन कराएं, हरी साग-सब्जी, मौसमी फल का सेवन कराएं, पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं, फास्ट व जंक फूड, कार्बोनेटेड पेय पदार्थ का सेवन न करें और सड़क किनारे खुले में बिकने वाले कटे फल व अन्य खाद्य सामग्री का सेवन न करें। साफ-सफाई पर ध्यान दें। जल भराव न होने दें, कूलर, गमला में पानी इकट्ठा न होने दें, सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। पूरी बांह का कपड़ा पहनें, नवजात बच्चे को सुबह और शाम बाहर लेकर न निकलें, छह माह तक बच्चों को मां का ही दूध पिलाएं, बच्चों को बोतल से दूध न पिलाएं।


