हिंदी से हजारीबाग की पहचान, देश-विदेश तक पहुंची यहां के रचनाकारों की कलम
हजारीबाग केवल एक प्रमुख शहर नहीं है, बल्कि यह हिंदी साहित्य की समृद्ध विरासत का गढ़ भी है। यहां रवींद्रनाथ टैगोर, फणीश्वरनाथ रेणु और विजय संदेश जैसे कई प्रसिद्ध साहित्यकारों ने योगदान दिया है। हाल ही में डॉ. भैया विवेक प्रियदर्शी ने नौ किताबें प्रकाशित की हैं और भारतीय साहित्य में स्त्रीवाद पर शोध किया है।

हजारीबाग। हजारीबाग की पहचान केवल झारखंड के एक प्रमुख शहर के रूप में नहीं, बल्कि साहित्य और सृजन की समृद्ध भूमि के रूप में भी रही है। यहां की धरती ने ऐसे अनेक रचनाकारों को जन्म और परिवेश दिया, जिनकी लेखनी ने हिंदी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। हजारीबाग की साहित्यिक विरासत का दायरा इससे भी बड़ा है। इसमें रवींद्रनाथ टैगोर, राहुल सांकृत्यायन, रामवृक्ष बेनीपुरी, फणीश्वरनाथ रेणु, नंददुलारे वाजपेयी, मृदुला गर्ग, डॉ राजेंद्र प्रसाद,फादर कामिल बुल्के जैसे नामचीन साहित्यकारों ने यहां की साहित्यिक भूमि को सींचा। इसके अलावा सुबोध घोष हजारीबाग के साहित्यकार रहे हैं। उनकी साहित्यिक रचना पर फिल्म भी बनी।
जिनमें सुजाता और बंदिनी उल्लेखनीय है। स्व भारत यायावर, रमणिका गुप्ता, रतन वर्मा, पंकज मित्रा सरीखे साहित्यकारों की कर्मभूमि हजारीबाग रही। हजारीबाग के विजय संदेश हिंदी के प्रति अपने लंबे जुड़ाव के लिए जाने जाते हैं। उनकी पुस्तक ‘रचनाधर्मिता : रंग और रेखाएं’ को दिल्ली के अनुज्ञा प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। उन्होंने ‘कामवाली बाई और अन्य कहानियां’, ‘मेरी यायावरी’ और ‘मेरे अनुभव’ जैसी कृतियां भी लिखी हैं। उनकी कई कहानियां अमेरिका से प्रकाशित होने वाली पत्रिका ‘सेतु’ में प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी रचनाधर्मिता पर अनिल सिंह और अनिल द्विवेदी ने संपादन किया है। विजय कुमार संदेश का कहना है कि हिंदी के प्रति उनका लगाव शुरू से रहा और इसी भाषा के माध्यम से उन्हें 14 देशों की यात्रा का अवसर मिला। विनोबा भावे विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग से जुड़े डॉ. सुबोध सिंह शिवगीत भी हजारीबाग की हिंदी साहित्यिक पहचान के महत्वपूर्ण नाम हैं। हजारीबाग की साहित्यिक परंपरा में शंभु बादल, डॉ. चंद्रेश्वर कर्ण, नागेश्वर लाल, डॉ. विकास कुमार, डॉ. प्रमिला गुप्ता अनेक रचनाकार सक्रिय रहे हैं।इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अधिवक्ता और शोधकर्ता डॉ. भैया विवेक प्रियदर्शी ने नौ पुस्तकें प्रकाशित की हैं। उन्हें जयशंकर प्रसाद साहित्य गौरव पुरस्कार भी मिला है। हिंदी दिवस के अवसर पर उन्होंने भारतीय साहित्य में स्त्रीवाद पर शोधग्रंथ तैयार किया है। चार विषयों में परास्नातक और पीएचडी की शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले डॉ. प्रियदर्शी की साहित्य और शोध में गहरी रुचि है। इन्होंने हिंदी, इतिहास, अंग्रेजी और लॉ पर पुस्तक लिखी है।


