स्कूलों में नॉट वाली टाई के स्थान पर दूसरे विकल्प तलाशे जाएंगे
हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पारंपरिक नॉट वाली टाई को हटाने की एडवाइजरी जारी की है। यह निर्णय भिवानी जिले में एक छात्र की टाई के चलते मृत्यु के बाद लिया गया है। आयोग ने सुरक्षित टाई अपनाने का सुझाव दिया है, जिससे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

गुरुग्राम, साक्षी रावत। प्रदेश के स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वर्दी (यूनिफॉर्म) में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एचएससीपीसीआर) ने पारंपरिक नॉट वाली टाई को हटाकर सुरक्षित विकल्प अपनाने की एडवाइजरी जारी की है। आयोग ने शिक्षा विभाग और हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड को पत्र भेजकर सभी सरकारी और निजी स्कूलों में इस व्यवस्था को लागू करने की सिफारिश की है। आदेश लागू होने के बाद इसका असर गुरुग्राम जिले के सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों सहित सीबीएसई तथा हरियाणा बोर्ड से संबद्ध उन सभी स्कूलों पर पड़ेगा, जहां यूनिफॉर्म में नॉट वाली टाई अनिवार्य है। आयोग की यह पहल दो जुलाई को भिवानी जिले के फूलपुरा गांव में हुए दर्दनाक हादसे के बाद सामने आई है। तीसरी कक्षा के सात वर्षीय छात्र हर्षित की घर में खेलते समय स्कूल की टाई गले में फंसने से मौत हो गई थी। बताया गया कि दीवार पर लगी खूंटी पर टंगी टाई पहनने के दौरान उसका पैर फिसल गया और टाई फंदा बन गई। इससे पहले भी प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में टाई के कारण बच्चों की जान जाने के मामले सामने आ चुके हैं। इन्हीं घटनाओं को देखते हुए आयोग ने सुरक्षा के लिहाज से यूनिफॉर्म में बदलाव की जरूरत बताई है。
सुरक्षा के लिए नई एडवाइजरी
आयोग ने अपनी एडवाइजरी में सुझाव दिया है कि पारंपरिक नॉट वाली टाई की जगह आई-कार्ड से जुड़ी या पहले से तैयार सुरक्षित टाई का इस्तेमाल किया जाए, ताकि किसी भी स्थिति में बच्चों के गले में फंदा बनने का खतरा न रहे। आयोग का मानना है कि इस तरह की दुर्घटनाएं सावधानी और सुरक्षित डिजाइन अपनाकर रोकी जा सकती हैं।
स्कूलों की प्रतिक्रिया
गुरुग्राम के कई निजी स्कूलों के संचालकों का कहना है कि यदि शिक्षा विभाग की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी होते हैं तो स्कूल नए नियम के अनुसार यूनिफॉर्म में बदलाव करेंगे। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और यदि टाई के डिजाइन में बदलाव से जोखिम कम होता है तो इसे लागू करने में कोई परेशानी नहीं होगी। वहीं सरकारी स्कूलों के शिक्षकों का भी कहना है कि विभागीय आदेश मिलने के बाद नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। जिले के शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल यूनिफॉर्म केवल अनुशासन का प्रतीक नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा के अनुरूप भी होनी चाहिए। बदलती परिस्थितियों में ऐसी सभी चीजों की समीक्षा जरूरी है, जिनसे बच्चों को अनजाने में खतरा हो सकता है।


