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देश हरियाणा-महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव रुझान: एक बार फिर चलती दिख रही है 'मोदी लहर', क्या बढ़ेगा खट्टर और फडणवीस का कद

नई दिल्ली, लाइव हिन्दुस्तान टीमPublished By: Arun
Thu, 24 Oct 2019 09:18 AM
 हरियाणा-महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव रुझान: एक बार फिर चलती दिख रही है 'मोदी लहर', क्या बढ़ेगा खट्टर और फडणवीस का कद

हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझानों में बीजेपी बहुमत के आंकड़ें को पार कर गई है। दोनों राज्यों के नतीजे से वहां के मुख्यमंत्रियों मनोहर लाल खट्टर और देवेंद्र फडणवीस का कद भी तय करेंगे। अगर दोनों राज्यों में पिछली बार से ज्यादा सीटें आईं तो मुख्यमंत्रियों का पार्टी में कद बढ़ेगा।

शुरुआती एक घंटे की मतगणना में महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना गठबंधन 147 सीटों पर आगे चल रही है तो कांग्रेस गठबंधन 57 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं हरियाणा में भाजपा 53 और कांग्रेस 22 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं अन्य आठ सीटों पर आगे चल रही है। 

दरअसल, 2014 के विधानसभा चुनाव में दोनों राज्यों में पार्टी ने कोई स्थानीय चेहरा तय किए बगैर ही चुनाव लड़ा था। मई में तब मोदी सरकार सत्ता में आई थी। भाजपा के पक्ष में तेज लहर चल रही थी, उसी मोमेंटम में करीब पांच महीने बाद ही अक्टूबर में दोनों राज्यों के विधानसभा चुनाव हुए और भाजपा ने लोकसभा चुनाव में जीत की लय बरकरार रखी।  हरियाणा में 47 सीटें जीतकर पार्टी ने अपने दम पर सरकार बनाई थी तो महाराष्ट्र में सर्वाधिक 122 सीटें जीतने के बाद भी बहुमत से दूर रहने पर शिवसेना के साथ गठबंधन कर सरकार बनाना पड़ा था। 

भाजपा ने दोनों राज्यों का विधानसभा चुनाव तब प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे पर लड़ा था। नतीजे घोषित होने के बाद पार्टी ने हरियाणा में गैर जाट मनोहर लाल खट्टर और महाराष्ट्र में गैर मराठा ब्राह्मण चेहरे फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाकर सबको चौंका दिया था। मगर इस बार पार्टी ने हरियाणा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों के चेहरे को ही आगे कर चुनाव लड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह राज्यों की हर चुनावी रैली में मुख्यमंत्रियों का गुणगान करते रहे। 

भाजपा से जुड़े सूत्र बताते हैं कि अगर हरियाणा में पार्टी की इस बार 47 से ज्यादा सीटें आईं और महाराष्ट्र में पिछली बार की 122 से ज्यादा सीटें आईं तो तब तो माना जाएगा कि दोनों चेहरे चुनाव में चल गए और अगर इससे कम सीटें आईं तो माना जाएगा कि पार्टी की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरे नहीं उतरे। वहीं पार्टी के अंदर मौजूद दोनों मुख्यमंत्रियों का विरोधी धड़ा भी नेतृत्व को लेकर सवाल खड़े कर सकता है। 

 

 

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