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तीन विधायकों के साथ छोड़ने से अल्पमत में हरियाणा की भाजपा सरकार, कितना बड़ा संकट

मंगलवार को देर शाम तक इन तीनों विधायकों ने विधानसभा स्पीकर को भाजपा सरकार से समर्थन वापस लेने का अपना लिखित पत्र नहीं दिया है, लेकिन इससे पूरे प्रदेश में राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

तीन विधायकों के साथ छोड़ने से अल्पमत में हरियाणा की भाजपा सरकार, कितना बड़ा संकट
Niteesh Kumarमोनी देवी, लाइव हिन्दुस्तान,चंडीगढ़Tue, 07 May 2024 08:10 PM
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हरियाणा में लोकसभा चुनाव से पहले बड़े घटनाक्रम में 3 निर्दलीय विधायकों रणधीर गोलन, सोमबीर सांगवान और धर्मपाल गोंदर ने नायब सैनी सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा कर दी। इसके चलते नायब सरकार अल्पमत में आ गई है, लेकिन सरकार को अभी कोई खतरा नहीं है। तीनों विधायकों ने मंगलवार शाम को रोहतक में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा से मुलाकात करने के बाद कांग्रेस को समर्थन देने की घोषणा कर दी। हालांकि बादशाहपुर के निर्दलीय विधायक राकेश दौलताबाद के भी इन विधायकों के साथ आने का दावा किया गया था, लेकिन शाम को दौलताबाद नहीं आए।

देर शाम तक इन तीनों विधायकों ने विधानसभा स्पीकर को भाजपा सरकार से समर्थन वापस लेने का अपना लिखित पत्र नहीं दिया है, लेकिन पूरे प्रदेश में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। देखा जाए तो विधानसभा में विधायकों की संख्या के हिसार से गणित गड़बड़ा गया है। सरकार अल्पमत में आ गई है, लेकिन संवैधानिक तौर पर सरकार को अगले चार माह तक किसी तरह का खतरा नहीं है। हरियाणा की 90 सदस्यीय विधानसभा में रानियां के निर्दलीय विधायक रणजीत चौटाला और करनाल के भाजपा विधायक मनोहर लाल विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफे दे चुके हैं। मनोहर लाल करनाल लोकसभा सीट से और रणजीत चौटाला हिसार लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। इस तरह 88 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए अब 45 विधायकों की जरूरत है।

राष्ट्रपति शासन लागू होना चाहिए: हुड्डा
नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि जनभावना को ध्यान में रखकर सही समय पर लिया गया सही फैसला रंग जरूर लाएगा। आज जनता ही नहीं, बीजेपी को वोट देने वाले और समर्थन देने वाले लोग भी सरकार की नीतियों से दुखी हैं। जजपा और निर्दलीय विधायकों के समर्थन वापसी के बाद अब बीजेपी सरकार अल्पमत में आ चुकी है। इसलिए हरियाणा में तुरंत राष्ट्रपति शासन लागू करके विधानसभा चुनाव करवाए जाने चाहिए। 

गिर गया था कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव 
पूर्व मुख्मयंत्री मनोहर लाल की जगह जब नायब सिंह सैनी हरियाणा के मुख्यमंत्री बने थे, तब 22 फरवरी 2024 को भाजपा सरकार के विरुद्ध कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई थी। उस समय निर्दलीय विधायकों के सहयोग और समर्थन के चलते भाजपा बहुमत साबित करने में कामयाब हो गई थी। जजपा के कुछ विधायकों ने भी भाजपा सरकार को अपना समर्थन दिया था, जिस कारण भाजपा व जजपा का गठबंधन टूटने के बावजूद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार को कोई खतरा नहीं पहुंचा था। संवैधानिक दृष्टि से 22 फरवरी के बाद से अगले छह माह तक नायब सिंह सैनी की सरकार के विरुद्ध कोई अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता। इस हिसाब से अल्पमत में होने के बावजूद सरकार को 22 अगस्त तक किसी तरह का खतरा नहीं है। हरियाणा में सितंबर-अक्टूबर में विधानसभा चुनाव होने हैं तो ऐसे में सरकार अगस्त में भी विधानसभा भंग कर चुनाव कराने की घोषणा कर सकती है।

जजपा के 5 विधायक भाजपा के साथ 
कांग्रेस सरकार के विरुद्ध किसी तरह का अविश्वास प्रस्ताव लेकर आती है तो जननायक जनता पार्टी के 10 विधायकों में से 5 भाजपा के साथ हैं और 2 का कांग्रेस के प्रति झुकाव दिखाई दे रहा है। ऐसे में 88 सदस्यीय विधानसभा में 45 विधायकों के समर्थन का आंकड़ा भाजपा विधानसभा में आसानी से पेश कर सकती है। 3 निर्दलीय विधायकों के समर्थन वापस लेने के बाद फिलहाल भाजपा के 40 विधायकों के साथ दो निर्दलीय नयनपाल रावत और राकेश दौलताबाद व एक हलोपा विधायक गोपाल कांडा का समर्थन रह गया है, जो बहुमत के आंकड़े से 2 विधायक कम है। महम के निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू पहले दिन से सरकार के विरुद्ध चल रहे हैं।

जजपा के 7 विधायक अपनी पार्टी से नाखुश
हरियाणा विधानसभा में जजपा के 10 विधायकों में से 7 अपनी पार्टी से असंतुष्ट हैं। पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला, पूर्व राज्य मंत्री अनूप धानक और बाढ़डा की विधायक नैना चौटाला को छोड़कर बाकी सात विधायक अपनी अलग राह पर हैं। जजपा विधायक देवेंद्र बबली कभी भी भाजपा का दामन थाम सकते हैं। गुहला चीका के विधायक ईश्वर सिंह और शाहबाद के विधायक रामकरण काला के परिजन कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। नारनौंद के जजपा विधायक रामकुमार गौतम, नरवाना के विधायक रामनिवास सुरजाखेड़ा, बरवाला के विधायक जोगी राम सिहाग और जुलाना के विधायक अमरजीत ढांडा का भाजपा के प्रति प्रेम किसी से छिपा नहीं है। अमरजीत ढांडा की स्थिति स्पष्ट नहीं है।

हरियाणा विधानसभा के सदस्यों की संख्या- 
विधायकों की संख्या - 88
भाजपा - 40
कांग्रेस - 30
जजपा - 10
निर्दलीय - 6
हलोपा - 1
इनैलो - 1