हरेला पर्व प्रकृति संरक्षण का जनआंदोलन बने : शैलेंद्र
पंतनगर में घोषित 'हरेला उत्सव' केवल एक लोकपर्व नहीं, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी है। संघ प्रचारक डॉ. शैलेंद्र ने इस कार्यक्रम में पौधरोपण, जल संरक्षण और प्लास्टिक मुक्ति पर जोर दिया। उन्होंने चिपको आंदोलन के नायकों का स्मरण करते हुए सभी को कम से कम तीन पौधे लगाने का आह्वान किया।
पंतनगर, संवाददाता। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तराखंड प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेंद्र ने कहा कि हरेला केवल एक लोकपर्व नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति का संदेश देने वाला जनआंदोलन है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और संरक्षण की भावना को जन-जन तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित 'हरित यज्ञ' कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा 50 हजार पौधे लगाने का संकल्प तभी सार्थक होगा, जब उनके संरक्षण की भी समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चिपको आंदोलन की प्रेरणास्रोत गौरा देवी, पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट, सच्चिदानंद भारती और अमृता देवी बिश्नोई के योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि प्रकृति संरक्षण की यह विरासत आज भी समाज को प्रेरित कर रही है।
उन्होंने सभी से अपने जीवन में कम से कम तीन पौधे लगाकर उनका संरक्षण करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। डॉ. शैलेंद्र ने कहा कि पर्यावरण बचाने के लिए पेड़, पानी और प्लास्टिक इन तीनों विषयों पर एक साथ काम करना होगा। जल संरक्षण, पौधरोपण और प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाकर ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि पंतनगर विश्वविद्यालय इस दिशा में उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल बनेगा।


