Hardik Patel sent to judicial custody till 24th January in 2015 Sedition Case - 2015 राजद्रोह केस: हार्दिक पटेल 24 जनवरी तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजे गए DA Image
21 फरवरी, 2020|11:55|IST

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2015 राजद्रोह केस: हार्दिक पटेल 24 जनवरी तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजे गए

hardik patel sent to judicial custody in ahmedabad   ani twitter 18 jan  2020

कांग्रेस नेता हार्दिक पटेल को राजद्रोह के एक मामले में 24 जनवरी तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इससे पहले गुजरात में अहमदाबाद की एक अदालत से राजद्रोह के एक मामले में गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद कांग्रेस में शामिल हो चुके पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति (पास) के पूर्व संयोजक हार्दिक पटेल को पुलिस ने शनिवार (18 जनवरी) को गिरफ्तार कर लिया।

सहायक पुलिस आयुक्त राजदीप झाला ने बताया, "हार्दिक को अहमदाबाद जिले के वीरमगाम तालुका, जो उनका गृह क्षेत्र भी हैं, के हांसलपुर चौराहे के पास से पकड़ा गया। उन्हें आज रात क्राइम ब्रांच की लॉक अप में रखा जाएगा और 19 जनवरी को छुट्टी का दिन होने के कारण जज के आवास पर पेश किया जाएगा।" उल्लेखनीय है कि अदालत ने सुनवाई के दौरान बार-बार अनुपस्थिति के कारण वारंट जारी किया था।

क्या है मामला
यह मामला 25 अगस्त 2015 को अहमदाबाद के जीएमडीसी मैदान में हुई विशाल पाटीदार आरक्षण समर्थक रैली के बाद हुए राज्यव्यापी तोड़फोड़ और हिंसा को लेकर यहां क्राइम ब्रांच ने उसी साल अक्टूबर में दर्ज किया था। इसमें कई सरकारी बसें, पुलिस चौकियां और अन्य सरकारी संपत्ति में आगजनी की गई थी तथा इस दौरान एक पुलिसकर्मी समेत लगभग दर्जन भर लोग मारे गए थे जिनमें कई पुलिस फायरिंग के चलते मरे थे। पुलिस ने आरोप पत्र में हार्दिक और उनके सहयोगियों पर चुनी हुई सरकार को गिराने के लिए हिंसा फैलाने का षडयंत्र करने का आरोप लगाया था।

अतिरिक्त जिला न्यायाधीश बी जे गणात्रा की अदालत ने हार्दिक के खिलाफ वारंट जारी करने के बाद मामले की सुनवाई की अगली तिथि 24 जनवरी तय कर दी। सरकारी वकील सुधीर ब्रह्मभट्ट ने बताया कि उन्होंने अदालत में दलील दी थी कि हार्दिक को हालंकि इस मामले में हाई कोर्ट ने इस शर्त पर जमानत दी थी कि वह मामले की सुनवाई में सहयोग करेंगे पर वह ऐसा नहीं कर रहे। वह किसी न किसी बहाने से अनुपस्थित रहते हैं। ब्रह्मभट्ट ने कहा कि अब हार्दिक की जमानत भी रद्द हो सकती है। अदालत चाहे तो पेशी के बाद वारंट रद्द भी कर सकती है।

मामले के दो अन्य आरोपी दिनेश बांभणिया और चिराग पटेल शनिवार को अदालत में उपस्थित रहे। गौरतलब है कि हार्दिक के खिलाफ सूरत में राजद्रोह का एक अन्य मामला भी दर्ज है। उस मामले में उन्हें हाई कोर्ट से जमानत मिली हुई है। वह दोनो मामलों में लगभग नौ महीने तक जेल में रहे थे और रिहाई के बाद जमानत की शर्त के अनुरूप छह माह तक गुजरात के बाहर भी रहे थे।

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