स्वदेशी तकनीकी से बनाए आर्टिफिशियल कान, जंगल में रोकेंगे तस्करों की घुसपैठ
हल्द्वानी, मुख्य संवाददाता। वन संरक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते
हल्द्वानी, मुख्य संवाददाता। वन संरक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए हल्द्वानी वन प्रभाग ने उत्तराखंड में पहली कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित ‘फॉरेस्ट अकॉस्टिक सर्विलांस सिस्टम’ का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। यह स्वदेशी तकनीक रियल-टाइम में अवैध पेड़ कटान, शिकार और संदिग्ध मानवीय गतिविधियों को पकड़ने के साथ-साथ वन्यजीवों की ध्वनियों की भी निगरानी करेगी।
नवीनतम तकनीक
यह अत्याधुनिक प्रणाली एआई, एज कम्प्यूटिंग, ध्वनिक सेंसर और आधारित लंबी दूरी की वायरलेस संचार तकनीक पर काम करती है। यह सौर ऊर्जा संचालित बैटरियों से लैस है, जिससे यह बिना मोबाइल नेटवर्क और बिजली ग्रिड के भी दुर्गम जंगलों में 24 घंटे निर्बाध कार्य कर सकती है। पारंपरिक गश्त की तुलना में यह प्रणाली जंगल में एक डिजिटल कान की तरह काम करती है। इसमें लगे एआई सेंसर चेनसॉ, कुल्हाड़ी, गोलीबारी, वाहनों की आवाज और मानव घुसपैठ की पहचान करने के लिए प्रशिक्षित हैं। कोई भी संदिग्ध ध्वनि सुनते ही यह प्रणाली तुरंत वन नियंत्रण कक्ष को अलर्ट भेज देगी, जिससे वनकर्मी फौरन मौके पर कार्रवाई कर सकेंगे।
पर्यावरण सुरक्षा में योगदान
इस नई तकनीक से अवैध कटान और शिकार पर अंकुश लगाने के अलावा यह तकनीक जैव विविधता निगरानी में भी मील का पत्थर साबित होगी। वहीं एआई के माध्यम से वन्यजीवों की ध्वनियों का स्वतः विश्लेषण कर उनकी उपस्थिति, आवागमन और व्यवहार का निरंतर अध्ययन किया जा सकेगा, जो दीर्घकालिक संरक्षण योजनाओं में बेहद उपयोगी रहेगा। - कुंदन कुमार, डीएफओ, हल्द्वानी वन प्रभाग


