एच-1बी वीजा: अमेरिकियों से औसतन दो तिहाई ज्यादा कमा रहे भारतीय: रिपोर्ट
इकोनॉमिक इनोवेशन ग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार, एच-1बी वीजा धारक भारतीयों की औसत आय सालाना 1.46 लाख डॉलर है, जो कि अमेरिका में जन्मे स्नातकों से दो तिहाई अधिक है। 22-23 साल के एच-1बी कर्मचारी भी अपने साथियों की तुलना में 20% अधिक कमाते हैं। रिपोर्ट ने एच-1बी वीजा प्रोग्राम के मध्य हाल की चर्चा को संबोधित किया है।

इकोनॉमिक इनोवेशन ग्रुप के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट एच-1बी वीजा का सबसे ज्यादा फायदा भारतीयों को
वाशिंगटन, एजेंसी। अमेरिका में काम करने वाले भारतीय नागरिकों को वहीं जन्म लिए स्नातक की तुलना में औसतन काफी अधिक सैलरी मिलती है।
स्टूडेंटईबी5 रिपोर्ट
इकोनॉमिक इनोवेशन ग्रुप (ईआईजी) के आंकड़ों के आधार पर स्टूडेंटईबी5 द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, एच-1बी वीजा धारक भारतीयों की औसत आय सालाना 1.46 लाख डॉलर है जो वहीें जन्मे अमेरिकी स्नातक छात्रों की औसत कमाई से दो तिहाई से अधिक है।
फ्रेशर्स की कमाई 20 फीसदी अधिक
रिपोर्ट के अनुसार 22-23 साल की उम्र के एच-1बी कर्मचारी, जो तुरंत कॉलेज से निकले हैं, वे अमेरिका में जन्मे अपने साथियों की तुलना में 20% से ज्यादा कमाते हैं। जो लोग स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका आए, वे भी अमेरिका में जन्मे अपने साथियों से अधिक कमाते हैं।
जो लोग 20 से 30 साल की उम्र के बीच ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग या ग्रेजुएट डिग्री पूरी करते हैं, वे अधिक कमाते हैं और वेतन में अंतर 34 साल की उम्र के आसपास ही दिखता है। हालांकि 21 से 33 साल के लोग कुल वर्कफोर्स का एक छोटा हिस्सा हैं, लेकिन प्रोग्राम के डिजाइन की वजह से एच-1बी होल्डर कम उम्र के होते हैं।
एच-1बी वीजा चर्चा का केंद्र
एच-1बी प्रोग्राम इमिग्रेशन, वेतन और कुशल कर्मचारियों के बारे में चल रही चर्चा का मुख्य केंद्र है। आंकड़े बताते हैं कि स्थिति दोनों पक्षों द्वारा आमतौर पर बताए जाने की तुलना में अधिक जटिल है,क्योंकि भारतीय कर्मचारियों की सैलरी देश में सबसे ज्यादा बताई जाती है। अमेरिकी श्रम विभाग के एक प्रतिनिधि के अनुसार, विभाग अमेरिकी श्रमिकों के लिए वेतन और रोजगार के अवसरों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
आलोचकों का कहना है कि कुछ कंपनियां इस प्रोग्राम का इस्तेमाल विदेशी कर्मचारियों को कम वेतन पर काम पर रखने के लिए करते हैं, जबकि समर्थकों का तर्क है कि यह हेल्थकेयर, इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी जैसे हाई-स्किल वाले क्षेत्र में कर्मचारियों की कमी को दूर करने में अहम भूमिका निभाता है। एच-1बी वीजा प्रोग्राम हर साल 85,000 नए वीजा तक सीमित है। वेतन के स्तर और रोजगार के तरीकों पर इसके असर को लेकर कानून बनाने वालों की ओर से इसकी लगातार जांच-पड़ताल हो रही है।
बड़ी संख्या में भारतीय काम कर रहे
रिपोर्ट में कहा गया है कि वेतन में अंतर की चिंताओं के बावजूद, बड़ी संख्या में विदेशी कर्मचारी, खासकर भारत से आए लोग, क्नोलॉजी और इंजीनियरिंग जैसे अधिक वेतन वाले क्षेत्र में काम करते हैं, जिससे उनकी कुल कमाई ज्यादा होती है। रिपोर्ट के अनुसार, औसतन, एच-1बी लॉटरी जीतने वाले लोग उसी काम में लगे अमेरिकी कर्मचारियों की तुलना में 5.1 प्रतिशत कम कमाते हैं। ज्यादातर वीजा होल्डर्स को अमेरिका में जन्मे अपने साथियों की तुलना में अधिक वेतन मिलता है।
ट्रंप प्रशासन के दावों में सच्चाई नहीं
इकोनॉमिक इनोवेशन ग्रुप (ईआईजी) के आंकड़े यह भी बताते हैं कि एच-1बी वीजा वाले भारतीय नागरिकों की सैलरी के बारे में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दावों में सच्चाई नहीं है। ट्रंप प्रशासन ने कहा था कि सस्ते भारतीय कर्मचारी अमेरिकी कर्मियों की जगह ले रहे हैं।
डाटा से यह भी पता चला कि असल में अमेरिकी कंपनियों में भारतीय कर्मचारियों की सैलरी सबसे अधिक है। विश्लेषण में यह बात सामने आई कि अधिक उम्र वाले एच-1बी कर्मचारी, वही काम करनेवाले स्थानीय कर्मचारियों की तुलना में कम कमाते हैं, जबकि कम उम्र वाले एच-1बी कर्मचारी अधिक कमाते हैं।


