अच्छी खबर: गुरुग्राम यूनिवर्सिटी के नए परिसर में गूंजेगी रंगमंच की आवाज
पहली बार शुरू हुआ एम-थिएटर, नए परिसर में अत्याधुनिक थिएटर बनाने की भी तैयारी अच्छी खबर: गुरुग्राम यूनिवर्सिटी के नए परिसर में गूंजेगी रंगमंच की आवाज

गुरुग्राम, साक्षी रावत। अब तक कॉरपोरेट हब और तकनीकी शहर के रूप में पहचाने जाने वाले गुरुग्राम में आने वाले वर्षों में रंगमंच की भी अपनी एक अलग दुनिया होगी। शहर की एकमात्र सरकारी यूनिवर्सिटी, गुरुग्राम यूनिवर्सिटी ने पहली बार एम-थिएटर पाठ्यक्रम की शुरुआत की है। इसके साथ ही कंकरौला स्थित नए परिसर में अत्याधुनिक थिएटर विकसित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। आने वाले समय में गुरुग्राम यूनिवर्सिटी की पहचान कला और संस्कृति के क्षेत्र में भी बनती दिखाई दे सकती है। एकमात्र सरकारी यूनिवर्सिटी ने रंगमंच के क्षेत्र में एक ऐसी पहल की है, जो न केवल स्थानीय युवाओं को नया अवसर देगी, बल्कि गुरुग्राम के सांस्कृतिक परिदृश्य को भी बदल सकती है। गुरुग्राम यूनिवर्सिटी ने पहली बार एम-थिएटर पाठ्यक्रम शुरू किया है और इसके साथ ही कंकरौला स्थित नए परिसर में एक अत्याधुनिक थिएटर विकसित करने की योजना भी तैयार की जा रही है। यदि यह योजना आकार लेती है, तो आने वाले वर्षों में इसी मंच से गुरुग्राम के युवा अभिनेता, निर्देशक और मंच संचालक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते नजर आएंगे।
अब नहीं जाना होगा दूसरे शहर:
अब तक गुरुग्राम और आसपास के जिलों के विद्यार्थियों के पास थिएटर की पढ़ाई के लिए सीमित विकल्प थे। अभिनय और रंगमंच में करियर बनाने का सपना देखने वाले युवाओं को दिल्ली, चंडीगढ़ और अन्य बड़े शहरों की यूनिवर्सिटियों का रुख करना पड़ता था। कई प्रतिभाएं केवल संसाधनों और अवसरों के अभाव में आगे नहीं बढ़ पाती थीं। ऐसे में गुरुग्राम यूनिवर्सिटी की यह पहल स्थानीय विद्यार्थियों के लिए किसी बड़ी सौगात से कम नहीं मानी जा रही है।
नए परिसर में तैयार होगा रंगमंच का केंद्र:
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, कंकरौला स्थित नए परिसर को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जा रहा है। इसी कड़ी में समर्पित थिएटर बनाने की योजना पर भी विचार चल रहा है। प्रस्तावित थिएटर में आधुनिक मंच, डिजिटल साउंड सिस्टम, प्रोफेशनल लाइटिंग, रिहर्सल हॉल, बैकस्टेज सुविधाएं और दर्शकों के बैठने के लिए व्यवस्थित ऑडिटोरियम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का खाका तैयार किया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों को केवल कक्षा तक सीमित शिक्षा नहीं मिलेगी, बल्कि उन्हें वास्तविक मंचीय अनुभव भी प्राप्त होगा।
अभिनय से लेकर निर्देशन तक मिलेगा प्रशिक्षण:
एम-थिएटर पाठ्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को अभिनय, निर्देशन, स्क्रिप्ट लेखन, मंच संचालन, थिएटर प्रोडक्शन और मंचीय तकनीकों की बारीकियां सिखाई जाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आज के समय में मनोरंजन और डिजिटल मीडिया का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में प्रशिक्षित कलाकारों की मांग भी बढ़ी है। यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों के लिए फिल्म, टेलीविजन, ओटीटी मंचों और सांस्कृतिक संस्थानों में रोजगार के नए अवसर तैयार कर सकता है।
गुरुग्राम की सांस्कृतिक पहचान को मिलेगा नया आयाम:
पिछले कुछ वर्षों में गुरुग्राम में साहित्यिक आयोजनों, नुक्कड़ नाटकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की संख्या में वृद्धि हुई है। विभिन्न सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाएं समय-समय पर मंचीय प्रस्तुतियों का आयोजन करती रही हैं, लेकिन शहर में ऐसा कोई सरकारी संस्थान नहीं था, जहां रंगमंच की उच्च शिक्षा और प्रशिक्षण दोनों उपलब्ध हों। ऐसे में विश्वविद्यालय का यह कदम गुरुग्राम को सांस्कृतिक रूप से भी मजबूत बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
युवाओं के सपनों को मिलेगा मंच:
गुरुग्राम यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. संजय कौशिक ने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित नहीं रखना चाहता। उन्होंने कहा, एम-थिएटर की शुरुआत हमारे लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। नए परिसर में थिएटर विकसित करने की योजना भी इसी सोच का हिस्सा है। हमारा प्रयास है कि विद्यार्थियों को ऐसा वातावरण मिले, जहां वे अपनी रचनात्मकता को निखार सकें और उसे अपने करियर में बदल सकें। शिक्षाविदों का मानना है कि यदि विश्वविद्यालय की यह योजना साकार होती है, तो आने वाले वर्षों में गुरुग्राम केवल रोजगार और उद्योग के लिए ही नहीं, बल्कि कला और संस्कृति के केंद्र के रूप में भी जाना जाएगा। कंकरौला परिसर में बनने वाला यह थिएटर न केवल विद्यार्थियों के लिए प्रशिक्षण का केंद्र होगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के नाट्य और सांस्कृतिक आयोजनों की मेजबानी भी कर सकेगा।


