सीमा पर तैनात जवानों की कलाइयों पर सजेगा गुरुग्राम की बेटियों का प्यार
विभिन्न स्कूलों की छात्राओं ने हाथों से तैयार की राखियां सीमा पर तैनात जवानों की कलाइयों पर सजेगा गुरुग्राम की बेटियों का प्यार

गुरुग्राम, साक्षी रावत। रक्षाबंधन पर जब घर-घर भाई की कलाई पर बहन का प्यार सजेगा, उसी दिन गुरुग्राम के स्कूलों में पढ़ने वाली बेटियों की बनाई राखियां देश की सीमाओं पर तैनात जवानों की कलाइयों पर भी बंधेंगी। शहर के अलग-अलग स्कूलों के विद्यार्थियों ने अपने हाथों से 8 हजार से अधिक राखियां तैयार की हैं। इन राखियों के साथ बच्चों ने जवानों के लिए शुभकामना संदेश, चिट्ठियां और हस्तनिर्मित कार्ड भी तैयार किए हैं। प्योर हार्ट्स संस्था की ओर से इन राखियों को एकत्र कर कश्मीर में तैनात भारतीय जवानों तक भेजा जा रहा है। इस पहल में बच्चों ने राखी को महज त्योहार की रस्म न मानकर देश के उन सैनिकों के प्रति अपना आभार व्यक्त करने का माध्यम बनाया है, जो अपने परिवारों से दूर रहकर देश की सीमाओं की सुरक्षा में तैनात हैं। रंग-बिरंगे धागों, मोतियों, सजावटी सामग्री और तिरंगे की थीम से तैयार की गई राखियों में बच्चों ने अपनी कल्पना के साथ भावनाओं को भी पिरोया है。
रक्षाबंधन का महत्व
प्योर हार्ट्स की संचालिका शालू जौहर साहनी ने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार है, लेकिन देश के जवान भी पूरे देश के भाई हैं। उन्होंने कहा हम चाहते हैं कि सीमा पर तैनात हमारे जवान जब गुरुग्राम के बच्चों की बनाई राखी अपनी कलाई पर बांधें तो उन्हें यह महसूस हो कि वे अपने परिवारों से दूर जरूर हैं, लेकिन पूरा समाज और हमारे बच्चे उनके साथ खड़े हैं। इन राखियों में केवल धागे और रंग नहीं हैं, बल्कि बच्चों का प्यार, सम्मान, शुभकामनाएं और देश के रक्षकों के प्रति कृतज्ञता जुड़ी है। इस अभियान में सेक्टर-50 स्थित हमारा गुरुकुल्स के बस्ती लर्निंग सेंटर, सामसपुर राजकीय विद्यालय सेक्टर-51, द श्री राम स्कूल मौलसरी, द श्री राम स्कूल अरावली, द श्री राम स्कूल वसंत विहार, स्कॉटिश हाई इंटरनेशनल स्कूल, द हेरिटेज इंटरनेशनल एक्सपीरिएंशियल लर्निंग स्कूल और शिवनादर स्कूल गुरुग्राम के विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यार्थियों ने राखियों के साथ जवानों के लिए अपने हाथों से कार्ड और भावनात्मक संदेश भी तैयार किए हैं।
सामाजिक responsabilidad
इस अभियान की खास बात यह रही कि बच्चों ने बाजार से तैयार राखियां खरीदने के बजाय स्वयं राखियां तैयार कीं। कई विद्यार्थियों ने अपने साथियों के साथ बैठकर राखियां बनाईं और उनमें अलग-अलग रंगों व सजावटी सामग्री का इस्तेमाल किया। बच्चों के लिए यह गतिविधि रक्षाबंधन की तैयारी के साथ-साथ देश के सैनिकों के जीवन और उनके त्याग को समझने का अवसर भी बनी। प्योर हार्ट्स लंबे समय से गुरुग्राम के बच्चों और स्कूलों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने वाली पहल करता रहा है। संस्था की ओर से पहले भी रक्षाबंधन के अवसर पर स्कूली बच्चों के माध्यम से सैनिकों के लिए राखियां, कार्ड और संदेश भेजे जा चुके हैं।
बच्चों की भावनाएं
संस्था ने बताया कि बच्चों का उत्साह इस बात का प्रमाण है कि छोटी-सी पहल भी समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत कर सकती है। संस्था का प्रयास है कि बच्चों को केवल किताबों तक सीमित न रखते हुए उन्हें ऐसे कार्यों से जोड़ा जाए, जिनसे उनमें समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित हो।
राखी के साथ पहुंचेंगे बच्चों के हाथ से लिखे संदेश
जवानों के लिए भेजे जा रहे पैकेटों में राखियों के साथ बच्चों द्वारा बनाए गए हस्तनिर्मित कार्ड और संदेश भी शामिल किए जा रहे हैं। किसी बच्चे ने जवानों को सुरक्षित रहने की शुभकामना दी है तो किसी ने उन्हें अपना 'देश का भाई' बताते हुए रक्षाबंधन की बधाई दी है। बच्चों की इन भावनाओं का सबसे खास पहलू यह है कि इनमें औपचारिकता से ज्यादा मासूमियत और अपनापन दिखाई देता है।
गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित होते शहर में स्कूलों के बच्चों की यह पहल यह संदेश भी देती है कि सामाजिक जिम्मेदारी केवल बड़े अभियानों से नहीं, बल्कि बच्चों के छोटे-छोटे प्रयासों से भी मजबूत होती है। इस बार गुरुग्राम की बेटियों के हाथों से निकला राखी का यह धागा घर की चौखट से हजारों किलोमीटर दूर सीमा पर पहुंचकर जवानों को अपनेपन का अहसास कराएगा।


