ई-वे बिल में प्रस्तावित बदलाव टाले
नई दिल्ली, जीएसटीएन ने उद्योग के सुझावों के आधार पर ई-वे बिल प्रणाली में दो प्रस्तावित बदलावों को लागू करने पर रोक लगा दी है। ये बदलाव एक अगस्त, 2026 से लागू होने वाले थे, जिसमें 'बिल-टू-शिप-टू' और 'स्वैच्छिक समापन' सुविधाओं का समावेश था। ये संशोधन वस्तुओं की पहचान और आवाजाही को बेहतर बनाने के लिए थे।

नई दिल्ली, एजेंसी। माल एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) ने ई-वे बिल प्रणाली में प्रस्तावित दो बदलाव के अमल पर फिलहाल रोक लगा दी है। उद्योग जगत से मिले सुझावों और आपत्तियों के बाद यह कदम उठाया गया है। इन बदलावों को एक अगस्त, 2026 से लागू किया जाना था। इनमें पहला बदलाव 'बिल-टू–शिप-टू' यानी बिल किसके नाम पर बनेगा माल किसे या किस स्थान पर भेजा जाएगा लेनदेन में माल प्राप्त करने वाले का जीएसटीआईएन (शिप टू जीएसटीआईएन) दर्ज करना अनिवार्य करना था। इसका मकसद वस्तुओं के वास्तविक प्राप्तकर्ता की पहचान बेहतर ढंग से करने और माल की आवाजाही का पता लगाने की व्यवस्था को मजबूत करना है।दूसरा
बदलाव 'स्वैच्छिक समापन' सुविधा शुरू करना था। इसके तहत करदाता उन परिस्थितियों में सक्रिय ई-वे बिल बंद कर सकते थे, जब अंततः माल की ढुलाई नहीं हो पाती। इन बदलावों के साथ ईआरपी (एंटरप्राइज रिर्सोस प्लानिंग) और ई-इनवॉयस एकीकरण के लिए 'एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस' (एपीआई) में भी संशोधन प्रस्तावित थे।जीएसटीएन ने कहा कि नौ जून और 17 जून को जारी उसके परामर्श अगली सूचना तक स्थगित कर दिए गए हैं। परामर्श में इन बदलावों को एक अगस्त, 2026 से लागू करने का प्रस्ताव था।


