देश के मध्यम वर्ग की पहली पंसद बना एसी-3, भीड़ व भीषण गर्मी ने बदला ट्रेंड
भारतीय रेल की मेल एक्सप्रेस में एसी कोच यात्रा के लिए मध्यम वर्ग की पसंद बन गए हैं। एसी-3 के कोचों की संख्या में एक दशक में 163 फीसदी वृद्धि हुई है। सस्ती और आरामदायक यात्रा की चाहत में यात्री स्लीपर क्लास की बजाए एसी-3 की ओर बढ़ रहे हैं।

भारतीय रेल की मेल एक्सप्रेस ट्रेन के थर्ड- एसी कोच में सफर मध्यम वर्ग की पहली पसंद बन गया है। बढ़ती प्रति व्यक्ति आय, जलवायु परिवर्तन के कारण भीषण गर्मी और धूल से मुक्ति पाने के लिए यात्री स्लीपर क्लास छोड़कर एसी कोच की ओर रुख कर रहे हैं। रेल मंत्रालय के 10 साल के वार्षिक सांख्यिकी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2012 में ट्रेनों में एसी-3 की कुल सीटें 2.7 लाख थीं। वर्ष 2022-23 तक बढ़कर 7.2 लाख से अधिक हो गईं। रेलवे के आंकड़ों के अनुसार बदलते ट्रेंड का नतीजा है कि बीते एक दशक में एसी-3 के बेड़े में 163 फीसदी का उछाल दर्ज हुआ है। रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रति व्यक्ति आय और क्रय शक्ति में वृद्धि के चलते मध्यम वर्ग किफायती और वातानुकुलित यात्रा के लिए अधिक पैसा खर्च करने को तैयार हैं। बदलते मौसम, भीषण गर्मी, धूल और भीड़भाड़ से मुक्ति के लिए यात्री स्लीपर के 500 रुपये के मुकाबले एसी-3 का 1300-1400 का किराया (2.6 से 2.8 गुना अधिक) देना अधिक सुविधाजनक मान रहे हैं。
लंबी दूरी के ट्रेन में हिस्सेदारी बढ़ी
आंकड़ों के अनुसार लंबी दूरी की ट्रेन में सफर करने वाले कुल यात्रियों में एसी-3 की हिस्सेदारी 1.5 प्रतिशत से बढ़कर 7.6 से 8 फीसदी के पार हो गई है। वर्ष 2012 में रेलवे को कुल यात्री कमाई का मात्र 17 प्रतिशत हिस्सा एसी-3 से मिलता था, जो 2022-23 तक बढ़कर गैर-उपनगरीय यात्री राजस्व का 32.3 फीसदी हो गया। इसी तरह स्लीपर और सेकंड क्लास की संयुक्त राजस्व हिस्सेदारी 2012 में 70.2 फीसदी थी। वह घटकर 54 फीसदी पर आ गई है।
एसी-3 मुनाफे का माध्यम
कैग रिपोर्ट के अनुसार पूरी रेलवे प्रणाली में एसी-3 श्रेणी ही इकलौता ऐसा पैसेंजर सेगमेंट है जो अपनी परिचालन लागत (ऑपरेटिंग रेशियो) निकालकर शुद्ध मुनाफा कमाता है। इस वजह से रेलवे भी एसी कोचों का दायरा बढ़ा रही है। अधिकारी ने बताया कि रेलवे में एसी व स्लीपर कोच के संतुलित बनाए रखने के लिए 9,000 अतिरिक्त नॉन-एसी कोचों का निर्माण हो रहा है।
एसी-3 इकोनॉमी मास्टर स्ट्रोक
स्लीपर क्लास से एसी श्रेणी की ओर शिफ्ट हो रहे मध्यम वर्ग को और आकर्षित करने के लिए रेलवे ने 83 सीटों वाले एसी-3 इकोनोमी (3ई) कोच पेश कर एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है। नियमित एसी-3 की तुलना में 6 से 8 फीसदी सस्ता टिकट होने के कारण इस ट्रेन कोच ने स्लीपर श्रेणी के यात्रियों के लिए किफायती बजट में वातानुकूलित सफर का दरवाजा खोल दिया है।
भविष्य की संभावनाएं:
भविष्य में स्वर्णिम चतुर्भुज और व्यस्ततम रूटों पर चलने वाली ट्रेन को बहुसंख्यक एसी-3 व एसी-3 ई संरचना में बदला जाएगा। भारतीय रेल दो स्पष्ट वर्गों में विभाजित होगी। एक ओर उच्च गति व आराम चाहने वालों के लिए वंदे भारत व एसी-3 बहुल ट्रेनें और दूसरी ओर निम्न आय वर्ग के लिए अमृत भारत व समर्पित साधारण एक्सप्रेस ट्रेन पटरियों पर नजर आएंगी।


