भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा गाजे-बाजे के साथ निकाली गई
गुरुग्राम में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई। हजारों श्रद्धालु रथ के साथ चलकर भक्ति में लीन दिखे। रथ यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा की गई और श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की व्यवस्था की गई। महोत्सव 27 जुलाई तक चलेगा।

गुरुग्राम, अमर मौर्य। मिलेनियम सिटी में गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई। जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर आयोजित रथ यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भ्राता बलभद्र के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पांच स्थानों पर गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्यों की धुन पर श्रद्धालु पूरे मार्ग में भक्ति रस में डूबे नजर आए। रथ यात्रा के दौरान शहर के विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की व्यवस्था भी की गई।
रथ यात्रा का महान आयोजन
सेक्टर-15 पार्ट दो के जगन्नाथ मंदिर में आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक वैभव के अद्भुत संगम के रूप में आयोजित श्री जगन्नाथ सेवा संघ की 25वीं वार्षिक जगन्नाथ रथ यात्रा में हज़ारों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भव्य रथ यात्रा का शुभारंभ मंदिर परिसर से हुआ। यह झाड़सा रोड से होकर मंदिर परिसर पहुंची। पूरे मार्ग में जय जगन्नाथ के जयघोष, भजन-कीर्तन और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों से वातावरण भक्तिमय हो गया। हजारों श्रद्धालु सुसज्जित रथों के साथ पदयात्रा करते रहे, जबकि लाखों श्रद्धालुओं ने मार्ग के दोनों ओर खड़े होकर इस दिव्य यात्रा के दर्शन किए। पूरे शहर में आध्यात्मिक उत्साह, श्रद्धा और सामाजिक एकता का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। रथ यात्रा के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय मंत्री, धामी यात्रा संजीब शर्मा, पार्षद पवन सैनी समेत अन्य शामिल हुए। रथ यात्रा से पहले भगवान के रास्ते पर झाड़ू लगाने के लिए दिल्ली से आयकर आयुक्त प्रफुल्ल कुमार पुष्टि पहुंचे। पुरी की जगन्नाथ यात्रा में राजा द्वारा झाड़ू लगाई गई।
ओडिसी नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम
ओडिसी नृत्य झलक दिखेगी:
श्री जगन्नाथ सेवा संघ के महासचिव प्रभाकर शामल ने कहा कि इस वर्ष की रथ यात्रा में श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व सहभागिता भगवान जगन्नाथ के प्रति लोगों की अटूट आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। यह महोत्सव 27 जुलाई तक जारी रहेगा। 11 दिवसीय महोत्सव में नेत्रोत्सव, नवयौवन दर्शन, हेरा पंचमी, रथ दक्षिणायन, संध्या दर्शन, बहुदा यात्रा, एकादशी सुना बेशा, अधर पाना तथा नीलाद्रि बीजे जैसे अनेक पवित्र अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। प्रतिदिन शाम 7:00 बजे से 9:00 बजे तक ओडिशा की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित भक्ति संगीत, ओडिसी नृत्य और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जा रही हैं।
सामुदायिक भागीदारी
सोसाइटी में जय जगन्नाथ के जयकारों से गूंज:
सेक्टर-69 स्थित ट्यूलिप पर्पल सोसाइटी में गुरुवार को आध्यात्मिक खुशी का केंद्र बन गई, क्योंकि निवासियों ने जगन्नाथ रथ यात्रा निकाली। जब भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा का सजा-धजा रथ सोसाइटी से गुज़रा, तो हवा जय जगन्नाथ के जयकारों से गूंज उठी। यह रथ यात्रा भगवान की असीम करुणा का प्रतीक है। वे अपने मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकलकर बिना किसी भेदभाव के सभी से सीधे मिलते हैं। मान्यता है कि रथ की रस्सियों को खींचने से ईश्वर की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। बुजुर्गों ने प्रार्थनाओं का नेतृत्व किया और परंपराओं को आगे बढ़ाया, जबकि छोटे बच्चों और युवाओं ने पूरे उत्साह के साथ रथ को खींचा। निवासियों की भारी भीड़ ने रास्ते भर नृत्य किया और फूलों की पंखुड़ियां बरसाईं। इसके बाद महाप्रसाद बांटा गया।
भगवान को छप्पन भोग
भगवान को छप्पन भोग क्रेन से लगाया:
सेक्टर-10 सामुदायिक भवन से जगन्नाथ सेवा समिति की ओर से रथ यात्रा निकाली गई। इसमें काफी संख्या में भक्तों ने हिस्सा लिया। खांडसा मंडी, चार आठ मरला होते हुए यह रथ यात्रा सामुदायिक भवन पहुंची। रास्ते में भक्तों को भगवान जगन्नाथ प्रसाद मिला। भक्तों के रथ खींचने की होड़ रही। भगवान को छप्पन भोग क्रेन से लगाया गया। पूरे रास्ते बैंडबाजे के साथ हरे कृष्ण हरे कृष्ण हरे कृष्ण हरे-हरे के भजनों से गायकों ने माहौल में आध्यात्म भर दिया। हरिबोल के जय घोष गूंजते रहे। इसी तरह सेक्टर-43 में पावर ग्रिड कॉलोनी में और सांइ आगन में भी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा धूमधाम से निकाली गई।


