जन्माष्टमी: इस्कॉन में रजत द्रव्य से होगा कान्हा का महाभिषेक
वाराणसी में इस्कॉन परिसर में 04 सितंबर को जन्माष्टमी पर कान्हा का महाभिषेक राजत जैसे द्रव्य से किया जाएगा। यह द्रव्य 51 प्रकार के द्रव्यों के मिश्रण से बना है, जिसमें गंगाजल, दही, दूध, फल और फूलों का रस शामिल हैं। महोत्सव की शुरुआत 2 सितंबर से हो चुकी है, जिसमें संकीर्तन और प्रवचन का आयोजन होगा।

वाराणसी। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर इस वर्ष दुर्गाकुंड स्थित इस्कॉन परिसर में 04 सितंबर की रात रजत जैसे दिखने वाले द्रव्य से कान्हा का महाभिषेक किया जाएगा। यह रजत द्रव्य 51 प्रकार के द्रव्यों को मिलाकर तैयार किया गया है। इसमें गंगाजल, दही, दूध, फल और फूलों के रस भी तय मात्रा में मिलाए गए हैं। यह जानकारी बुधवार को इस्कॉन परिसर में पत्रकारों से बातचीत में प्रबंध समिति के अध्यक्ष अच्युत मोहन दास, मुरारी गुप्त दास, रसिक गोविंद दास, धवलकृष्ण दास और रामकेशव दास ने दी। आयोजकों ने बताया कि चार दिवसीय महोत्सव की शुरुआत 2 सितंबर को श्रीकृष्ण लीला पर प्रवचन से हो चुकी है।
प्रवचन सत्र का आयोजन तीन सितंबर को भी होगा। 4 को भक्त मंडलियां संकीर्तन करेंगी। यह संकीर्तन 24 घंटे अनवरत चलेगा। इसी क्रम में 4 और 5 सितंबर को आईआईटी बीएचयू के विशुद्ध बैंड भक्ति गीत प्रस्तुत करेंगे। 4 सितंबर को सुबह मंगला दर्शन के साथ भक्तों द्वारा अभिषेक का क्रम आरंभ हो जाएगा। यह क्रम संध्या आरती के पूर्व तक चलेगा। इसके बाद रात 10 बजे से रजत कलशों में पूरित रजत द्रव्यों के मिश्रण से महाभिषेक आरंभ होगा। यह क्रम मध्यरात्रि तक चलेगा। अभिषेक के बाद लड्डू गोपाल को 108 प्रकार के व्यंजनों का विशेष भोग अर्पित किया जाएगा। 5 सितंबर को श्रील प्रभुपाद का आविर्भाव दिवस मनाया जाएगा। उनके विग्रह का भी 51 प्रकार के द्रव्यों से अभिषेक एवं पूजन होगा।


