शानो-शौकत से निकला बारावफात का जुलूस
इस्लाम के पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के यौम-ए-पैदाइश पर शहर में जश्न का माहौल था। पारंपरिक बारावफात जुलूस में श्रद्धालुओं का सैलाब, सब्ज परचम और नात-ओ-दुरूद की गूंज ने माहौल को रूहानी बना दिया। लोग नमाज के बाद छोटे जुलूसों में शामिल होकर मुख्य जुलूस में पहुंचे, जो उलमा-ए-कराम की देखरेख में शुरू हुआ।

पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब के यौम-ए-पैदाइश (ईद-ए-मिलादुन्नबी) के मुकद्दस मौके पर शहर का कोना-कोना रूहानी फिजा और मरहबा या मुस्तफा की दिलकश गूंज से सराबोर हो उठा। जश्ने ईद-ए-मिलादुन्नबी के मुबारक मौके पर पारंपरिक बारावफात का केंद्रीय जुलूस-ए-मोहम्मदी अकीदत, एहतराम और बेमिसाल शानो-शौकत के साथ निकाला गया। जुलूस में उमड़े अकीदतमंदों का सैलाब, लहराते सब्ज परचम, और गूंजती नात-ओ-दुरूद की सुरीली आवाजों ने पूरे माहौल को नूरानी बना दिया। सुबह की नमाज के बाद से ही शहर के विभिन्न मोहल्लों से छोटे-छोटे जुलूस और अंजुमने अपने-अपने क्षेत्रों से रवाना होकर जुलूस के प्रस्थान स्थल पर इकट्ठा होने लगी थीं। मुख्य जुलूस का आगाज तयशुदा समय पर उलमा-ए-कराम और शहर के गद्दीशीनों की सरपरस्ती में दुआ-ख्वानी के साथ हुआ।
जुलूस की शुरुआत में मासूम बच्चों के दस्तों से लेकर बुजुर्गों और युवाओं तक, हर कोई पैगंबर साहब की शान में नात शरीफ पढ़ते हुए आगे बढ़ रहा था।


