ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News देशकोरोना वैक्सीन के परिवहन के लिए सरकार ने जारी की गाइडलाइंस, सूखी बर्फ में पैक होंगे टीके

कोरोना वैक्सीन के परिवहन के लिए सरकार ने जारी की गाइडलाइंस, सूखी बर्फ में पैक होंगे टीके

कोरोना वायरस के वैक्सीन के परिवहन और हैंडलिंग के लिए डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने दिशा निर्देश जारी कर दिया है। केंद्र ने एयरलाइंस को सूखी बर्फ के पैकेट में टीके की पैकिंग के निर्देश दिए...

कोरोना वैक्सीन के परिवहन के लिए सरकार ने जारी की गाइडलाइंस, सूखी बर्फ में पैक होंगे टीके
अनीशा दत्ता,नई दिल्लीFri, 08 Jan 2021 08:08 PM
ऐप पर पढ़ें

कोरोना वायरस के वैक्सीन के परिवहन और हैंडलिंग के लिए डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने दिशा निर्देश जारी कर दिया है। केंद्र ने एयरलाइंस को सूखी बर्फ के पैकेट में टीके की पैकिंग के निर्देश दिए हैं। डीजीसीए ने कहा है कि वैक्सीन ट्रांसपोर्ट के लिए कई तरीकों में से हवाई परिवहन सबसे अच्छा विकल्प है। 

इसलिए यह जरूरी है कि एयर लॉजिस्टिक वैश्विक सुरक्षा मानकों और स्थानीय परिस्थितियों के आधार सभी आवश्यकताओं को पूरा करे। डीजीसीए ने कहा है कि वे ऑपरेटर जिनको की वर्तमान में डैंजरस सामानों को ले जाने के लिए अधिकृत किया गया है वे सभी चीजों का ध्यान में रखते हुए दिशा-निर्दोंशी के मानकों का पूरा करते हुए टीके को सूखी बर्फ में पैक कर ले जा सकते हैं। 

वहीं, नॉन शेड्यूल ऑपरेटर या फिर सामान्य विमान को अगर सूखे बर्फ में पैक वैक्सीन के ट्रांसपोर्टेशन के लिए इस्तेमाल किया जाता हैं तो इसके लिए उनको अनुमति लेनी जरूरी होगी। यह प्रत्येक ऑपरेटरों की जिम्मेदारी है। वहीं, वैक्सीन के लिए तापमान की जानकारी देते हुए डीजीसीए ने कहा है कि कोरोना टीकों के लिए -8 डिग्री सेल्सियस से -70 डिग्री सेल्सियस तक तापमान की जरूरत होगी। इसलिए परिवहन के दौरान रेफ्रिजरेंट सामग्री जरूरी हो जाती है।

डीजीसीए ने कहा है कि इसके लिए अलग-अलग विकल्प भी हो सकते हैं। शुष्क बर्फ (कार्बन डाइऑक्साइड सॉलिड) का उपयोग सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है, यह सस्ता के साथ-साथ हवाई मार्ग से परिवहन के लिए आसानी से उपलब्ध भी हो जाएगा। नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने कहा कि ड्राई आइस सामान्य वातावरण दबाव में -78 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान में कार्बन डाईऑक्साइड गैस में तब्दील हो जाती है और अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (आईसीएओ) ने इसे 'खतरनाक वस्तु के रूप में वर्गीकृत किया है।

Advertisement