सूरत के जल संरक्षण मॉडल को अपनाने की जरूरत: राज्यपाल
सिद्धार्थनगर, इन्द्र मणि पाण्डेय। प्रदेश की राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि
सिद्धार्थनगर, इन्द्र मणि पाण्डेय। प्रदेश की राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि भविष्य में जल, ऊर्जा और पर्यावरण का संकट और अधिक गंभीर रूप ले सकता है। ऐसे में केवल विकास की बात करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि जल संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को गंभीरता से चिंतन और मनन करना होगा। उन्होंने सूरत के जल संरक्षण मॉडल को अपनाने की जरूरत बताई।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के दशम दीक्षांत समारोह को सोमवार को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने जल संरक्षण के क्षेत्र में गुजरात के सूरत शहर के मॉडल का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सूरत में गंदे पानी के वैज्ञानिक उपचार के साथ उसके पुनः उपयोग और स्वच्छ पेयजल के संरक्षण की दिशा में प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। यह मॉडल पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के शिक्षक व विद्यार्थियों का एक दल सूरत जाकर वहां की जल प्रबंधन प्रणाली का अध्ययन करें। वहां के अनुभवों के आधार पर विश्वविद्यालय परिसर में भी जल संरक्षण एवं जल पुनर्चक्रण की अभिनव पहल की जाए।
साथ ही आसपास के क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाए। राज्यपाल ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। इसलिए शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में पर्यावरणीय चेतना विकसित करने की भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे जल बचाने, ऊर्जा के विवेकपूर्ण उपयोग और पर्यावरण संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं और समाज को भी इसके लिए प्रेरित करें। इस मौके पर पर्यावरणविद प्रो.मधुलिका अग्रवाल, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. रजनी तिवारी, कुलपति प्रो. कविता शाह, कुलसचिव दीननाथ यादव, नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय, सांसद जगदंबिका पाल, विधायक श्यामधनी राही, विधायक विनय वर्मा, पूर्व मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी, पूर्व कुलपति डॉ. रजनीकांत पांडेय आदि मौजूद रहे।


