ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News देशयूजीसी-नेट, नीट विवाद पर संघ में बेचैनी; एबीवीपी बोली- सरकार को जवाब देना चाहिए

यूजीसी-नेट, नीट विवाद पर संघ में बेचैनी; एबीवीपी बोली- सरकार को जवाब देना चाहिए

नेट और नीट इन परीक्षाओं को आयोजित करने वाली राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए, एबीवीपी के राष्ट्रीय महासचिव याज्ञवल्क्य शुक्ला ने एनईईटी की गड़बड़ी का जिक्र किया।

यूजीसी-नेट, नीट विवाद पर संघ में बेचैनी; एबीवीपी बोली- सरकार को जवाब देना चाहिए
government should answer as uneasiness in the rss abvp over ugc-net neet controversy
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीFri, 21 Jun 2024 12:54 AM
ऐप पर पढ़ें

यूजीसी-नेट परीक्षा (UGC-NET) रद्द होने और बिहार और गुजरात में नीट-यूजी पेपर (UGC-NEET) के कथित लीक की पुलिस जांच से भाजपा और आरएसएस से जुड़े संगठनों में बेचैनी पैदा हो गई है। इसमें भाजपा की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) भी शामिल है। एबीवीपी ने गुरुवार को कहा कि "जब प्रजा की तरफ से सवाल उठाया गया है, तो सरकार की तरफ से जवाब आना चाहिए।" बता दें कि केंद्र सरकार देश की टॉप परीक्षाएं कराने वाली राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के कामकाज की जांच और सुधारों की सिफारिश करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित करेगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बृहस्पतिवार को इसकी घोषणा की। यूजीसी-नेट परीक्षा रद्द किए जाने और नीट परीक्षा को लेकर जारी विवाद के बीच प्रधान ने समिति गठित करने की घोषणा की।

नेट और नीट इन परीक्षाओं को आयोजित करने वाली राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) की “विश्वसनीयता” पर “प्रश्नचिह्न” लगाते हुए, एबीवीपी के राष्ट्रीय महासचिव याज्ञवल्क्य शुक्ला ने एनईईटी की गड़बड़ी का जिक्र किया। द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए उन्होंने कहा, “एनटीए में कुप्रबंधन की धारणा है। ऐसा कैसे हो रहा है कि कुछ केंद्रों पर प्रश्नपत्र 15-20 मिनट देरी से पहुंच रहे हैं? ऐसा कैसे हो रहा है कि एक ही केंद्र के 7-8 छात्रों को 100% अंक मिल गए? 67 छात्रों को 720 अंक कैसे मिल गए? एनटीए की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान है और जब प्रजा की तरफ से सवाल है, तो सरकार की तरफ से जवाब होना चाहिए।”

रिपोर्ट के मुताबिक, एबीवीपी नेता ने कहा, "क्या ऐसा हो सकता है कि जब राष्ट्रीय नेतृत्व का ध्यान कहीं और (लोकसभा चुनाव में) था, तब कुछ गड़बड़ हुआ हो? एनटीए की भूमिका संदेह के घेरे में है। एबीवीपी मांग करती है कि पूरे प्रकरण की सीबीआई से जांच होनी चाहिए। एनटीए की भूमिका की जांच होनी चाहिए। ग्रेस मार्क्स की प्रक्रिया की समीक्षा होनी चाहिए। इस मुद्दे पर हमारा प्रतिनिधिमंडल शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मिल चुका है।"

शुक्ला के अनुसार, एबीवीपी ने 5 जून को आंदोलन शुरू किया था। उन्होंने कहा, "हमने 6 जून को ग्रेस मार्क्स के मुद्दे पर सवाल उठाए थे। और 8 जून को हमने देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की। सरकार को परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में काम करना चाहिए ताकि छात्रों का सिस्टम पर भरोसा बना रहे। इन परीक्षाओं से छात्रों और अभिभावकों दोनों के लाखों सपने जुड़े हैं।" एबीवीपी ने इस संबंध में अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में एक प्रस्ताव भी पारित किया है। इसने देश में परीक्षाओं में अनियमितताओं की जांच के लिए एक अलग केंद्रीय एजेंसी के गठन की भी मांग की है।

नीट और नेट प्रकरण ने सत्तारूढ़ पार्टी के कुछ अन्य वर्गों को भी परेशान कर दिया है। भाजपा के राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा ने पेपर सेट करने वालों और कोचिंग संस्थानों के बीच किसी भी तरह की सांठगांठ को अपराध घोषित करने की मांग की। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए सिन्हा ने कहा, "शिक्षा क्षेत्र में एक निहित स्वार्थ विकसित हो गया है, जो न तो सार्वजनिक है और न ही निजी। इसके इर्द-गिर्द एक पैसा कमाने वाला उद्योग विकसित हो गया है और यह शिक्षा के विभिन्न आयामों को प्रभावित कर रहा है। सुधारात्मक उपाय किए जाने की आवश्यकता है। कोचिंग संस्थानों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। हजारों केंद्रों पर परीक्षाएं आयोजित होने के कारण, कुछ परीक्षा केंद्रों की साख पर सवाल उठते रहते हैं। इसके कारण पहले से पूरी तैयारी की आवश्यकता होती है। परीक्षा केंद्रों में बाहरी पर्यवेक्षकों का होना अनिवार्य है और शिक्षकों द्वारा कोचिंग केंद्रों से जुड़े किसी भी तरह के प्रश्न तैयार करना अपराध माना जाना चाहिए। प्रक्रिया, लोग और प्रतिभागी सभी बहुत महत्वपूर्ण हैं।"

रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार के मधुबनी से भाजपा के लोकसभा सांसद अशोक कुमार यादव ने कहा, "निश्चित रूप से ऐसी घटनाएं सभी के लिए चिंता का विषय हैं और ऐसे गलत कामों में लिप्त लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। इस बात को लेकर सभी चिंतित हैं। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं दी जानी चाहिए। केंद्र और बिहार सरकार दोनों ही इस बात को लेकर चिंतित हैं। मुझे पता चला है कि बिहार सरकार अगले विधानसभा सत्र में पेपर लीक रोकने के लिए एक मसौदा कानून पेश करने जा रही है।"