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देशकोरोना से बच्चों को बचाने के लिए व्यवस्थित और व्यापक तरीके से कर रहे काम: केंद्र सरकार

लाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्ली।Published By: Himanshu Jha
Tue, 01 Jun 2021 06:14 PM
कोरोना से बच्चों को बचाने के लिए व्यवस्थित और व्यापक तरीके से कर रहे काम: केंद्र सरकार

केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा है कि कोविड -19 संक्रमण ने बच्चों को गंभीर रूप से प्रभावित नहीं किया है। उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता बहुत कम है, लेकिन सरकार इस चिंता के बीच तैयारियों पर जोर दे रही है कि वे कोरोनो वायरस महामारी की संभावित तीसरी लहर के दौरान प्रभावित हो सकते हैं।

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल ने कहा, “कोविड महामारी से संक्रमित हो रहे बच्चों पर हम ज्यादा फोकस कर रहे हैं। बच्चों में अक्सर संक्रमण हो जाता है लेकिन उनके लक्षण न्यूनतम या शून्य होते हैं। कोरोना संक्रमण ने बच्चों को गंभीर रूप से प्रभावित नहीं किया है। उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता बहुत कम है।”

पॉल ने कहा, “लेकिन बच्चों में वायरस अपना व्यवहार बदल सकता है। महामारी विज्ञान की गतिशीलता में बदलाव हो सकता है। कोरोना का असर बच्चों में बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। आंकड़ों से पता चला है कि कम संख्या में बच्चों को अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है। हम दिन-ब-दिन तैयारियों को आगे बढ़ा रहे हैं।”

उन्होंने यह भी कहा, "मुझे आपको यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हम अभी और भविष्य में भी बाल चिकित्सा कोविड रोग की समस्या को दूर करने के लिए बहुत व्यवस्थित, व्यापक रूप से काम कर रहे हैं। हम आवश्यकतानुसार अपनी सुविधाओं को मजबूत करेंगे और क्या-क्या आवश्यक है, इसका ऑडिट करेंगे। सबसे खराब स्थिति में इसकी आवश्यकता हो सकती है।" 

पिछले महीने, पॉल ने कहा था कि बच्चे संक्रमण से सुरक्षित नहीं हैं, लेकिन प्रभाव न्यूनतम है। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चे इस संक्रमण से प्रतिरक्षित नहीं हैं और वे दूसरों को भी संक्रमित कर सकते हैं लेकिन बच्चे आमतौर पर गंभीर संक्रमण से पीड़ित नहीं होते हैं।

विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि भले ही महामारी की चल रही दूसरी लहर धीरे-धीरे नियंत्रण में आ रही हो, लेकिन संभावित तीसरी लहर बच्चों को प्रभावित कर सकती है। दैनिक कोविड -19 मामलों की संख्या में लगातार गिरावट आई है और कोरोना वायरस रोग की पॉजिटिव रेट में गिरावट आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य और जिला अधिकारियों से संक्रमण के संचरण को लेकर युवाओं और बच्चों में गंभीरता पर डेटा एकत्र करने को कहा है।

महामारी की पहली लहर में 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को संक्रमण के लिए सबसे अधिक संवेदनशील माना जाता था। चल रही दूसरी लहर ने कई युवाओं को कोरोना वायरस बीमारी को प्रभावित किया है। 

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