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सरकार ने सस्ती दवाएं सर्वसुलभ करने के लिए जन औषधि केंद्र खोले हैं, लेकिन दवाओं की कमी के कारण मरीजों को ब्रांडेड दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। गाजीपुर में 65 औषधि केंद्र हैं, लेकिन आवश्यक दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। संचालकों ने बताया कि चार महीने से दवाओं का आर्डर किया गया है, फिर भी आपूर्ति नहीं हो रही है।

गाजीपुर, संवाददाता। सरकार ने सस्ती दवाएं सर्वसुलभ करने के लिए जन औषधि केंद्र खोले हैं। कंपनी की ब्रांडेड दवाओं की अपेक्षा खासे सस्ते दामों में जेनरिक दवाओं का सपना चूर हो गया है। डॉक्टर के लिखे गए पर्चों के बाद भी केंद्रों पर दवाएं उपलब्ध नहीं है। जिससे संचालकों को ब्रांडेड उत्पाद खरीदने पड़ रहे हैं। वहीं सरकारी अस्पतालों के परिसर में खुले केंद्रों पर संचालकों की ओर से ब्रांडेड दवाओं को भी मिलाकर विक्रय करने की शिकायत ग्राहक कर रहे है। जिससे मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। गाजीपुर में मेडिकल कालेज सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर 15 जनऔषधि केंद्र खुले है। जबकि 50 बाहरी परिसरों में खुले हैं। 40 लाख की आबादी को मात्र 65 औषधि केंद्रों का सहारा है। यह काम चलाऊ सिस्टम से संचालित हो रहे हैं। एंटीबायोटिक, एंटीस्पासमोडिक, विटामिन सी, मल्टी विटामिन, एंटी वर्म की पर्याप्त रेंज नहीं है। लिखी एंटीबायोटिक दवा न मिलने पर दूसरी एंटी बायोटिक मजबूरी में लेनी पड़ रही है। टेबलेट, कैप्सूल, ट्यूब, सिरप के माध्यम से जनता तक पहुंचाने वाली दवाओं की उपलब्धता न होने से जनता परेशान हो रही है। हालात यह है कि दिनभर पर्चा लेकर एक औषधि केंद्र से दूसरे केंद्र की दूरी नापनी पड़ रही है।
मांग पत्र और डिमांड लगी, नहीं हो रही पूर्ति
जन औषधि केंद्र का संचालन करने वालों ने बताया कि चार माह पहले दवाओं के आर्डर किए गए हैं, लेकिन अब तक दवाएं नहीं मिल सकी हैं। दवा न होने की वजह से स्टॉक खाली है। थोड़ी बहुत एंटीबॉयोटिक दवाएं हैं। इसके अलावा शुगर, बीपी, कैल्शियम, विटामिन की दवाएं खत्म हैं। ऐसे में ग्राहक लौटाएं जा रहे हैं। शहर के दूसरे संचालक ने बताया कि दवाएं पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रही हैं। तीन लाख के ड्राफ्ट में 50 से 60 हजार की दवाएं ही मिल पाती हैं। तमाम लोग आते हैं और दवाएं न मिलने के चक्कर में लौट जाते हैं। वहीं होल सेलर्स बता रहे हैं कि अब उत्पादन की स्थिति सुधरने वाली है। जल्द ही पर्याप्त मात्रा में दवाएं उपलब्ध होगी।
24 सौ दवाओं का स्टाक
जन औषधि केंद्र करीब 24 सौ दवाओं के स्टॉक हैं, लेकिन महज 200 दवाओं का ही स्टॉक भी संचालकों को नहीं मिल पा रहा है। बुखार, बीपी, शुगर, दर्द जैसी दवाओं की आपूर्ति संस्था नहीं कर पा रही है। ऐसी स्थिति में संचालकों को खर्च निकलना मुश्किल हो गया है।
मजबूरी में लेनी पड़ी ब्रांडेड दवाएं
मेडिकल कालेज से संबद्ध अस्पताल में इलाज के लिए आए सोनू यादव को औषधि केंद्र से निराश लौटना पड़ा। उन्हें दाद की क्रीम और दवा चाहिए थी, लेकिन दोनों दवाएं न मिलने से मजबूरी में ब्रांडेंड दवाएं लेनी पड़ीं। कुछ ऐसा ही हाल प्रिया का था। जिला अस्पताल के औषधि केंद्र पर स्किन डिजिज से संबंधित दवा लेने के लिए आयी थी, लेकिन दवा न होने की वजह से वह भी निराश होकर चली गईं। ऐसे सैकड़ों मरीज मेडिकल कालेज से संबद्ध अस्पताल से लौटकर ब्रांडेड दवाएं मजबूरी में खरीद रहे हैं।
वर्जन
जिले के कुछ जन औषधि केंद्रों पर समस्या है, जिसका शीघ्र ही समाधान कर दिया जाएगा। जबकि सभी केंद्रों पर पर्याप्त दवाएं उपलब्ध, जहां कमी होती है, वहां दवा की आपूर्ति की जाती है। ---- काशीनाथ, जिला प्रबंधक, जनऔषधि केंद्र


