मोटे अनाज: सरकारी प्रोत्साहन से खेती पर बल, खटक रहा बाजार का अभाव

हिन्दुस्तान, नवादा
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जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में मोटे अनाजों को फिर से जीवित करने के लिए सरकारी पहल जारी है। इस साल लगभग 1,200 हेक्टेयर में मोटे अनाज की खेती करने का लक्ष्य है। हालांकि, बाजार की कमी और बिचौलियों का दखल किसानों के लिए संकट बना हुआ है।

मोटे अनाज: सरकारी प्रोत्साहन से खेती पर बल, खटक रहा बाजार का अभाव

जिले के पहाड़ी और कम पानी वाले क्षेत्रों के लिए जो मोटे अनाज कभी वरदान कहे जा रहे थे, उन्हें सरकारी नीति के तहत फिर से जीवित करने की पहल हो रही है। अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के बाद से शुरू हुई सरकारी पहल इस खरीफ सीजन 2026 में भी जारी है। जिला कृषि विभाग द्वारा जिले के सुदूर इलाकों में मड़ुआ यानी रागी, ज्वार और सावा समेत संकर मक्का के हाइब्रिड बीज बांटने की शुरुआत कर दी गयी है। भले ही यह सवाल अब भी सामने खड़ा है कि ​सरकारी प्रोत्साहन की उपलब्धता और समुचित बाजार की अनुपलब्धता के बीच किसानों का भला कैसे हो सकेगा।

मुफ्त बीज का वितरण जगा रहा किसानों में बेहतरी की आस

इस खरीफ सीजन में जिला कृषि कार्यालय ने मोटे अनाजों के रकबे को बढ़ाने के लिए एक महत्वाकांक्षी खाका तैयार किया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल जिले के विभिन्न प्रखंडों में लगभग 1,200 हेक्टेयर में मोटे अनाजों की खेती का लक्ष्य रखा गया है। ​राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत किसानों को 100% अनुदान यानी नि:शुल्क मड़ुआ और बाजरा समेत सावा एवं संकर मक्का के मिनीकिट बीज बांटे गए हैं। विभागीय जानकारी के मुताबिक अब तक जिले के 3,500 से अधिक सीमांत किसानों को इस अभियान से जोड़ा जा चुका है। रागी यानी मड़ुआ के लिए 195.00, सावा के लिए 10.00, ज्वार के लिए 35.00 तथा संकर मक्का के लिए 165.00 क्विंटल बीज का नि:शुल्क वितरण का लक्ष्य निर्धारित है। वितरण की गति तेज है और किसान 70 फीसदी तक योजना का लाभ उठा चुके हैं।

बाजार का ढांचा परेशानीदायक, समितियों का भी साथ नहीं

नवादा जिले में धान और गेहूं की खरीद के लिए पैक्स यानी प्राथमिक कृषि साख समिति और व्यापार मंडलों का एक जाल बिछा है। हालांकि, मोटे अनाजों के मामले में यह पूरा तंत्र सहयोगी नजर नहीं आता है। ​किसान नेता मनोज कुमार बताते हैं कि केंद्र सरकार ने विपणन वर्ष 2025-26/2026 के लिए मड़ुआ यानी रागी का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4,290 रुपए प्रति क्विंटल और बाजरा का 2,625 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। कागजों पर यह कीमत बहुत आकर्षक दिखती है, लेकिन नवादा जिले के किसी भी पैक्स केंद्र पर मड़ुआ या ज्वार आदि की खरीद का प्रावधान ही नहीं है। सहकारिता विभाग के पास न तो मोटे अनाजों की तौल के लिए कोई गाइडलाइन है और न ही जिला प्रशासन ने इसके लिए कोई नोडल एजेंसी बनाई है।

लागत का गणित और बिचौलियों की चांदी

जब सरकारी खरीद नहीं होती, तो बाजार में बिचौलियों और आढ़तियों का एकाधिकार हो जाता है। जिले के किसानों ने बताया कि सरकार द्वारा बीज की सहायता के बाद भी उपज के लिए बाजार का अभाव निराशाजनक है। सरकार उपज को लेकर इतना सतर्क है तो किसानों को बेहतर बाजार मूल्य प्राप्ति की व्यवस्था भी सहकारी समितियों के माध्यम से कराया जाना समय की मांग है। जिले के किसान मोसाफिर कुशवाहा, शंकर राम, मोहन यादव, नारायण यादव, श्रवण सिंह आदि ने मोटे अनाजों के गणित के बारे में बताया कि एक एकड़ में मड़ुआ उगाने में जुताई, खाद और कटनी मिलाकर औसतन 8,500 से 10,000 रुपए तक का खर्च आता है। प्रति एकड़ औसतन आठ क्विंटल तक की उपज होती है। अगर किसान इसे एमएसपी पर बेचे तो उसे 34,320 रुपए मिलने चाहिए, लेकिन खुले बाजार में उसे बमुश्किल 20,000 रुपए ही मिल पाते हैं। यानी एमएसपी के साथ तुलना करने पर स्थिति यह बनती है कि मेहनत किसान की और प्रति एकड़ सीधे 14,000 रुपए का मुनाफा बिचौलियों की जेब में जा रहा है।

प्रोसेसिंग यूनिट्स और प्रसंस्करण का अभाव खटक रहा किसानों को नवादा

जिले में मोटे अनाज की खेती की स्थिति को बेहतर बनाने को लेकर प्रगतिशील किसान सह किसान नेता मनोज कुमार, राजीव कुमार आदि ने कहा स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण की व्यवस्था होना बेहद जरूरी है। मड़ुआ और बाजरा को सीधे खाने के बजाय आज का शहरी बाजार मड़ुआ का आटा, बिस्कुट और मल्टीग्रेन मिक्स के रूप में पसंद करता है। नवादा के उद्योग विभाग या जीविका दीदियों के समूहों को मिलेट्स प्रोसेसिंग से जोड़ने की योजनाएं बनें। जिले में सरकारी या अर्ध-सरकारी क्लीनिंग एंड ग्रेडिंग यूनिट स्थापित हों तो, किसान अपने अनाज को साफ कर के पैकेज्ड फॉर्म में ऊंचे दामों पर बेच सकेंगे। उन्होंने कहा कि ​अगर सरकार वाकई नवादा के जल संकट से जूझते इलाकों में मिलेट्स को बढ़ावा देना चाहती है, तो उसे केवल बीज बांटने के लिए तत्पर रहना होगा, बल्कि इसके उत्पादन को भी बाजार से जोड़ना होगा। इसके अलावा, नवादा जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों और सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील में मड़ुआ के हलवे या बाल आहार को अनिवार्य किया जाए। इसके लिए सीधे स्थानीय किसानों से पैक्स के माध्यम से खरीदारी हो। इसके साथ ही, जैसे धान अधिप्राप्ति के लिए किसानों का निबंधन होता है, वैसे ही खरीफ की शुरुआत में ही मिलेट्स उगाने वाले किसानों का प्री-रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जाए ताकि उत्पादन का सटीक अनुमान लग सके। बीज वितरण के साथ ही, इस प्रकार की सरकारी व्यवस्था मिल सकी तो किसानों की अभिरुचि बढ़ेगी और सही मायनों में नवादा मोटे अनाजों का हब बन सकेगा। (नवादा से राजेश मंझवेकर)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किसानों को कितने हेक्टेयर में मोटे अनाज की खेती करने का लक्ष्य रखा गया है?
इस साल जिले के विभिन्न प्रखंडों में लगभग 1,200 हेक्टेयर में मोटे अनाजों की खेती का लक्ष्य रखा गया है।
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